समाज भारत में अंत्योदय के सिद्धांत के चमत्कारी परिणाम

भारत में अंत्योदय के सिद्धांत के चमत्कारी परिणाम

अशोक बजाज असाधारण प्रतिभा के धनी एवं महान आर्थिक चिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय ने पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के मुकाबले एकात्म मानव दर्शन के माध्यम…

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राजनीति भारत का आतंकवाद निर्मूलन के लिए सुझाव

भारत का आतंकवाद निर्मूलन के लिए सुझाव

डॉ. मयंक चतुर्वेदी संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ महासभा में भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्‍वराज ने जिस तरह का अपना ओजस्‍वी संबोधन दिया, उससे दुनिया यह ठीक से जान…

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-32

विश्वगुरू के रूप में भारत-32

राकेश कुमार आर्य   सभी मनुष्यों को यह अधिकार है कि बुद्घि पूर्वक अपने जीवनोद्देश्य का निर्धारण करे। अपनी सामाजिक, शारीरिक व आत्मिक उन्नति करे,…

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-31

विश्वगुरू के रूप में भारत-31

राकेश कुमार आर्य इन नास्तिकों की बात तो कहीं तक ठीक थी कि राजनीति और साम्प्रदायिकता को अलग करो, परंतु इनसे दो भूले हुईं-एक तो…

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-30

विश्वगुरू के रूप में भारत-30

राकेश कुमार आर्य  एक मां के गर्भ में आना दूसरे के यहां पैदा होना, देश छोडक़र भेजा जाना, रास्ते में नदी की सूचना, तत्कालीन…

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महिला-जगत महिला आरक्षण पर सोनिया गांधी का सियासी दांव

महिला आरक्षण पर सोनिया गांधी का सियासी दांव

प्रमोद भार्गव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सियासी चाल चल दी…

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समाज रक्षक बने भक्षक

रक्षक बने भक्षक

आज समाचार पत्रों में मुख्य समाचार है कि लखनऊ के प्राइवेट मेडिकल कालेज में दाखिले से संबन्धित मामलों को रफ़ादफ़ा करने की साज़िश में हाई…

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विविधा केंद्र का सबके लिए आवास पर काम

केंद्र का सबके लिए आवास पर काम

डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत में 80 के दशक में एक फिल्‍म आई थी रोटी, कपड़ा और मकान । इस फिल्म में अभिनेता शशिकपूर का एक प्रसिद्ध डायलॉग…

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धर्म-अध्यात्म मनुष्यों की सन्तानों को श्रेष्ठ मनुष्य बनाना  ही वेदोत्पत्ति का प्रयोजन

मनुष्यों की सन्तानों को श्रेष्ठ मनुष्य बनाना ही वेदोत्पत्ति का प्रयोजन

  -मनमोहन कुमार आर्य संसार में आज जितना भी ज्ञान उपलब्ध है उसका एकमात्र उद्देश्य मनुष्य के जीवन को सुखी व श्रेष्ठ बनाना है। सद्ज्ञान…

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समाज हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्‍वीकार करें

हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्‍वीकार करें

अतिवाद कोई भी हो, वह सदैव संबंधित विषय की उत्‍सुकता को नष्‍ट कर देता है। अति  की घृणा, प्रमाद, सुंदरता, वैमनस्‍य, भोजन, भूख, जिस तरह…

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व्यंग्य डिजीटल शौचालय, सुविधा से मुसीबत तक 

डिजीटल शौचालय, सुविधा से मुसीबत तक 

भारत की हमारी महान सरकार ने तय कर लिया है कि वो हर चीज को डिजीटल करके रहेगी। वैसे तो ये जमाना ही कम्प्यूटर का…

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समाज ये क्या कह रहा है अमेरिकी विदेश मंत्रालय 

ये क्या कह रहा है अमेरिकी विदेश मंत्रालय 

शैलेंद्र सिंह भारत में 90 के दशक में शुरू हुए आर्थिक उदारवाद और भूमंडलीकरण के प्रभाव में एक नव्य राजनीतिक धारा का अद्भुत अभिभूतीकरण हुआ.…

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