कविता राजनीति

राजनीति

-राम सिंह यादव- बहुत सारे चेहरे हैं कुछ मुस्कुरा रहे हैं कुछ चिल्ला रहे हैं कुछ भोले से दिख रहे हैं… कुछ चेहरों मे छिपा…

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चुनाव सवालों के घेरे में इंदु भूषण जी और उनकी देशी किसान पार्टी

सवालों के घेरे में इंदु भूषण जी और उनकी देशी किसान पार्टी

-आलोक कुमार-  हाल ही में चुनावों के ठीक पहले बिहार में जाति आधारित एक और नयी राजनीतिक पार्टी का गठन हुआ, नाम है “देशी किसान पार्टी”l ये…

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चुनाव सोमनाथ से विश्वनाथ जय यात्रा मोदी का चुनावी मंत्र

सोमनाथ से विश्वनाथ जय यात्रा मोदी का चुनावी मंत्र

-रमेश पाण्डेय-  भारतीय इतिहास में दो घटनाओं का जिक्र ज्यादातर किया जाता है। एक है अयोध्यानरेश राजा दशरथ के पुत्र राम की पैदल यात्रा और…

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विविधा ‘द बर्निंग ट्रेन’: सुरक्षा के ये कैसे उपाय?

‘द बर्निंग ट्रेन’: सुरक्षा के ये कैसे उपाय?

-निर्मल रानी-  भारतीय रेल सेवा के अंतर्गत् चलने वाली सवारी गाडिय़ां कई बार अग्रिकांड की भेंट चढ़ चुकी हैं। इनमें पैसेंजर से लेकर मेल,एक्सप्रेस तथा…

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विविधा अपभ्रंश एवं आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के संक्रमण-काल की रचनाएं

अपभ्रंश एवं आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के संक्रमण-काल की रचनाएं

-प्रोफेसर महावीर सरन जैन-   (हिन्दी के विशेष संदर्भ में)-  यह तथ्य है कि यद्यपि अपभ्रंश के विविध भाषिक रूपों से ही आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं…

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चुनाव कौन हैं असली साम्प्रदायिक और उनका प्रवंचक सेकुलरवाद?

कौन हैं असली साम्प्रदायिक और उनका प्रवंचक सेकुलरवाद?

-नरेश भारतीय-  धर्म सम्प्रदाय के नाम पर वोट मांगना और चुनाव प्रचार को देश के कथित सेकुलर संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध माना गया है.…

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विविधा स्वामी विवेकानन्द- राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत

स्वामी विवेकानन्द- राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत

-गुंजेश गौतम झा-  स्वामी विवेकानन्द भारतीय पुनर्जागरण के महान संत, अध्ययनशील  संन्यासी, गंभीर विचारक, धर्म तत्व ज्ञाता एवं एक महान ओजस्वी वक्ता और महान विभूति…

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विविधा खुशवंत सिंह और पाकिस्तानी मीडिया

खुशवंत सिंह और पाकिस्तानी मीडिया

-फखरे आलम-  वह ऐसा खुशनसीब और बड़े लेखक थे जो सरहद के दोनों ओर जनता के दिलों पर राज करते-करते अलविदा कर गये। उनके चले…

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चुनाव देख तुम्हारी उछल-कूद …

देख तुम्हारी उछल-कूद …

-वीरेन्द्र सिंह पहिार-  भ्रष्ट्राचार-विरोधी आंदोलन की उपज समझे जाने वाले अरविन्द केजरीवाल के मामले में आम लोगों की धारणा आम राजनीतिज्ञों से कुछ अलग किस्म…

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कविता प्रेम

प्रेम

-विजय कुमार-  हमें सांझा करना था धरती, आकाश, नदी और बांटना था प्यार मन और देह के साथ आत्मा भी हो जिसमें ! और करना…

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कविता गरमी मई की जून की

गरमी मई की जून की

आई चिपक पसीने वाली, गरमी मई की जून की| चैन नहीं आता है मन को, दिन बेचेनी वाले | सल्लू का मन करता कूलर ,…

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विविधा दिल पर रखकर हाथ कहिए, देश क्या आजाद है

दिल पर रखकर हाथ कहिए, देश क्या आजाद है

-रमेश पाण्डेय-  हम हर साल आजादी की वर्षगांठ बड़ी धूमधाम से मनाते आए हैं, बड़े गर्व के साथ खुद को आजाद कहलवाते हैं लेकिन अफसोस…

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