’’प्रवक्ता’’ पर लिखने का मकसद प्रशंसा पाना नहीं है-इक़बाल हिंदुस्तानी
Updated: July 19, 2013
पहले मेरे 179 लेखों का अध्ययन करें फिर मेरे बारे में कोई राय बनायें! प्रवक्ता पर हाल ही में प्रकाशित मेरे एक लेख ’वाजपेयी…
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हिन्दी भाषा के सम्बंध में कुछ विचार
Updated: July 19, 2013
प्रोफेसर महावीर सरन जैन जब से विश्व के प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथों ने यह स्वीकार किया है कि चीनी भाषा के बाद हिन्दी के मातृभाषियों की…
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RSS आतंकवादी , तो नहेरु क्या है ? ( तस्वीर बोलती है )
Updated: June 20, 2013
“ कॉंग्रेस की सरकार ने RSS को आतंकवादी संघटन ही कहा है मगर कॉंग्रेस सरकार के वर्तमान शासक भूल गए है की इस कॉंग्रेस के दादाजी याने…
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अविश्वसनीय होते हैं बात-बात में कसम खाने वाले
Updated: June 20, 2013
आदमियों की कई सारी किस्मों में से एक किस्म उन लोगों की है जो बात-बात में कसम खाया करते हैं और उन लोगों को अपनी…
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भूमंडल का बढ़ता तापमान और हम
Updated: June 20, 2013
पूरे विश्व में जि़म्मेदार लोग विशेषकर वैज्ञानिक वर्ग इस बात को लेकर गत एक दशक से बेहद चिंतित दिखाई दे रहे हैं कि पृथ्वी का…
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गठबंधन में बंधन खुलने पर हंगामा क्यूँ ?
Updated: June 20, 2013
१७ वर्षों तक साथ रहे नीतीश और शरद यादव की जेडीयू का एनडीए के गठबंधन से बंधनमुक्त होने पर इतना हंगामा क्यों ? बिहार में…
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मोदी का पटेल प्रेम
Updated: June 20, 2013
ये महज एक इत्तेफाक नहीं है कि जब भाजपा का लौह पुरुष कोपभवन में था, गुजरात में मोदी का प्रेम देश के लौह पुरुष सरदार…
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नया सफ़र
Updated: June 20, 2013
लगता है जैसे वे कर रहे हों एक तैयारी आज शायद उनकी आ गयी है बारी क्या खोया, क्या पाया ठीक से समझ रहे हैं…
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राखी का त्यौहार
Updated: June 20, 2013
राखियों से गुलजार बजार, आ गया राखी का त्यौहार| मिठाई सजी दुकानों में शॊरगुल गूंजे कानों में रेशमी धागों की भरमार राखियों के ढेरों अंबार…
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गिद्धों के भाल पर
Updated: June 19, 2013
डा.राज सक्सेना कुर्सी ही श्रेष्ट बन गई, कलि के कराल पर | कितने ही ताज सज गए,गिद्धों के भाल पर | सम्पूर्ण कोष चुक गया…
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सुमन आग भीतर लिए
Updated: June 19, 2013
हार जीत के बीच में, जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से, हार बने तब जीत।। डोर बढ़े जब प्रीत की, बनते हैं तब…
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यह मुर्दों की बस्ती है
Updated: June 19, 2013
व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है यूँ भी शेर बचे हैं…
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