परिचर्चा : सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक
Updated: May 14, 2013
आजादी के बाद भी, जनता है परतंत्र! है कैसी ये आजादी, कैसा यह जनतंत्र? संविधान में यह प्रावधान है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च…
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सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में किसी एक भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक दो!
Updated: April 20, 2013
हिंदी को व्यवहार में लाने की सरकारी अपील आपने रेलवे स्टेशनों तथा अन्य सरकारी कार्यालयों में पढ़ी होगी; परन्तु क्या आपको पता है कि विश्व…
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पानी नहीं नहानी में
Updated: April 18, 2013
जरा ठीक से देखो बेटे पानी नहीं नहानी में तुमको आज नहाना होगा एक लोटे भर पानी में| नहीं बचा धरती पर पानी बहा व्यर्थ…
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‘‘यह सिर्फ कष्ट की बात नहीं, हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी है’’
Updated: April 18, 2013
वीरेन्द्र सिंह परिहार भाजपा के मुख्य पत्र ‘कमल संदेश’ में प्रभात झा द्वारा यह लिखे जाने पर कि भारत…
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‘‘आगे-आगे देखिए होता है, क्या?…………’’
Updated: April 18, 2013
वीरेन्द्र सिंह परिहार अभी 13 अप्रैल तक ऐसा माना जा सकता था कि जद यू ने प्रधानमंत्री…
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भगवान श्री राम त्याग के प्रेरक थे सत्ता के नहीं
Updated: April 18, 2013
निर्मल रानी हिंदू धर्मशास्त्रों में वैसे तो 33 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख किया गया है। परंतु इनमें कुछ देवता अथवा भगवान के अवतार ऐसे हैं…
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खेल भावना
Updated: April 18, 2013
एक सड़क पर मक्खी मच्छर बैठ गये शतरंज खेलने, थे सतर्क बिल्कुल चौकन्ने एक दूजे के वार झेलने। मक्खी ने जब चला सिपाही मच्छर ने…
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जंगली चुनाव
Updated: April 18, 2013
मेरे पड़ोस के जंगल में था उस दिन बड़ा चुनाव हुआ चकित जब मैंने देखे हर वोटर के भाव। था चुनाव जंगल परिषद का थे…
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अरे मास्टर
Updated: April 18, 2013
अरे मास्टर दिन भर क्यों, पढ़ना पढ़ना चिल्लाता| बोझ हटे कंधे से क्यों न, ऐसी राह बताता| लाद लाद बस्ता रगड़ू की, कमर हो गई…
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दो ध्रुवों पर केन्द्रित होती भारतीय राजनीति
Updated: April 17, 2013
प्रमोद भार्गव भारत में सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चुने जाने की संवैधानिक व्यवस्था नहीं है, बावजूद देश में जिस तरह का राजनीतिक माहौल आकार लेता…
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बी.ए.आनर्स इन बाबागिरी / मातागिरी
Updated: April 17, 2013
शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य व्यक्ति को किसी रोज़गार के लियें तैयार करना होता है। पहले विज्ञान, वाणिज्य, कला, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और वकालत के…
Read moreराजेन्द्र सारथी के दोहे
Updated: April 17, 2013
शहरों में वे आ गये, बेच गांव के खेत। धन धूएं – सा उड़ गया, ख्वाब बन गए प्रेत। नए दौर में …
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