राजनीति अच्‍छी भाजपा कैसे हल करेगी विवादित मुद्दे

अच्‍छी भाजपा कैसे हल करेगी विवादित मुद्दे

भाजपा में नरेन्द्र मोदी-अमित शाह के युग को करीब डेढ़ बरस बीत गये हैं ।अब भाजपा के मायने मोदी और अमित शाह के हो गया…

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कला-संस्कृति अहिंसा और शान्‍ति का पैगाम है मोहर्रम

अहिंसा और शान्‍ति का पैगाम है मोहर्रम

इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम शुरु होते ही पूरे विश्व में इमाम हुसैन की शहादत की वह दास्तां दोहाराई जाती है जो आज से…

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विविधा हिन्दी मीडिया के चर्चित चेहरों से मुलाकात कराती एक किताब

हिन्दी मीडिया के चर्चित चेहरों से मुलाकात कराती एक किताब

समीक्षकः लोकेंद्र सिंह हम जिन्हें प्रतिदिन न्यूज चैनल पर बहस करते-कराते देखते हैं। खबरें प्रस्तुत करते हुए देखते हैं। अखबारों और पत्रिकाओं में जिनके नाम…

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राजनीति न्यायिक नियुक्ति आयोग की गुत्थी

न्यायिक नियुक्ति आयोग की गुत्थी

पीयूष द्विवेदी सभी राजनीतिक दलों द्वारा संसद में एकसुर से पारित किए गए ‘राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग-२०१४’ (एनजेएसी) क़ानून को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय ने…

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राजनीति लोकतांत्रिक स्तंभों में टकराव

लोकतांत्रिक स्तंभों में टकराव

सुप्रीम कोर्ट नेशुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय न्यायिक न्युक्ति आयोग को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है तथा इससे…

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कला-संस्कृति गंगा-यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक और विरोध

गंगा-यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक और विरोध

संदर्भ: गंगा-यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक और विरोध एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम —————————————————————————– धर्म जगत के सभी आचार्यो को प्रणाम। मूर्ति विसर्जन पर…

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राजनीति ये कैसी राजनीति ?

ये कैसी राजनीति ?

सुप्रिया सिंह   बिहार विधानसभा चुनाव में व्यस्त भाजपा के लिए इस समय उसके सहयोगी ही उसकी परेशानियों का कारण बने हुए है और पार्टी…

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टॉप स्टोरी पुरस्कार लौटाने का औचित्य समझें

पुरस्कार लौटाने का औचित्य समझें

डॉ. मयंक चतुर्वेदी इन दिनों साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने के दिन चल रहे हैं, देश के मान्यधान साहित्यकारों को अपने मिले तमगे लौटाते देख लग…

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विविधा विकास के नाम इतिहास बनते लोग !

विकास के नाम इतिहास बनते लोग !

अब्दुल रशीद जंगल आदिवासीयों के लिए और खेत किसानों के लिए न केवल उनके रोजीरोटी का साधन है बल्कि उनकी पहचान है. नए दौर में…

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विविधा किस मिट्टी के थे भाखरे साहब

किस मिट्टी के थे भाखरे साहब

83 वर्षीय दिनकर केशव भाखरे, राष्ट्रवादी विचारधारा के आदर्श पत्रकार थे। स्वदेशी मन और कर्म ही उनकी पहचान रही। वे अपने परिवार से ज्यादा समाज…

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टॉप स्टोरी बुद्धिजीवियों द्वारा अकादमी पुरस्कार वापस किए जाने के मायने

बुद्धिजीवियों द्वारा अकादमी पुरस्कार वापस किए जाने के मायने

हाल ही में बुद्धिजीवियों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कारों को लौटाये जाने का मामला सुर्खियों में है। बुद्धिजीवियों का ये तर्क है कि जब से नई…

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राजनीति गोमांस पर अनावश्यक विवाद

गोमांस पर अनावश्यक विवाद

हमारा प्रिय भारत देश महान है; पर यहां का मीडिया उससे भी अधिक महान है। जिस समाचार से उनकी प्रसिद्धि बढ़े और विज्ञापन से उनकी…

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