विविधा स्टाम्प कालाबाजारी-“कलेक्टर क्या करेगा? … वो सब जानता है।”

स्टाम्प कालाबाजारी-“कलेक्टर क्या करेगा? … वो सब जानता है।”

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’-  मैं आज 31.03.2014 को दोपहर में कलेक्ट्रेट जयपुर गया। बीस रुपये का स्टाम्प खरीदना था। दो स्टाम्प विक्रेताओं ने ये कहकर…

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चुनाव राजनैतिक आत्महत्या: घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तोरे आगे

राजनैतिक आत्महत्या: घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तोरे आगे

-डॉ. अरविन्द कुमार सिंह-  बहुत दिनों के बाद आज कुछ लिखने के लिये कलम उठाया हूं। देश चुनावी ताप से तप रहा है। राजनेताओं का…

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प्रवक्ता न्यूज़ सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की आवश्यकता है

सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की आवश्यकता है

-राकेश कुमार आर्य-  जब किसी विद्वान ने हिंदी साहित्य के लिए तन, मन और धन के शब्द के समुच्चय को दिया होगा तो सचमुच उसने…

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विविधा आतंक की खतरनाक साजिश

आतंक की खतरनाक साजिश

-अरविंद जयतिलक-  दिल्ली व राजस्थान की पुलिस समेत सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां बधाई की हकदार हैं कि उन्होंने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के…

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हिंद स्‍वराज राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान कीजिए

राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान कीजिए

-गुंजेश गौतम झा-   सन् 1947 में भारत और भारतवासी विदेशी दासता से मुक्त हो गए। भारत के संविधान के अनुसार हम भारतवासी ‘प्रभुता-सम्पन्न-गणराज्य’ के…

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चुनाव चुनाव की आहट, सेक्यूलरवाद की गड़गड़ाहट

चुनाव की आहट, सेक्यूलरवाद की गड़गड़ाहट

-डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री-  चुनाव की आहट होते ही कुछ लोगों ने ‘ सेक्यूलरवाद ‘ के गीत जोरशोर से गाना शुरू कर दिया है। जिन्होंने भ्रष्टाचार…

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विविधा बिहार में शराब माफियाओं पर शांत सत्ता

बिहार में शराब माफियाओं पर शांत सत्ता

-आलोक कुमार-  सुशासन की सरकार और सुशासनी प्रशासन ने बिहार में शराब बेचने की खुली छूट दे रखी हैl सच्चाई तो ये है कि शराब बिक्री…

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चुनाव भारत में देवी-महाभारत

भारत में देवी-महाभारत

-विजय कुमार-  विश्व इतिहास के सभी बड़े युद्धों का कारण महिलाएं रही हैं। चाहे राम और रावण के बीच हुआ युद्ध हो, या फिर कौरव…

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वर्त-त्यौहार धूमधाम से मनाएं नया साल – विक्रमी संवत -2071

धूमधाम से मनाएं नया साल – विक्रमी संवत -2071

-विनोद बंसल-  भारत व्रत पर्व व त्योहारों का देश है। यूं तो काल गणना का प्रत्येक पल कोई न कोई महत्व रखता है किन्तु कुछ…

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चुनाव चुनावी चाबुक की शिकार दिल्ली की 123 महत्त्वपूर्ण संपत्तियां

चुनावी चाबुक की शिकार दिल्ली की 123 महत्त्वपूर्ण संपत्तियां

-विनोद बंसल-  वोटों की बिसात आखिर क्या-क्या गुल खिलाती है, किसी से कुछ छुपा नहीं है। किन्तु, एक शताब्दी पूर्व सरकार द्वारा अधिगृहित सम्पत्तियों का…

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विविधा वनपुत्रों की यही त्रासदी उनकी नियति

वनपुत्रों की यही त्रासदी उनकी नियति

-अमरेन्द्र किशोर-  ओडिशा के कालाहांडी और नुआपाड़ा जिले की पहाड़िया जनजाति आजादी मिलने के ६७ साल बाद भी सरकारी तौर से जनजाति के दर्जा पाने से…

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कविता आज़ादी के पहले अनगिनत शहीद हुए

आज़ादी के पहले अनगिनत शहीद हुए

-जावेद उस्मानी-  आज़ादी के पहले अनगिनत शहीद हुए कड़ी राहों से हँसते हुए गुज़रे हम सब के लिए कि हमारे लिए ज़रूरी थी आज़ादी हमारी…

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