Anarchist केजरीवाल
Updated: May 23, 2015
-विपिन किशोर सिन्हा- केजरीवाल ने जब अपनी ही पार्टी के संस्थापक सदस्यों, योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण को पार्टी से निष्कासित किया, तो लोगों ने…
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अम्बानी की जांच का आदेश देने वाला अभी तक सही सलामत है, यही क्या कम है ?
Updated: May 23, 2015
-श्रीराम तिवारी- भले ही कांग्रेस और भाजपा दोनों की विफलता से कोई तात्कालिक पूंजीवादी राजनैतिक विकल्प कभी-कभार सत्ता में आ जाए, भले ही किसी को दिल्ली में…
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केजरी, ऑटो ड्राईवर और जनता
Updated: May 23, 2015
-रवि विनोद श्रीवास्तव- दिल्ली में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी भले ही आम लोगों के लिए काम कर रही हो…
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बेशर्म हैं नंगे-भूखे
Updated: May 23, 2015
-डॉ. दीपक आचार्य- दुनिया में खूब सारे लोग हैं जिन्हें न किसी की परवाह है, न कोई लाज-शरम। इन लोगों के लिए मर्यादाओं, नियम-कानूनों और…
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खल्क खुदा का, जैव विविधता इंसानी शिकंजे में
Updated: May 23, 2015
-अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विशेष- -अरुण तिवारी- पहले मैं दिल्ली के जिस मकान में रहता था, वह मकान छोटा था, लेकिन उसका दिल…
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मुख्यमंत्री होना भी “जंग” है
Updated: May 21, 2015
दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच चल रही तकरार के मायने और इससे होने वाले नुकसान का तकाजा समझना अभी मुश्किल है जबतक कि…
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व्यावहारिक मोहब्बतें और मौखिक नफरतें
Updated: May 21, 2015
–रिटेल एफडीआई पर केंद्र सरकार के यू-टर्न के मायने क्या हैं- -संजय द्विवेदी- भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने खुदरा व्यापार में 51…
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समाज का नासूर: दलित उत्पीड़न
Updated: May 21, 2015
-निर्मल रानी- हमारे देश की सामाजिक न्याय व्यवस्था भी क्या अजीबो-गरीब है कि यहां गंदगी फैलाने वालों को तो उच्च जाति का समझा जाता है…
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बेनामी संपत्ति बनाम कालाधन
Updated: May 21, 2015
-प्रमोद भार्गव- राजग सरकार ने विदेशों में जमा कालेधन को देश में लाने और देश के भीतर कालाधन पैदा न हो इस मकसद की भरपाई के…
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प्रकृति के नियमों के विरूद्ध आचरण करना हानिकारक
Updated: May 21, 2015
-अशोक “प्रवृद्ध’- अत्यधिक सुख- सुविधा व वैभवपूर्ण जीवन व्यतीत करने की इच्छा में हम यंत्रों अर्थात मशीनों पर आश्रित हो गए हैं , परन्तु यह…
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मनुष्य की वास्तविक पहचान के मायने
Updated: May 21, 2015
-ललित गर्ग- मानव धर्म का हार्द है मनुष्य का मनुष्य के प्रति तादात्म्य भाव, एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता और नैतिक एवं चारित्रिक उज्ज्वलता। जो धर्म…
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मुक्ति
Updated: May 21, 2015
-बीनू भटनागर- वो ज़िन्दा ही कब थी, जो आज मर गई, सांसों का सिलसिला था, बस, जो चल रहा था। आज वो मरी नहीं है,…
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