राजनीति भाजपा की नज़र भी मुस्लिम वोट बैंक पर

भाजपा की नज़र भी मुस्लिम वोट बैंक पर

इक़बाल हिंदुस्तानी हिंदूवादी सोच छोड़े बिना उसको मुसलमान स्वीकार नहीं करेगा! वोटबैंक की राजनीति का लगातार विरोध करने वाली भाजपा की नज़र भी मुस्लिम वोट…

Read more
विविधा आपातकाल और संघ- डा. मनोज चतुर्वेदी

आपातकाल और संघ- डा. मनोज चतुर्वेदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक निष्काम कर्म आंदोलन है। जिसके संगठन का आधार सक्षम, स्थायी, आत्मनिर्भर तथा कालजयी राष्ट्र है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य कश्मीर…

Read more
दोहे एक अनोखी बात

एक अनोखी बात

पाँच बरस के बाद ही, क्यों होती है भेंट? मेरे घर की चाँदनी, जिसने लिया समेट।।   ऐसे वैसे लोग को, मत करना मतदान। जो…

Read more
चिंतन इंसानियत अपनाएं वरना बहा ले जाएंगी नदियाँ

इंसानियत अपनाएं वरना बहा ले जाएंगी नदियाँ

इतना विराट महाप्रलय…. लाशों का अंबार….भूख और प्यास के मारे दम तोड़ती जिन्दगियाँ….नदियों का रौद्र रूप….कहीं वीरानी, सन्नाटा और कहीं चीख-चीत्कार….घोड़ों और खच्चरों की मौत…बस्तियां…

Read more
जरूर पढ़ें भगवान, इंसान व हैवानों से रूबरू उत्तराखंड त्रासदी

भगवान, इंसान व हैवानों से रूबरू उत्तराखंड त्रासदी

देश का उत्तराखंड राज्य इन दिनों भारतवर्ष में अब तक हुई सबसे भयंकर प्रलय रूपी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। हालांकि प्रशासन व बचाव…

Read more
कविता समारोह

समारोह

आज शहर में एक समारोह हैं, इस पावन पुनीत मांगलिक बेला पर, नेता भी आए, अभिनता भी आए, सज्जन भी आए, अपराधी भी आए ।…

Read more
जरूर पढ़ें क्या सूफी फकीर वास्तव में धर्म निरपेक्ष थे ?

क्या सूफी फकीर वास्तव में धर्म निरपेक्ष थे ?

भारतीय इतिहास में हमें पढ़ाया जाता है कि मुस्लिम सूफी फकीर बड़े दयालू प्रजा से प्रेम करने वाले और एक हिन्दू मुस्लिम समन्वयवादी दृष्टिकोण के…

Read more
समाज ज़ख्म भरने के लिए आश्वासन काफी है?

ज़ख्म भरने के लिए आश्वासन काफी है?

मो. अनीसुर्रहमान खान  ‘‘मैं खूब पढ़ना चाहती हूँ, डॉक्टर बनना चाहती हूँ क्योंकि हमारे गाँव में बहुत से गरीब और विकलांग हैं जो अपने इलाज…

Read more
विविधा मनरेगा की झूठी कहानी से नहीं होता भारत निर्माण

मनरेगा की झूठी कहानी से नहीं होता भारत निर्माण

शैलेन्द्र सिन्हा चुनाव का समय करीब आने के साथ ही केंद्र सरकार ने एक बार फिर मनरेगा को अपना हथियार बनाया है। इसके तहत देश…

Read more
विविधा शिक्षित होती तो हाथ में झाड़ू नहीं होता!

शिक्षित होती तो हाथ में झाड़ू नहीं होता!

निकहत परवीन  सीबीएसई की तरह बिहार के दसवीं और बारहवीं में भी बेटियों ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। बिहार बोर्ड परीक्षा में…

Read more
कविता दर्द और दहशत

दर्द और दहशत

उसने देखा है गाय और भैसों को ट्रक और ट्रेक्टर से ले जाते हुए उसने देखा है भेड़ और बकरी को टैम्पू और तांगे पर…

Read more
कविता मैं शायर तो नही

मैं शायर तो नही

शहर की और निकल पड़ा हूँ …..   मुझमें कोई खास बात नही है   मुझमे कोई अंदाज नही है   मैं एक अनजान हूँ…

Read more