राजनीति Anarchist केजरीवाल

Anarchist केजरीवाल

-विपिन किशोर सिन्हा- केजरीवाल ने जब अपनी ही पार्टी के संस्थापक सदस्यों, योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण को पार्टी से निष्कासित किया, तो लोगों ने…

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परिचर्चा अम्बानी की जांच का आदेश देने वाला अभी तक सही सलामत है, यही क्या कम है ?

अम्बानी की जांच का आदेश देने वाला अभी तक सही सलामत है, यही क्या कम है ?

-श्रीराम तिवारी- भले ही कांग्रेस और भाजपा दोनों की विफलता से कोई तात्कालिक पूंजीवादी राजनैतिक विकल्प  कभी-कभार  सत्ता में आ जाए, भले ही किसी को दिल्ली में…

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विविधा केजरी, ऑटो ड्राईवर और जनता

केजरी, ऑटो ड्राईवर और जनता

-रवि विनोद श्रीवास्तव- दिल्ली में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी भले ही आम लोगों के लिए काम कर रही हो…

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विविधा बेशर्म हैं नंगे-भूखे

बेशर्म हैं नंगे-भूखे

-डॉ. दीपक आचार्य- दुनिया में खूब सारे लोग हैं जिन्हें न किसी की परवाह है, न कोई लाज-शरम। इन लोगों के लिए मर्यादाओं, नियम-कानूनों और…

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जन-जागरण खल्क खुदा का, जैव विविधता इंसानी शिकंजे में

खल्क खुदा का, जैव विविधता इंसानी शिकंजे में

  -अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विशेष- -अरुण तिवारी- पहले मैं दिल्ली के जिस मकान में रहता था, वह मकान छोटा था, लेकिन उसका दिल…

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राजनीति मुख्यमंत्री होना भी “जंग” है

मुख्यमंत्री होना भी “जंग” है

दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच चल रही तकरार के मायने और इससे होने वाले नुकसान का तकाजा समझना अभी मुश्किल है जबतक कि…

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आर्थिकी व्यावहारिक मोहब्बतें और मौखिक नफरतें

व्यावहारिक मोहब्बतें और मौखिक नफरतें

–रिटेल एफडीआई पर केंद्र सरकार के यू-टर्न के मायने क्या हैं-                           -संजय द्विवेदी- भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने खुदरा व्यापार में 51…

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परिचर्चा समाज का नासूर: दलित उत्पीड़न

समाज का नासूर: दलित उत्पीड़न

-निर्मल रानी- हमारे देश की सामाजिक न्याय व्यवस्था भी क्या अजीबो-गरीब है कि यहां गंदगी फैलाने वालों को तो उच्च जाति का समझा जाता है…

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जन-जागरण बेनामी संपत्ति बनाम कालाधन

बेनामी संपत्ति बनाम कालाधन

-प्रमोद भार्गव- राजग सरकार ने विदेशों में जमा कालेधन को देश में लाने और देश के भीतर कालाधन पैदा न हो इस मकसद की भरपाई के…

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परिचर्चा प्रकृति के नियमों के विरूद्ध आचरण करना हानिकारक

प्रकृति के नियमों के विरूद्ध आचरण करना हानिकारक

-अशोक “प्रवृद्ध’- अत्यधिक सुख- सुविधा व वैभवपूर्ण जीवन व्यतीत करने की इच्छा में हम यंत्रों अर्थात मशीनों पर आश्रित हो गए हैं , परन्तु यह…

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चिंतन मनुष्य की वास्तविक पहचान के मायने

मनुष्य की वास्तविक पहचान के मायने

-ललित गर्ग- मानव धर्म का हार्द है मनुष्य का मनुष्य के प्रति तादात्म्य भाव, एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता और नैतिक एवं चारित्रिक उज्ज्वलता। जो धर्म…

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कविता मुक्ति

मुक्ति

-बीनू भटनागर- वो ज़िन्दा ही कब थी, जो आज मर गई, सांसों का सिलसिला था, बस, जो चल रहा था। आज वो मरी नहीं है,…

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