विविधा राष्ट्र के भीतर एक देश उगने के मायनें

राष्ट्र के भीतर एक देश उगने के मायनें

संदर्भ: श्री श्री के आयोजन में सेना का सहयोग अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ, अमेरिका के प्रथम उप राष्ट्रपति और दि्वतीय राष्ट्रपति एडम स्मिथ ने कहा…

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चिंतन क्या हमारा पहले एक व अनेक बार मोक्ष हुआ है?

क्या हमारा पहले एक व अनेक बार मोक्ष हुआ है?

मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य योनि मोक्ष का द्वार है। मोक्ष दुःखों से सर्वथा निवृत्ति और जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति को कहते हैं। मनुष्य व…

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लेख नर सेवा नारायण सेवा

नर सेवा नारायण सेवा

आज शेरगढ़ में न कोई दुकान खुली थी और न स्कूल। चूंकि आज ‘निरंजन बाबा’ के अस्थिकलश को भूसमाधि दी जाने वाली थी। पूरा गांव…

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राजनीति मैं भी हूँ, तुम भी हो, यह राष्ट्रवाद है।

मैं भी हूँ, तुम भी हो, यह राष्ट्रवाद है।

भारत का आम आदमी आज जिस दौर से गुजर रहा है, वह अचम्भित है  कि इतनी विविध प्रकार की जो घटनाएँ घटित हो रही हैं…

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कविता उलझन

उलझन

उलझी हुई सी ज़िन्दगी, बेचैन सी रातें, उलझे हुए तागों मे, पड़ती गईं गाँठे, ये गाँठे अब, खुलती नहीं मुझसे उलझी हुई गाँठों को बक्से बन्द करदूँ, या गाँठों से जुडी बातों को, जहन से अलग कर दूँ। अब कोई मक़सद, नया मै कहीं ढूँढू, ज़िन्दगी की यही चाल है तो, ऐसे ही न क्यो जी लूँ  

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जरूर पढ़ें विलियम जोन्स का  षड्यंत्र

विलियम जोन्स का  षड्यंत्र

डॉ. मधुसूदन सारांश: (१) छद्म संस्कृत धर्म ग्रंथ रचा जाए। (२) इसाइया की वाणी (Gospel) का संस्कृत अनुवाद किया जाए। (३) पर उसकी  निराशा:==> रोम…

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कविता केकरा संग खेलहूं फाग

केकरा संग खेलहूं फाग

बुरा न मानें होली है — एक ठे स्पेसल फगुआ केकरा संग खेलहूं फाग इटली दूर बसत है इटली दूर बसत है केकरा संग खेलहूं…

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विविधा बसंती चोला के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु

बसंती चोला के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु

(23 मार्च, बलिदान दिवस पर विशेष) ‘एक जीवन और एक ध्येय’ वाले तीन मित्र भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु, इन तीनों की मित्रता क्रांति के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय…

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लेख सरकारी पानी

सरकारी पानी

बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता…

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व्यंग्य रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!

रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!

तारकेश कुमार ओझा जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का…

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लेख हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ?

हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ?

होलिका दहन के समय पता नहीं क्यों हमारे यहाँ होलिका माता की जय बोली जाती है | लोग जलती हुई होली में जौ डालते जाते…

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कला-संस्कृति होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार

होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार

मनमोहन कुमार आर्य भारत और भारत से इतर देशों में जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन…

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