समाज हर समर्थ आदमी अपने से कमजोर का सहायक बने

हर समर्थ आदमी अपने से कमजोर का सहायक बने

 ललित गर्ग – पुराने जमाने की बात है। एक राजा था। उसे अपने विशाल साम्राज्य और धन-संपत्ति पर बहुत अभिमान था। एक दिन एक साधु…

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धर्म-अध्यात्म असत्य धार्मिक मान्यताओं का खण्डन आवश्यक

असत्य धार्मिक मान्यताओं का खण्डन आवश्यक

‘माता-पिता, आचार्य, चिकित्सक व किसान आदि की तरह धर्म प्रचारक का असत्य धार्मिक मान्यताओं का खण्डन आवश्यक’ खण्डन किसी बात को स्वीकार न कर उसका…

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मीडिया प्रवक्‍ता के 8वें स्‍थापना दिवस पर आभार ज्ञापन

प्रवक्‍ता के 8वें स्‍थापना दिवस पर आभार ज्ञापन

आज 16 अक्‍टूबर है। इसी दिन आज से सात साल पूर्व 2008 में एक प्रकल्‍प की शुरुआत हुई थी। www.pravakta.com। तब से यह निरंतरता के साथ…

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जन-जागरण पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति पर क्या कहती है अमरीकी विदेश विभाग की यह रिपोर्ट ?

पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति पर क्या कहती है अमरीकी विदेश विभाग की यह रिपोर्ट ?

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर विगत दिनों अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन पार्टी के…

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धर्म-अध्यात्म अखण्ड सत्तास्वरूपा विश्वमयी चेतना अदिति

अखण्ड सत्तास्वरूपा विश्वमयी चेतना अदिति

अशोक “प्रवृद्ध” परमेश्वर के तीनों ही लिंगों में नाम हैं । स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश के प्रथम सम्मुल्लास में कहा है कि, जितने…

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धर्म-अध्यात्म हम शास्त्रार्थ से सत्यार्थ, यथार्थ और तथ्यार्थ के उपासक बनें

हम शास्त्रार्थ से सत्यार्थ, यथार्थ और तथ्यार्थ के उपासक बनें

इस्लाम का दुष्प्रभाव इस्लाम ने भारत में पदार्पण किया तो उसने भारत की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर और ऐतिहासिक संपदा को विनष्ट करने में किसी प्रकार…

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टॉप स्टोरी लेखकों का नपुंसक गुस्सा

लेखकों का नपुंसक गुस्सा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दे दिया। अखलाक और गुलाम अली दोनों के साथ हुई घटनाओं को उन्होंने ‘अवांछित और दुर्भाग्यपूर्ण’ कह दिया। अब बताइए,…

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कविता हा! ये कैसे हुआ ?  सोचो, क्यू हो गया ??

हा! ये कैसे हुआ ? सोचो, क्यू हो गया ??

मकां बनते गांव झोपङी, शहर हो गई, जिंदगी, दोपहर हो गई, मकां बङे हो गये, फिर दिल क्यांे छोटे हुए ? हवेली अरमां हुई, फिर…

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कविता विकृत होते प्रकृति संबंध

विकृत होते प्रकृति संबंध

’हम’ को हटा पहले ’मैं’ आ डटा फिर तालाब लुटे औ जंगल कटे, नीलगायों के ठिकाने भी ’मैं’ खा गया। गलती मेरी रही मैं ही…

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विविधा लिखिए जोर से लिखिए, किसने रोका है भाई!

लिखिए जोर से लिखिए, किसने रोका है भाई!

संजय द्विवेदी देश में बढ़ती तथाकथित सांप्रदायिकता से संतप्त बुद्धिजीवियों और लेखकों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का सिलसिला वास्तव में प्रभावित करने वाला है।…

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राजनीति बिहार में सत्ता परिवर्तन के संकेत

बिहार में सत्ता परिवर्तन के संकेत

सुरेश हिंदुस्थानी बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए प्रथम और द्वित्तीय चरण का मतदान पूरा हो गया। मतदाताओं में जिस प्रकार के उत्साह की जा…

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पर्यावरण सूख रही हैं धरती की धमनियाँ

सूख रही हैं धरती की धमनियाँ

सरिता अरगरे धरती की धमनियाँ सूख रही हैं। अपने अस्तित्व को बचाने के लिए तरह-तरह से संकेत दे रही हैं। कभी बाढ़ के माध्यम आगाह…

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