राजनीति क्या यह गांधी की कांग्रेस है ?

क्या यह गांधी की कांग्रेस है ?

-अरविंद जयतिलक-  28 दिसंबर 1885। कांग्रेस का स्थापना दिवस। दिन के 12 बजे थे और मुंबई का गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कालेज कांग्रेसजनों से खचाखच भरा…

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राजनीति केजरीवाल ने कांग्रेस की क़ब्र खोद दी है अब दफ़नाना बाक़ी है!

केजरीवाल ने कांग्रेस की क़ब्र खोद दी है अब दफ़नाना बाक़ी है!

-इक़बाल हिंदुस्तानी-    समाज में जागरूकता लाये बिना व्यवस्था में परिवर्तन कैसे होगा? अरविंद केजरीवाल ने एक साल के अंदर पहले आम आदमी पार्टी बनाकर, उसके…

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कविता हो गया है विहान री

हो गया है विहान री

1. हो गया है विहान री सखि,हो गया है अब विहान री, तू नींद छोड़ कर जाग री। पंछियों का कलरव गूंज रहा, सूरज देहरी को…

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कविता महर्षि दयानंद की अमर कहानी

महर्षि दयानंद की अमर कहानी

                  -विमलेश बंसल ‘आर्या’-                           मो- 8130586002              Vimleshbansalarya69@gmail.com हम सब मिल शीश झुकायेंगे, गुरु देव दयानंद दानी को। उस…

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धर्म-अध्यात्म क्या रिलिजन या मजहब हमारे “धर्म” को परिभाषित कर सकता है ?

क्या रिलिजन या मजहब हमारे “धर्म” को परिभाषित कर सकता है ?

-शिवेश प्रताप- संत आगस्तीन एवं अंग्रेजी भाषा के विद्वान टॉम हार्पर और जोसफ कैम्पबेल के अनुसार रिलिजन शब्द दो शब्दों री (पुनः) एवं लिगेयर (बांधना)…

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कारोबारी का लड़ना-मिलना सब मतलब से होता है!

-तारकेश कुमार ओझा-  मुंबई में आयोजित एक गैर-राजनैतिक समारोह में मनसे नेता राज ठाकरे और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का पुरानी बातें भूला कर…

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लेख माओवाद पर एक आधी-अधूरी पड़ताल

माओवाद पर एक आधी-अधूरी पड़ताल

-संजय पराते-  छत्तीसगढ़ के मीडिया जगत में शुभ्रांशु चौधरी एक जाना-पहचाना नाम है। खासतौर से आदिवासी क्षेत्रों और दण्डकारण्य (बस्तर) से संबंधित रिपोर्टिंग के लिए।…

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प्रवक्ता न्यूज़ देवरिया संगोष्ठी की कथा-गाथा, प्रारम्भ से प्रारब्ध तक

देवरिया संगोष्ठी की कथा-गाथा, प्रारम्भ से प्रारब्ध तक

गत 17 नवंबर 2013 को दिल्ली के इंडियन कॉफी हाउस में कुछ लोग बैठे और फिर तय किया कि आगामी 21 दिसंबर को उत्तर प्रदेश…

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राजनीति यदि आज महामति चाणक्य होते तो

यदि आज महामति चाणक्य होते तो

भाग-1    आज की राजनीति में कांट-छांट, उठापटक, तिकड़मबाजी से काम निकालने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। कुटिल नीतियों से, छल-बल से, दम्भ से,…

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राजनीति राज-अमिताभ के पास आने के निहितार्थ

राज-अमिताभ के पास आने के निहितार्थ

-सिद्धार्थ शंकर गौतम- २३ दिसम्बर का दिन महाराष्ट्र की राजनीति और बॉलीवुड के लिए काफी अहम था| मौका था मुम्बई में माटुंगा स्थित षणमुखानंद हॉल…

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राजनीति कुछ तो लोग कहेंगे. लोगों का काम है कहना

कुछ तो लोग कहेंगे. लोगों का काम है कहना

 बीनू भटनागर- 8 दिसम्बर 2013 की शाम दिल्ली विधानसभा के परिणामो ने सभी को स्तब्द्ध कर दिया राजनीति मे एक नये दल के अभ्युदय के…

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राजनीति आम आदमी पार्टी का भारतीय राजनीति में नया प्रयोग

आम आदमी पार्टी का भारतीय राजनीति में नया प्रयोग

-नरेन्द्र कुमार सिंह- अन्ना आन्दोलन के दिनों में अरविन्द केजरीवाल का नाम अचानक सुर्खियों में आया था । उस समय लगता था कि एक महत्वाकांक्षी…

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