खेत-खलिहान कीटनाशक यानी ज़हरीली खेती : प्रतिबंध बेहतर या अनुदान ?

कीटनाशक यानी ज़हरीली खेती : प्रतिबंध बेहतर या अनुदान ?

अरुण तिवारी कीटनाशकों को लेकर एक फैसला, पंजाब के कृषि एवम् कल्याण विभाग ने बीती 30 जनवरी को लिया; दूसरा फैसला, 06 फरवरी को उत्तर…

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व्यंग्य लानत की होम डिलीवरी

लानत की होम डिलीवरी

बत्रा जी , भौगोलिक और गणितीय दृष्टि से हमारे पड़ौसी है। उनसे हमारे संबंध उतने ही अच्छे है जितने भारत के संबंध पाकिस्तान से है।…

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राजनीति नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है?

नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है?

जीवन में आगे बढ़ने के लिए शार्ट कट्स को चुनने वाला हर शख्स आज नीरव मोदी बनने के लिए तैयार बैठा है लेकिन जबतक सिस्टम…

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समाज भारत के लिए धड़कता है दिल

भारत के लिए धड़कता है दिल

नवीन सविता जानकी और सुरेन्द्र! ब्राजील की 40 वर्षीय नागरिक जानकी का मूल नाम कॉसमे दी पेसिया और सुरेंद्र का नाम जेओर्जेट दी पेसिया है,…

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कविता बैल की आत्म व्यथा

बैल की आत्म व्यथा

डॉ. मधुसूदन बैल बूढा हो गया जी, अब, बैल बूढा हो गया॥ (१) रात दिन था जूझता, बोझ भारी  खींचता। सींचता  संस्कार अनथक- कृति से,…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-60

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-60

राकेश कुमार आर्य   गीता का दसवां अध्याय और विश्व समाज शस्त्रों में वज्र मैं हूं, गायों में कामधेनु मैं हूं, प्रजनन में कामदेव…

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साहित्‍य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-59

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-59

राकेश कुमार आर्य   गीता का दसवां अध्याय और विश्व समाज ऐसी उत्कृष्ट श्रद्घाभावना के साथ जो लोग ईश भजन करते हैं-उनके लिए गीता…

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धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द के जीवनकाल में लिखित व प्रकाशित  उनकी प्रथम जीवनी दयानन्द दिग्विजयार्क

ऋषि दयानन्द के जीवनकाल में लिखित व प्रकाशित उनकी प्रथम जीवनी दयानन्द दिग्विजयार्क

-दयानन्द दिग्विजयार्क ग्रन्थ का महत्व एवं उसके प्रकाशन की आवश्यकता- -मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द के अनेक जीवन चरित्र उपलब्ध हैं जो…

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राजनीति मोदी की फिलिस्तीनी यात्रा: संबंधों में नये सूर्योदय की शुरुआत

मोदी की फिलिस्तीनी यात्रा: संबंधों में नये सूर्योदय की शुरुआत

–      डॉ. सुभाष सिंह यह सर्वविदित है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिमी एशिया (जॉर्डन, फिलिस्‍तीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान) की यात्रा पर गए…

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समाज अंधविश्वास की गिरफ़्त में ज़िंदगी

अंधविश्वास की गिरफ़्त में ज़िंदगी

विडंबना है कि आजादी के सात दशक बाद भी हमारा समाज अंधविश्वास के गर्त से बाहर नहीं निकल पाया है। कहने को तो हमारे देश…

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लेख चित्रण चितेरा कर गया !

चित्रण चितेरा कर गया !

चित्रण चितेरा कर गया, है भाव अपने ले गया; कुछ दे गया सा लग रहा, गा के वो गोमन रम गया ! गोपन में रस रच चल दिया, द्रष्टा रहे वृष्टि किया; चित की दशा समझा किया, बुधि की विधा को वर दिया ! वह व्याप्ति की बौछार में, संतृप्ति के अँकुर बोया; आलोक से निज लोक का, रास्ता दिखाया चल दिया ! रिश्ते बनाना जानता, किस्से में ना वह उलझता; अपनी ही द्युति द्रुति ढालता, अपना बनाए चाहता ! सपनों परे उर में धरे, ले ऊर्ध्व गति झकझोरता; है चोर ‘मधु’ का सखा मोहन, हिये हाँड़ी रख गया !

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कविता लहर ही ज़िन्दगी ले रही !

लहर ही ज़िन्दगी ले रही !

लहर ही ज़िन्दगी ले रही, महर ही माधुरी दे रही; क़हर सारे वही ढल रही, पहलू उसके लिये जा रही ! पहल कर भी कहाँ पा रहा, हल सतह पर स्वत: आ रहा; शान्त स्वान्त: स्वयं हो रहा, उसका विनिमय मधुर लग रहा ! लग्न उसकी बनाई हुईं, समय लहरी पे सज आ रहीं; देहरी मेरी द्रष्टि बनी, सृष्टि दुल्हन को लख पा रही ! हरि के हाथों हरा जो गया, बनके हरियाली वह छा गया; आली मेरा जगत बन गया, ख़ालीपन था सभी भर गया ! अल्प अलसायी अँखियाँ मेरी, कल्प की कोख कोपल तकीं; क़ाफ़िले ‘मधु’ को ऐसे मिले, कुहक कोयल की हिय भा रही !

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