विविधा आये थे गुरू बनकर, चेले बन चले गये

आये थे गुरू बनकर, चेले बन चले गये

-डॉ. मधुसूदन-   (एक) एशियाटिक सोसायटी के स्थापक, विलियम जोन्स का घृणित उद्देश्य  सब से पहले, विलियम जोन्स के उस पत्र पर; एक दृष्टिपात करें,…

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कविता खुशियों को साथ लेकर आती हैं बेटियां

खुशियों को साथ लेकर आती हैं बेटियां

-राजेश त्रिपाठी-   मात-पिता का गौरव बन चंदा सा चमके। जिसके यश का सौरभ सारे जग में महके।। घर की सुंदर अल्पना, देवों का वरदान। बेटी…

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राजनीति हंगामे के बीच रेल बजट

हंगामे के बीच रेल बजट

-प्रमोद भार्गव-    दाक्षिण भारत से जुड़े रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने दाक्षिण भारतीय सांसदों द्वारा किए हंगामे के बीच अंतरिम रेल बजट पेश किया।…

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आओ मनायें ऐसे होली

-होली पर विशेष-   गली-गली और नगर-नगर में आर्यों की बन निकले टोली। सबको वैदिक रंग में रंगकर आओ हम सब खेलें होली॥ 1.  खुश्बू के…

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वसंत हमारा है त्यौहार!

-वसंत ॠतु पर विशेष-                                                                         वसंत हमारा है…

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ॠतुराज वसंत को नमन

               आया वसंत छाया वसंत लेकर आया खुशियां अनंत नदियां बहतीं कल-कल, कल-कल सुरभित पुष्पम चहुं दिग्दिगंत गाती कोयल स्वर…

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विविधा …और अंतिम क्षणों में गोडसे ने गांधी से कहा था- ‘नमस्ते, गांधी जी’

…और अंतिम क्षणों में गोडसे ने गांधी से कहा था- ‘नमस्ते, गांधी जी’

-राकेश कुमार आर्य-  30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई गयी है। इस अवसर पर कुछ विचारणीय बातें हैं, जिन्हें इतिहास से ओझल करने…

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विविधा वोटर कार्ड हाथ में, सूची में नाम नदारद

वोटर कार्ड हाथ में, सूची में नाम नदारद

-जग मोहन ठाकन-    हाल में संपन्न विधान सभा चुनावों में काफी लोग वोटर कार्ड होते हुए भी मतदाता सूची में नाम कटा होने की…

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राजनीति बिहार में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की हकीकत

बिहार में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की हकीकत

-आलोक कुमार-    बिहार में सुशासन का प्रचार तो खूब किया जाता है पर बिहार की जमीनी हकीकत ठीक इस प्रचार के विपरीत है। आईए बात…

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‘सन्त गुरू रविदास और आर्य समाज’

-मनमोहन कुमार आर्य-    भारत के प्रसिद्ध सन्तों में ’ शामिल गुरू रविदासजी ने अपनी अन्त: प्रेरणा पर सांसारिक भोगों में रूचि नहीं ली। बचपन…

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कब तक

कल भी मरी थी कल भी मरेगी आखिर वो कितनी बार जलेगी । पहले तो तन को भेड़िया बन नोच डाला शरीर से आत्मा तक…

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गजल जीवन मर्म

जीवन मर्म

पाषाण हृदय बनकर कुछ भी नहीं पाओगे । वक्त के पीछे तुम बस रोओगे पछताओगे ।। ये आस तभी तक है जब तक सांसें हैं।…

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