कविता नव रूप में नव प्रीति में !

नव रूप में नव प्रीति में !

‘नव रूप में नव प्रीति में , आते रहेंगे ज्योति में; अनुभूति में चित दीप में, वाती जलाते श्रीति में !   वे दूर ना हम से गये, बस टहलने सृष्टि गये; अवलोकते हमको रहे, वे और भास्वर हो रहे !   देही बदल आजाएँगे, वे और प्यारे लगेंगे; दुलरा हमें पुनि जाएँगे, जो रह गया दे जाएँगे !   है लुप्त ना कोई यहाँ, बस व्याप्ति के वश जहान; है जन्मना मरना वहाँ, पर सभी कुछ उनके मना !   नाटक नियति के पात्र वे, अपना है धर्म निभा रहे; ‘मधु’ आ रहे या जा रहे, गोदी सदा प्रभु की रहे !  …

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-61

विश्वगुरू के रूप में भारत-61

तालाबों को प्राचीन काल में हमारे पूर्वज लोग बड़ा स्वच्छ रखा करते थे। पर आजकल तो इनमें कूड़ा कचरा और गंदी नालियों का गंदा पानी…

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समाज मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श 

मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श 

विश्व मितव्ययिता दिवस 30 अक्टूबर 2017 पर विशेष -ललित गर्ग- प्रत्येक वर्ष 30 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। वर्ष…

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धर्म-अध्यात्म बलिवैश्वदेव यज्ञ की अनिवार्यता व उसका स्वरूप

बलिवैश्वदेव यज्ञ की अनिवार्यता व उसका स्वरूप

मनमोहन कुमार आर्य यज्ञ परोपकार के कार्यों को कहते हैं। यज्ञ ऐसा कार्य व कर्म है जिससे अपना भला होता है व दूसरों को भी…

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राजनीति “सत्यमेव जयते” संग “शक्तिमेव जयते” का उपयुक्त समय

“सत्यमेव जयते” संग “शक्तिमेव जयते” का उपयुक्त समय

संदर्भ: कमल हासन दक्षिण व मुम्बईया फिल्मों में लम्बी पारी खेल चुके कमल हासन अपने व्यक्तिगत जीवन के सम्बंधों में एक असफल व्यक्ति रहे हैं.…

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कविता कुछ नया, कुछ पुराना

कुछ नया, कुछ पुराना

  पुरानी धुनों पे नये गीत लिखना, पुराने गीतों को नई ताल देना, नई ताल पर पांवो का थिरकना, बुरा तो नहीं है पर , पुराने को पुराना ही रहने देना। पुरानी नीव पर नया घर बनाना, पुराने की ख़ुशबू मगर रहने देना। नये को स्वीकारो, पुराना नकारो ऐसा नहीं कभी भी होने देना। जो आज नया है, कल पुराना लगेगा पुराने को हमने कुछ यों संवारा, पुराने नये में अंतर न जाना। समय की पर्तों मे है जो पुराना, नये ढंग में लायेगा वो ज़माना, ना कुछ नया है ना ही पुराना बदलाव करने का है बहाना। ना पुराना सब सही था मैने न जाना ना नया सब गलत है,ये भी ना माना समझ जाओ तो, नयों को समझाना पुरानों और नयों को अब है पीढ़ियों का अंतर मिटाना, दोनो को जोड़कर समन्वय बनाना।

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समाज “कैसे कम हो इस्लामिक कट्टरवाद” 

“कैसे कम हो इस्लामिक कट्टरवाद” 

यह कैसी विचारधारा हैं कि हिन्दू घर्मनिरपेक्ष रहकर प्यार-मोहब्बत फैलाये पर मुसलमान धार्मिक कट्टरता की संकीर्णता से उपजी घृणा व वैमनस्यता के जंजाल से बाहर…

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राजनीति संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

ललित गर्ग- मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला…

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राजनीति गुजरात में कांग्रेस के सामने चुनौतियों का पहाड़

गुजरात में कांग्रेस के सामने चुनौतियों का पहाड़

सुरेश हिन्दुस्थानी देश के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में अभी से ऐसे हालात बनने लगे हैं, जिनके कारण…

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विविधा सिर्फ अंग्रेजी काफी नहीं: राष्ट्रपति कोविंद

सिर्फ अंग्रेजी काफी नहीं: राष्ट्रपति कोविंद

डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केरल में वही बात कह दी, जो मैं अपने भाषणों में अक्सर कहा करता हूं। वे हमारे…

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धर्म-अध्यात्म अभागे देश भारत ने ऋषि दयानन्द की शिक्षाओं से लाभ नहीं उठाया

अभागे देश भारत ने ऋषि दयानन्द की शिक्षाओं से लाभ नहीं उठाया

मनमोहन कुमार आर्य महाभारत काल में हुई भारी जान माल की हानि के कारण कुछ वर्षों बाद भारत ज्ञान विज्ञान को विस्मृत कर अज्ञान व…

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विविधा मध्‍यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों का होनेवाला राज्य-स्तरीय सम्मेलन ? 

मध्‍यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों का होनेवाला राज्य-स्तरीय सम्मेलन ? 

प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम का राज्य-स्तरीय सम्मेलन 17-18 नवम्बर को भोपाल में आयोजित होने जा रहा है। इसे लेकर यहां तक तो ठीक है कि…

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