राजनीति सुरजकुंड पाठशाला और नमो की घुट्टी!

सुरजकुंड पाठशाला और नमो की घुट्टी!

-रंजीत रंजन सिंह- भाजपा के नव-निर्वाचित सांसदों को प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समाप्त हुआ। ऐतिहासिक जीत के बाद हरियाणा…

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राजनीति यह कैसा बिहार प्रेम है?

यह कैसा बिहार प्रेम है?

-फखरे आलम- मैं कभी बड़ा हैरान और परेशान हो जाता हूं! जब बिहार के जनप्रतिनिधियों का व्यवहार देखता हूं। हमारे अपने ही प्रदेश और प्रदेश…

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विविधा कालाधन से पर्दा उठने वाला है

कालाधन से पर्दा उठने वाला है

-प्रमोद भार्गव- चाणक्य ने कहा था, किसी भी देश में न्यूनतम ईमानदार और न्यूनतम ही बेईमान होते है, किंतु जब बेईमानों पर सरकार नकेल कसने…

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आर्थिकी अब वसूली का समय है

अब वसूली का समय है

-आलोक कुमार- कीमतें बढ़ने के पीछे उत्पादन की कमी, मानसून इत्यादि जैसे कारण तो हैं ही। लेकिन महंगाई की असली वजह यह है कि खेती…

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राजनीति ‘अच्छे दिनों’ की शुरुआत आम जनता से या मीसा बंदियों से?

‘अच्छे दिनों’ की शुरुआत आम जनता से या मीसा बंदियों से?

-तनवीर जाफ़री- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ जैसा लोकलुभावना नारा जनता को देकर सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार अच्छे दिनों की शुरुआत आम जनता…

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महत्वपूर्ण लेख मोदी जी! मेट्रो सिटी नहीं ‘मेधा ग्राम’ बसाइए

मोदी जी! मेट्रो सिटी नहीं ‘मेधा ग्राम’ बसाइए

-राकेश कुमार आर्य- ग्राम अपने आप में एक ऐसी व्यवस्था है जिसके विषय में इसके पूर्णत: आत्मनिर्भर पूर्णत: आत्मानुशासित और पूर्णत: आत्मनियंत्रित रहने की परिकल्पना…

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कविता मैं, शायर नहीं

मैं, शायर नहीं

-रवि कुमार छवि- मैं, शायर नहीं, क्योंकि शायर तो लोगों के साथ रहकर भी, तन्हा रहता है, मैं, उसकी क़लम की स्याही की एक बूंद…

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कविता आ कर लें हम तुम प्यार

आ कर लें हम तुम प्यार

-श्यामल सुमन- है प्रेम सृजन संसार, आ कर लें हम तुम प्यार। ना इन्सानी बाजार, आ कर लें हम तुम प्यार।। रिश्ते जीवन की मजबूरी,…

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कविता रेल क्यों हो रही है फेल

रेल क्यों हो रही है फेल

-रवि श्रीवास्तव- देश की रीढ़ बनी ये रेल, आख़िर क्यों हो रही है फेल ? जाने कैसे हो गई बीमार हो रही हादसे का शिकार…

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विविधा कालाधन : अब जागी आशा

कालाधन : अब जागी आशा

-सुरेश हिन्दुस्थानी- देश में लगातार हुए घोटालों से देश का आर्थिक विकास रुक गया है। विदेशों में खरबों रुपया कालेधन के तौर पर जमा है…

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राजनीति कुछ ज्यादा ही हड़बड़ी में हैं मोदी के आलोचक!

कुछ ज्यादा ही हड़बड़ी में हैं मोदी के आलोचक!

-संजय द्विवेदी- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनाकांक्षाओं के उस उच्च शिखर पर विराजे हैं जहां से उन्हें नीचे ही आना है। चुनावी सभाओं में उनकी वाणी…

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विविधा मानव तस्करी की मंडी में मासूम

मानव तस्करी की मंडी में मासूम

-संजय स्वदेश- -हर राज्य के अखबारों में बच्चों के गायब होने की खबर किसी ने किसी पन्ने के कोने में झांकती रहती है। देश बड़ा…

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