बच्चों का पन्ना आम की  चटनी

आम की चटनी

                    आवाज़ आ रही खटर पटर, पिस रहे आम सिलबट्टे पर|                 अमियों के टुकड़े टुकड़े…

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राजनीति वाजपेयी उदार और आडवाणी कट्टर क्यों माने जाते रहे हैं?

वाजपेयी उदार और आडवाणी कट्टर क्यों माने जाते रहे हैं?

इक़बाल हिंदुस्तानी मोदी को आगे लाने से भाजपा की सीटें बढ़ सकती हैं घटक नहीं! भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन ने मोदी का बचाव करते हुए…

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बच्चों का पन्ना दिन और रात

दिन और रात

रोज रोज हो जाता है दिन, रोज रोज हो जाती रात| बोलो बापू क्या है कारण, बोलो बापू क्या है बात| बापू बोले बात जरासी,…

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राजनीति भीष्म पितामह और लाल कृष्ण आडवानी

भीष्म पितामह और लाल कृष्ण आडवानी

      अपने देश में पितामह शब्द ही भीष्म का पर्यायवाची मान लिया गया है। भीष्म विख्यात कुरुवंशी हस्तिनापुर के राजा शान्तनु के पुत्र और…

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विविधा शहीदों के सरताज -गुरु अर्जुन देव जी

शहीदों के सरताज -गुरु अर्जुन देव जी

तेरा कीआ मीठा लागै…हरि नाम पदारथ नानक मांगे…गुरबाणी के इन शब्द को सुनकर आपने अंदाजा लगा लिया होगा कि हम ईश्वर की रज़ा की बात…

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व्यंग्य देख लिया न दादू!

देख लिया न दादू!

दादू! देख लिया न अपनी जिद का नतीजा ! अपनी तो फजीहत करवाई ही, हमारी भी बची खुची नाक कटवा कर रख दी। लुटिया डुबोते…

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राजनीति तीसरे  मोर्चे की सियासी  संभावनाएं – सिद्धार्थ  मिश्र “स्‍वतंत्र”

तीसरे मोर्चे की सियासी संभावनाएं – सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र”

हालिया प्रदर्शित बहुचर्चित चलचित्र गैंग्‍स ऑफ वासेपुर में रामाधीर सिंह (तिग्‍मांशु धुलिया) का एक संवाद है, इहां सबके दिमाग में अपना सिनेमा चल रहा है…

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विविधा आखिर कब तक बेमौत मरते रहेगें स्कूली बच्चे…..?

आखिर कब तक बेमौत मरते रहेगें स्कूली बच्चे…..?

देश में बढ़ते स्कूली बस हादसे रूकने का नाम नहीं ले रहे है ,प्रतिवर्ष स्कूली बच्चे बेमौत मारे जा रहे हैं मगर ब्यवस्था बहरी बनी…

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विविधा खून बहाते खूनी रिश्ते , कौन दोषी, कौन जिम्मेदार ?

खून बहाते खूनी रिश्ते , कौन दोषी, कौन जिम्मेदार ?

वर्तमान समाज में खूनी रिश्तों में इतनी नफरत बढ़ रही है कि खूनी रिश्ते ही एक दूसरे का खून बहा रहे है रिश्तों में आ…

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कहानी लधुकथा(राजनीति)

लधुकथा(राजनीति)

गरीब थी ,बेचारी रोज शहर में दिहाड़ी कमाने जाती, शाम ढलते ही वापस घर आ जाती थी । एक दिन उसकी बस छूट गई ।…

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कहानी लधुकथा(पुस्तकवध्द)

लधुकथा(पुस्तकवध्द)

आज रविवार था ,विजय को भी दफतर से अवकाश था । सोचा परिवार सहित बाजार घूमने चलें । विजय की पत्नी नेहा व बच्चे भी…

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विविधा बाबुल मेरे उड़ना सिखाया…..

बाबुल मेरे उड़ना सिखाया…..

बाबुल मेरे ने उड़ना सिखाया…बचपन में गिरते को ऊंगली पकड़कर चलना सिखाया… उनके एक उत्साह से मानो मेरे हौसले को लग गए हों पंख…मानो मैं…

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