विविधा बुलेट ट्रेन से ज़रूरी हैं प्लेटफार्म-निर्मल रानी

बुलेट ट्रेन से ज़रूरी हैं प्लेटफार्म-निर्मल रानी

भारत की दस प्रतिशत से भी कम संख्या के संपन्न लोगों को सुविधा पहुंचाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार…

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राजनीति पहले लैपटॉप, अब लालीपॉप

पहले लैपटॉप, अब लालीपॉप

-रवि श्रीवास्तव- चुनावी बिगुल बजते ही सभी राजनीतिक दल ज़नता के लुभाने के लिए अपना एक घोषणा पत्र करते हैं। जिसमें वे लोगों से वादे…

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विविधा बीजिंग में पंचशील समझौते की वर्षगांठ, या तेरहवीं

बीजिंग में पंचशील समझौते की वर्षगांठ, या तेरहवीं

-प्रवीण गुगनानी- भारत चीन सम्बंधों के मध्य की साठ वर्षीय महत्वपूर्ण कड़ी “पंचशील” की षष्ठी पूर्ति के अवसर पर चीन में आयोजित कार्यक्रम में जबकि…

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विविधा साईं पर संग्राम

साईं पर संग्राम

-अरविंद जयतिलक- भगवान कौन है? उसका स्वरूप और विशेषता क्या है? भगवान होने की शर्तें क्या है? किसी के भगवान होने का सर्टिफिकेट कौन जारी…

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विविधा असाढ़ में सूखा : का बरखा जब कृषि सुखानी

असाढ़ में सूखा : का बरखा जब कृषि सुखानी

-संजय स्वदेश- ——————————————– यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब मानसून ने दगाबाजी की हो। आजाद भारत में दर्जनों बार सूखा पड़ा। लेकिन इससे न…

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कविता गरम हलुवा

गरम हलुवा

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव- लगा रहे अविरल परिकम्मा, हलुवा मुझे खिला दे अम्मा| राम शरण बोले ज्वर उन पर, पता नहीं क्यों चढ़ा निकम्मा| बोले रात एक…

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विविधा ‘पहले शौचालय’ का सोच बनाम जमीनी हकीकत

‘पहले शौचालय’ का सोच बनाम जमीनी हकीकत

-मिलन सिन्हा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित देश के कई अन्य प्रभावशाली नेता समय समय पर किसी न किसी मंच से देश में ‘पहले शौचालय’ की…

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विविधा “माई री मैं कासे कहूं पीर…!”

“माई री मैं कासे कहूं पीर…!”

-गिरीश बिलोरे- विधवा जीवन का सबसे दु:खद पहलू है कि उसे सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों से आज़ भी समाज ने दूर रखा है. उनको उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकार…

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विविधा जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी…

जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी…

-आलोक कुमार- हाल के दिनों में स्वरूपानन्द जी जैसे आडंबरी धर्माचार्य जैसे बेतुके और द्वेषपूर्ण बयान दे रहे हैं उसे देख कर लगता है कि…

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राजनीति कान पकाऊ होता मीडिया का ‘मोदी प्लान’!

कान पकाऊ होता मीडिया का ‘मोदी प्लान’!

-तारकेश कुमार ओझा- जिस माहौल में अपना बचपन बीता वहां की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि मोहल्ले में किसी के यहां ब्याह- शादी या…

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कविता हर हाथ तिरंगा हो

हर हाथ तिरंगा हो

-श्यामल सुमन- ना कोई नंगा हो, ना तो भिखमंगा हो। चाहत कि रिश्ता आपसी घर में चंगा हो।। धरती पर आई, लेकर खुशियाली। सूखी मिट्टी…

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राजनीति आरक्षण की वैशाखी पर टिकी राजनीति

आरक्षण की वैशाखी पर टिकी राजनीति

-प्रमोद भार्गव- -संदर्भः महाराष्ट्र में मराठों और मुस्लिमों को आरक्षण- भारत में आरक्षण राजनीतिक दलों के सियासी खेल का दांव बनकर लगातार उभर रहा है।…

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