जन-जागरण ’’प्रवक्ता’’ पर लिखने का मकसद प्रशंसा पाना नहीं है-इक़बाल हिंदुस्तानी

’’प्रवक्ता’’ पर लिखने का मकसद प्रशंसा पाना नहीं है-इक़बाल हिंदुस्तानी

पहले मेरे 179 लेखों का अध्ययन करें फिर मेरे बारे में कोई राय बनायें!    प्रवक्ता पर हाल ही में प्रकाशित मेरे एक लेख ’वाजपेयी…

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जरूर पढ़ें हिन्दी भाषा के सम्बंध में कुछ विचार

हिन्दी भाषा के सम्बंध में कुछ विचार

प्रोफेसर महावीर सरन जैन जब से विश्व के प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथों ने यह स्वीकार किया है कि चीनी भाषा के बाद हिन्दी के मातृभाषियों की…

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राजनीति RSS आतंकवादी , तो नहेरु क्या है ? ( तस्वीर बोलती है )

RSS आतंकवादी , तो नहेरु क्या है ? ( तस्वीर बोलती है )

                               “ कॉंग्रेस की सरकार ने RSS को आतंकवादी संघटन ही कहा है मगर कॉंग्रेस सरकार के वर्तमान शासक भूल गए है की इस कॉंग्रेस के दादाजी याने…

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चिंतन अविश्वसनीय होते हैं बात-बात में कसम खाने वाले

अविश्वसनीय होते हैं बात-बात में कसम खाने वाले

आदमियों की कई सारी किस्मों में से एक किस्म उन लोगों की है जो बात-बात में कसम खाया करते हैं और उन लोगों को अपनी…

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पर्यावरण भूमंडल का बढ़ता तापमान और हम

भूमंडल का बढ़ता तापमान और हम

पूरे विश्व में जि़म्मेदार लोग विशेषकर वैज्ञानिक वर्ग इस बात को लेकर गत एक दशक से बेहद चिंतित दिखाई दे रहे हैं कि पृथ्वी का…

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राजनीति गठबंधन में बंधन खुलने पर हंगामा क्यूँ ?

गठबंधन में बंधन खुलने पर हंगामा क्यूँ ?

१७ वर्षों तक साथ रहे नीतीश और शरद यादव की जेडीयू का एनडीए के गठबंधन से बंधनमुक्त होने पर इतना हंगामा क्यों ? बिहार में…

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राजनीति मोदी का पटेल प्रेम

मोदी का पटेल प्रेम

ये महज एक इत्तेफाक नहीं है कि जब भाजपा का लौह पुरुष कोपभवन में था, गुजरात में मोदी का प्रेम देश के लौह पुरुष सरदार…

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कविता नया  सफ़र

नया सफ़र

लगता है जैसे वे कर रहे हों एक तैयारी आज शायद उनकी आ गयी है बारी क्या खोया, क्या पाया ठीक से समझ रहे हैं…

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बच्चों का पन्ना राखी का त्यौहार‌

राखी का त्यौहार‌

राखियों से गुलजार बजार, आ गया राखी का त्यौहार| मिठाई सजी दुकानों में शॊरगुल गूंजे कानों में रेशमी धागों की भरमार राखियों के ढेरों अंबार…

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कविता गिद्धों के भाल पर

गिद्धों के भाल पर

डा.राज सक्सेना कुर्सी ही श्रेष्ट बन गई,  कलि के कराल  पर | कितने ही ताज सज गए,गिद्धों के भाल पर | सम्पूर्ण कोष चुक गया…

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दोहे सुमन आग भीतर लिए

सुमन आग भीतर लिए

हार जीत के बीच में, जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से, हार बने तब जीत।।   डोर बढ़े जब प्रीत की, बनते हैं तब…

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गजल यह मुर्दों की बस्ती है

यह मुर्दों की बस्ती है

व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है   यूँ भी शेर बचे हैं…

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