कविता गिद्धों के भाल पर

गिद्धों के भाल पर

डा.राज सक्सेना कुर्सी ही श्रेष्ट बन गई,  कलि के कराल  पर | कितने ही ताज सज गए,गिद्धों के भाल पर | सम्पूर्ण कोष चुक गया…

Read more
दोहे सुमन आग भीतर लिए

सुमन आग भीतर लिए

हार जीत के बीच में, जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से, हार बने तब जीत।।   डोर बढ़े जब प्रीत की, बनते हैं तब…

Read more
गजल यह मुर्दों की बस्ती है

यह मुर्दों की बस्ती है

व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है   यूँ भी शेर बचे हैं…

Read more
गजल अन्जान

अन्जान

एक डर अन्जान सा, हर शख़्स के मन में बसा है | चीख़ने पर भी, सज़ा-ए-मौत से बढ कर सज़ा है | चुप रहो, सुनते…

Read more
चिंतन असली आनंद मिलता है, कर्त्तव्य निर्वाह के बाद ही

असली आनंद मिलता है, कर्त्तव्य निर्वाह के बाद ही

कर्म और जीवन के आनंद के बीच गहरा रिश्ता है। आनंद ही अपना चरम लक्ष्य हो और कर्त्तव्य कर्म गौण या उपेक्षित हो तो वह…

Read more
जरूर पढ़ें मुस्लिम विद्वानों की दृष्टि में: देशद्रोही कौन?

मुस्लिम विद्वानों की दृष्टि में: देशद्रोही कौन?

भारत में सर्वधर्म समभाव की बातें करते हुए हिंदू मुस्लिम ईसाई के भाई भाई होने की बात कही जाती है। इससे पूर्व भारत का आर्यत्व-हिंदुत्व…

Read more
गजल Default Post Thumbnail

यह मुर्दों की बस्ती है

व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है यूँ भी शेर बचे हैं कितने,…

Read more
चुटकुले बंता की सिस्टर

बंता की सिस्टर

बंता की शादी एक नर्स से हो गई.  संता बंता से- जिन्दगी कैसी गुजर रही है? बंता- पूछ मत यार! जब तक सिस्टर ना कहूं,…

Read more
चुटकुले वायरलेस कब से हुआ शुरु

वायरलेस कब से हुआ शुरु

एक बार संता जी अमेरिका जाते हैं. बुश उनसे मिलते हैं और जमीन खोदने को कहते हैं. संता जी जमीन खोदते हैं 100, 200,300 फीट.…

Read more
राजनीति मनमोहन मंत्रिमंडल  विस्तार  की  सार्थकता ?

मनमोहन मंत्रिमंडल विस्तार की सार्थकता ?

फिर  हुआ  मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल का विस्तार । कुल आठ नए उम्रदराज  मंत्रियों  के शपथ ग्रहण  के  साथ यूपीए -२  सरकार  में अब 77…

Read more
व्यंग्य कवि और कल्पना

कवि और कल्पना

आजकल हर निर्माता अपनी सफल फिल्म के सीक्वल बनाने में लगा हुआ है।  टी.वी. पर आने वाले रियलिटी शोज़ के तो  हर साल नये सीज़न…

Read more
कविता चलते -चलते

चलते -चलते

मौसम बदला ,तस्वीर बदली, बदल गया इंसान घर के आँगन में पल रहा जुल्म का पकवान नया ,सबेरा होता है रोज फिर भी नही बदला…

Read more