आर्थिकी मौन पीएम, विदेशी कर्ज और रुपयें की गिरती कीमत

मौन पीएम, विदेशी कर्ज और रुपयें की गिरती कीमत

मौन पीएम, विदेशी कर्ज और रुपयें की गिरती कीमत आजादी पश्चात् हमारे ऊपर न तो कर्जा था न हमारी मुद्रा डॉलर से कमतर थी। हां…

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राजनीति गठबंधन की राजनीति का दौर है

गठबंधन की राजनीति का दौर है

  गठबंधन की राजनीति का दौर है -किसी एक व्यक्ति या पार्टी की विचारधारा नहीं चलेगी … ! ज्यों-ज्यों आगामी लोकसभा चुनाव के दिन नज़दीक…

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विविधा प्राथमिक शिक्षा को मज़बूत करना होगा

प्राथमिक शिक्षा को मज़बूत करना होगा

चंद्रभूषण झा  हाल ही भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के बीच उच्च शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी…

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स्‍वास्‍थ्‍य-योग अनजान बीमारी की चपेट में बिहार

अनजान बीमारी की चपेट में बिहार

रजनी गुप्ता  बिहार में एक बार फिर दिमागी बुखार जैसी एक बीमारी ने अपना क़हर ढ़ा रखा है। चिंता की बात यह है कि इसकी…

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विविधा भारत का इतिहास : हमारी ग़लतियों की कहानी

भारत का इतिहास : हमारी ग़लतियों की कहानी

 आर. सिंह मैने यह आलेख श्री राकेश कुमार आर्य के आलेख “संपूर्ण भारत कभी गुलाम नहीं रहा “ पर टिप्पणी के रूप में लिखना आरम्भ…

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व्यंग्य खाद्य सुरक्षा के बसते

खाद्य सुरक्षा के बसते

बगल में तीन तीन बसते दबाये चोखी लामा फटे थैले सा मुंह लटकाए चले आ रहे थे। हमें मसखरी  सूझी ..और पूछ बैठे ..अरे चोखी मियां ये…

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जरूर पढ़ें भारत में शुद्ध दूध: ढूंढते रह जाओगे

भारत में शुद्ध दूध: ढूंढते रह जाओगे

किसी ज़माने में भारत में शुद्ध दूध की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दूध-दही की…

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कविता एक पुत्र गाँव छोड़ रहा था

एक पुत्र गाँव छोड़ रहा था

हाँ , एक पुत्र आज गावँ छोड़ रहा था, भविष्य की तलाश में शहर की ओर दौड़ रहा था , और पिता पुत्र की आँखों…

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कविता न आयीं तू मेरे सपनों में , न आयीं तू मेरे नगमों में

न आयीं तू मेरे सपनों में , न आयीं तू मेरे नगमों में

जलता रहा मैं दीपक बनकर ……… न जाने किस विश्वास पर दिन -रात मैं राह  तकता रहा जलता रहा मैं दीपक बनकर ………. पर न…

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जरूर पढ़ें कब टूटेगी हमारी चुप्पी ?—सिद्धार्थ मिश्र “स्वितंत्र”

कब टूटेगी हमारी चुप्पी ?—सिद्धार्थ मिश्र “स्वितंत्र”

चुप  हैं  सब  करता  नहीं  क्‍यों  दूसरा  कुछ  बातचीत, अमर शहीद पं रामप्रसाद  बिस्मिल का ये शेर देश के मौजूदा हालातों को देखते हुए आज…

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कविता आंसू निकल पड़े

आंसू निकल पड़े

लेने सबाब तीर्थ का, घर से निकल पड़े | केदार-बद्री धाम के,  दर पे निकल पड़े | सब ठीक चल रहा था,मौसम भी साफ था,…

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कविता जीवन का लक्ष्य

जीवन का लक्ष्य

मैं, मैं हूँ तुम, तुम हो वह भी, वह ही है यह सत्य है जानते हैं हम सब यह सब . पर, इतना ही जानना…

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