विविधा हज और भारतीय हाजी!

हज और भारतीय हाजी!

5 अक्टूबर को भारत में बकरीद अर्थात् इर्द उल अजहा है। संभवतः भारत या उपमहादीप में बकरीद मनाने से एक दो दिन पूर्व सउदी अरब…

Read more
महिला-जगत सीजर अधिक क्यों ?

सीजर अधिक क्यों ?

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव   एक आम आदमी की धारण है कि सामान्य प्रसव से सीजर बहुत अधिक होते है। उनके अनुसार महिला चिकित्सक रूपयों…

Read more
कविता गांधी फिर कब आओगे ?

गांधी फिर कब आओगे ?

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव (गांधी जयंती २ अक्टूबर २०१४) मोहनदास कमरचंद जी की, देश प्रेम की आंधी थी। पीछे देश खड़ा मर मिटने, एसी हस्ती…

Read more
कविता रे देवों के अंश जाग जा………

रे देवों के अंश जाग जा………

रे देवों के अंश जाग जा……… कौटिक देखे कर्मरत, पर तुझसा दिखा न कोई। इतने सर संधान किये,फिर क्यों तेरी भाग्य चेतना सोई।।   आज…

Read more
कविता हारी नहीं हूँ

हारी नहीं हूँ

1. हारी नहीं हूँ थकी हूँ हारी नहीं हूँ, थोड़ा सा विश्राम करलूं। ज़रा सी सी दुखी हूँ फिर भी, थोड़ा सा श्रंगार करलूं। श्रंगार…

Read more
पर्यावरण आस्था का सम्मान-सेतु समुद्रम परियोजना

आस्था का सम्मान-सेतु समुद्रम परियोजना

अरविंद जयतिलक यह स्वागतयोग्य है कि केंद्र की मोदी सरकार ने को पूरा करने की प्रतिबद्धता दिखाते हुए रामसेतु की रक्षा का संकल्प लिया है।…

Read more
टेक्नोलॉजी भारतीय मंगल अभियान की मंजिल तय

भारतीय मंगल अभियान की मंजिल तय

प्रमोद भार्गव आखिरकार 66.60 करोड़ किलोमीटर की लंबी यात्रा के बीच आने वाली सभी बाधाओं को दरकिनार कर भारतीय मंगलयान का मंगल की धरती पर…

Read more
जन-जागरण भारत को आस्तीन में सांप पालने का शौक

भारत को आस्तीन में सांप पालने का शौक

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव भारत की आस्तीनें बहुत लम्बी और बहुत चौड़ी है। वह जहां भी सांप रेंगते देखता है, शीघ्रता से उठा कर आस्तीन…

Read more
महत्वपूर्ण लेख तमिलनाडु में हिंदी प्रवेश कैसे करें ?

तमिलनाडु में हिंदी प्रवेश कैसे करें ?

(भाग एक) डॉ. मधुसूदन सारांश: **तमिलनाडु में हिन्दी प्रवेश हो जाए, तो शेष भारत में विशेष समस्या नहीं होगी।** **हमें हिन्दी चाहिए”, ऐसी नई माँग,…

Read more
ज्योतिष पितर एक वैज्ञानिक संकल्पना

पितर एक वैज्ञानिक संकल्पना

ईश्वर का जन्म विविध कलाओं के साथ होता है परन्तु पुरुष की उत्पत्ति पञ्चकलाओं के साथ होती है १)आनन्द-२) विज्ञान-३) मन-४) प्राण-५) वाक् | शरीर…

Read more
राजनीति और तब पप्पू यादव के लिए कोई ‘ठौर’ नहीं बचेगा

और तब पप्पू यादव के लिए कोई ‘ठौर’ नहीं बचेगा

१९९० के दशक में लालू राज के शुरुआती दिनों (जिसे कालान्तर में जंगल- राज के विशेषण से नवाजा गया )  में बिहार में जब सत्ता…

Read more
विविधा ‘स्वर्ग ‘ छोड़ने की मजबूरी…!!

‘स्वर्ग ‘ छोड़ने की मजबूरी…!!

तारकेश कुमार ओझा दुनिया का हर धर्म मरने के बाद स्वर्ग के अस्तित्व को मान्यता देता है। यानी स्वर्ग एक एेसी दुनिया है जिसके बाद…

Read more