अरविन्द केजरीवाल के नाम एक पाती
Updated: December 30, 2013
प्रिय अरविन्द केजरीवाल जी, नमस्कार ! पिछले कुछ दिनों से आपको पत्र लिखने के लिए सोच रहा था. पर एक आम आदमी कि परेशानियां…
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क्यों बेअसर हैं आतंकवाद विरोधी फतवे ?
Updated: December 30, 2013
-तनवीर ज़ाफरी- चाहे इसे कुछ पश्चिमी देशों की साजि़श का नाम दिया जाए अथवा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या या होने के नाते इस्लाम…
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भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा
Updated: December 30, 2013
-डॉ. डी.एन. मिश्रा- भारतीय राजनीति में कम से कम देर से ही सही अच्छाई की प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है। आप आदमी पार्टी -भारतीय जनता पार्टी…
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सच्चा मित्रः कविता
Updated: December 30, 2013
सच्चा मित्र झगड़ू बंदर ने रगड़ू, भालू से हाथ मिलाया| बोला तुमसे मिलकर तो, प्रिय बहुत मज़ा है आया| रगड़ू…
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क्या यह गांधी की कांग्रेस है ?
Updated: December 30, 2013
-अरविंद जयतिलक- 28 दिसंबर 1885। कांग्रेस का स्थापना दिवस। दिन के 12 बजे थे और मुंबई का गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कालेज कांग्रेसजनों से खचाखच भरा…
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केजरीवाल ने कांग्रेस की क़ब्र खोद दी है अब दफ़नाना बाक़ी है!
Updated: December 30, 2013
-इक़बाल हिंदुस्तानी- समाज में जागरूकता लाये बिना व्यवस्था में परिवर्तन कैसे होगा? अरविंद केजरीवाल ने एक साल के अंदर पहले आम आदमी पार्टी बनाकर, उसके…
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हो गया है विहान री
Updated: December 28, 2013
1. हो गया है विहान री सखि,हो गया है अब विहान री, तू नींद छोड़ कर जाग री। पंछियों का कलरव गूंज रहा, सूरज देहरी को…
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महर्षि दयानंद की अमर कहानी
Updated: December 28, 2013
-विमलेश बंसल ‘आर्या’- मो- 8130586002 Vimleshbansalarya69@gmail.com हम सब मिल शीश झुकायेंगे, गुरु देव दयानंद दानी को। उस…
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क्या रिलिजन या मजहब हमारे “धर्म” को परिभाषित कर सकता है ?
Updated: December 28, 2013
-शिवेश प्रताप- संत आगस्तीन एवं अंग्रेजी भाषा के विद्वान टॉम हार्पर और जोसफ कैम्पबेल के अनुसार रिलिजन शब्द दो शब्दों री (पुनः) एवं लिगेयर (बांधना)…
Read moreकारोबारी का लड़ना-मिलना सब मतलब से होता है!
Updated: December 28, 2013
-तारकेश कुमार ओझा- मुंबई में आयोजित एक गैर-राजनैतिक समारोह में मनसे नेता राज ठाकरे और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का पुरानी बातें भूला कर…
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माओवाद पर एक आधी-अधूरी पड़ताल
Updated: December 28, 2013
-संजय पराते- छत्तीसगढ़ के मीडिया जगत में शुभ्रांशु चौधरी एक जाना-पहचाना नाम है। खासतौर से आदिवासी क्षेत्रों और दण्डकारण्य (बस्तर) से संबंधित रिपोर्टिंग के लिए।…
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देवरिया संगोष्ठी की कथा-गाथा, प्रारम्भ से प्रारब्ध तक
Updated: December 27, 2013
गत 17 नवंबर 2013 को दिल्ली के इंडियन कॉफी हाउस में कुछ लोग बैठे और फिर तय किया कि आगामी 21 दिसंबर को उत्तर प्रदेश…
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