विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-62

विश्वगुरू के रूप में भारत-62

राकेश कुमार आर्य   इसी समय भारत की राष्ट्रवादी शक्तियों ने अपना योग विश्व को प्रस्तुत कर दिया है। हताशा और निराशा का मारा…

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समाज बच्चों की मौत से जुड़े सवाल 

बच्चों की मौत से जुड़े सवाल 

-ललित गर्ग- गुजरात में विधानसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 24 घंटों के बीच आईसीयू में 9 नवजात शिशुओं की…

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राजनीति दागी नेताओं पर लगाम से सुधरेगी राजनीति

दागी नेताओं पर लगाम से सुधरेगी राजनीति

संदर्भ : राजनीति में अपराध को रोकने चुनाव आयोग की मांग सुरेश हिन्दुस्थानी हमारे देश में जिस प्रकार से राजनीति में अपराध व्याप्त होता जा…

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शख्सियत गुरुनानक देव :  महान धर्म प्रवर्तक

गुरुनानक देव : महान धर्म प्रवर्तक

गुरुनानक देव जयन्ती- 4 नवम्बर 2017 के उपलक्ष्य में  -ललित गर्ग –   विश्व मंे अनेक धर्म-सम्प्रदाय प्रचलित हैं। सभी धर्मों ने मानव जीवन का…

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धर्म-अध्यात्म यज्ञोपवीत धारण करना आवश्यक क्यों हैं?

यज्ञोपवीत धारण करना आवश्यक क्यों हैं?

मनमोहन कुमार आर्य, वैदिक धर्म व संस्कृति में मनुष्य के 16 संस्कार किये जाने का विधान है। इनमें से एक संस्कार उपनयन संस्कार कहलाता है।…

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विश्ववार्ता सोवियत रूस में क्रांति का ऐसा हश्र क्यों हुआ?

सोवियत रूस में क्रांति का ऐसा हश्र क्यों हुआ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक रुस में हुई साम्यवादी सोवियत क्रांति को पूरे 100 साल हो गए।  इसे 7 नवंबर को मनाया जाता है लेकिन रुसी भाषा…

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कविता आज अद्भुत स्वप्न समझा !

आज अद्भुत स्वप्न समझा !

आज अद्भुत स्वप्न समझा, जगत की जादूगरी का; नहीं कोई रहा अपना, पात्र था हर कोई उसी का !   स्वार्थ लिपटे व्यर्थ चिपटे, चिकने…

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कविता नव रूप में नव प्रीति में !

नव रूप में नव प्रीति में !

‘नव रूप में नव प्रीति में , आते रहेंगे ज्योति में; अनुभूति में चित दीप में, वाती जलाते श्रीति में !   वे दूर ना हम से गये, बस टहलने सृष्टि गये; अवलोकते हमको रहे, वे और भास्वर हो रहे !   देही बदल आजाएँगे, वे और प्यारे लगेंगे; दुलरा हमें पुनि जाएँगे, जो रह गया दे जाएँगे !   है लुप्त ना कोई यहाँ, बस व्याप्ति के वश जहान; है जन्मना मरना वहाँ, पर सभी कुछ उनके मना !   नाटक नियति के पात्र वे, अपना है धर्म निभा रहे; ‘मधु’ आ रहे या जा रहे, गोदी सदा प्रभु की रहे !  …

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-61

विश्वगुरू के रूप में भारत-61

तालाबों को प्राचीन काल में हमारे पूर्वज लोग बड़ा स्वच्छ रखा करते थे। पर आजकल तो इनमें कूड़ा कचरा और गंदी नालियों का गंदा पानी…

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समाज मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श 

मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श 

विश्व मितव्ययिता दिवस 30 अक्टूबर 2017 पर विशेष -ललित गर्ग- प्रत्येक वर्ष 30 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। वर्ष…

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धर्म-अध्यात्म बलिवैश्वदेव यज्ञ की अनिवार्यता व उसका स्वरूप

बलिवैश्वदेव यज्ञ की अनिवार्यता व उसका स्वरूप

मनमोहन कुमार आर्य यज्ञ परोपकार के कार्यों को कहते हैं। यज्ञ ऐसा कार्य व कर्म है जिससे अपना भला होता है व दूसरों को भी…

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राजनीति “सत्यमेव जयते” संग “शक्तिमेव जयते” का उपयुक्त समय

“सत्यमेव जयते” संग “शक्तिमेव जयते” का उपयुक्त समय

संदर्भ: कमल हासन दक्षिण व मुम्बईया फिल्मों में लम्बी पारी खेल चुके कमल हासन अपने व्यक्तिगत जीवन के सम्बंधों में एक असफल व्यक्ति रहे हैं.…

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