कविता भारत माता की पुकार

भारत माता की पुकार

-रवि श्रीवास्तव- मैं भी थी अमीर कभी, कहलाती थी सोने की चिड़िया, लूटा मुझको अंग्रेजों ने, ले गए यहां से भर-भर गाड़ियां। बड़े मशक्कत के…

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विविधा इजराइली अत्याचार पर खामोशी क्यों

इजराइली अत्याचार पर खामोशी क्यों

-रमेश पाण्डेय- आतंकी संगठन हमास के शासन वाले गाजा पट्टी में इजरायली सेना के हमले जारी हैं। हमास की ओर से भी झुकने के कोई…

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जरूर पढ़ें बलात्कार ही तो हुआ है… इतनी हैरानी क्यूं?

बलात्कार ही तो हुआ है… इतनी हैरानी क्यूं?

-ऋतु कृष्ण चटर्जी- 16 जुलाई काण्ड का अपराधी राम सेवक यादव पकड़ा गया, पुराना मुजरिम था और कत्ल, धोखाधड़ी उसके लिए कोई नई बात नहीं…

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कविता खूबसूरती का एहसास

खूबसूरती का एहसास

-रवि श्रीवास्तव- क्या है खूबसूरती, किसने इसे तराशा है, हर दिन, हर पल देखकर, मन में जगी ये आशा है। दिल को देता है सुकून,…

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जरूर पढ़ें किन्नरों का कहर

किन्नरों का कहर

-रवि श्रीवास्तव- किन्नर आए हैं, ये सुनकर लोगों की दिल की धड़कन तेज हो जाती हैं। जब उनकी ताली की गूंज कानों तक पहुंचती है…

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कविता उम्मीद से…

उम्मीद से…

-बीनू भटनागर- भाजपा को देश की जनता ने, बड़ी उम्मीदों से, केंद्र की सत्ता दिलाई थी… कांग्रेस के दस साल के शासन के बाद, कुछ…

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जरूर पढ़ें बलात्कर और नाबालिग उम्र

बलात्कर और नाबालिग उम्र

-प्रमोद भार्गव- माहिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ‘किशोर आपराधिक न्याय‘ (देखभाल एवं बाल सरंक्षण) कानून 2000 के स्थान पर नया कानून ‘किशोर…

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राजनीति कुटिल से जटिल होते हमारे राजनेता !

कुटिल से जटिल होते हमारे राजनेता !

-तारकेश कुमार ओझा- कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पहचान तब फारुक अब्दुल्ला के बेटे के तौर पर ही थी। पिता के करिश्मे से बेटे…

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जरूर पढ़ें लिव-इन रिश्ते बनाने से पहले अपने कल के बारे में अवश्य सोचिये

लिव-इन रिश्ते बनाने से पहले अपने कल के बारे में अवश्य सोचिये

– गिरीश बिल्लोरे- डॉक्टर शालिनी कौशिक का एक आलेख लिव इन संबंधों के आगामी परिणामों को लेकर एक खासी चिंता का बीजारोपण करता है, कारण…

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कविता हर सवेरा नया और संध्या सुहानी हो

हर सवेरा नया और संध्या सुहानी हो

-श्रीराम तिवारी- हर सवेरा नया और संध्या सुहानी हो! मां की तस्वीर हो, माथे कश्मीर हो, धोए चरणों को सागर का पानी हो। पुरवा गाती…

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जरूर पढ़ें कहां जाएं औरतें

कहां जाएं औरतें

-संजय द्विवेदी- आखिर औरतें कहां जाएं? इस बेरहम दुनिया में उनका जीना मुश्किल है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” (जहां नारियों की पूजा होती…

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हिंद स्‍वराज हिंदी शासकीय संज्ञाएं

हिंदी शासकीय संज्ञाएं

-डॉ. मधुसूदन- (एक) आज का उद्देश्य। आज का उद्देश्य है यह दिखाना कि, हिंदी में संस्कृत द्वारा कितनी सारी संज्ञाएं रची जा सकती हैं। यह…

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