आर्थिकी जरूरी दवाओं को सरकारी मूल्य से ज्यादा पर बिक्री

जरूरी दवाओं को सरकारी मूल्य से ज्यादा पर बिक्री

संजय स्वदेश कोई बीमारी जब जानलेवा हो जाती है तो लोग इलाज के लिए क्या कुछ नहीं दांव पर लगा देते हैं। क्या अमीर क्या…

Read more
आर्थिकी दागदार हैं निजी बैंक के दामन

दागदार हैं निजी बैंक के दामन

आनलार्इन बेबपोर्टल कोबरा पोस्ट द्वारा आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक, एचडीएफसी बैंक और एकिसस बैंक के विरुद्ध धन शोधन का आरोप लगाया गया है। कोबरा पोस्ट के एसोसिएट…

Read more
स्‍वास्‍थ्‍य-योग आधुनिक जीवन शैली से हाईपरटेंशन की चपेट में आ रहे हैं युवा

आधुनिक जीवन शैली से हाईपरटेंशन की चपेट में आ रहे हैं युवा

निहाल सिंह नई दिल्ली, 06 अप्रैल । विश्व स्वास्थ्य संगठन पूरे विश्व भर में बढ़ रहे हाईपरटेंशन की समस्या से परेशान है। इसलिए इस बार…

Read more
कविता झिरिया

झिरिया

झंकृत होती दुनियावीं कामनाओं के स्वर और अपुष्ट अप्रकटित कुछ पुरानी इक्छायें, ढूँढते हुए अपनें मूर्त आकार को आ गईं थी इस गली के मुहानें…

Read more
राजनीति केंद्र में आए हिंदुत्व और मोदी

केंद्र में आए हिंदुत्व और मोदी

प्रमोद भार्गव भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की 76 सदस्यीय जो नर्इ टीम वजूद में आर्इ है, उससे साफ है कि एक तो भाजपा आक्रामक हिंदुत्व…

Read more
आर्थिकी डिफाल्टर कारपोरेटस ने किया बैंकों का बेड़ागड़क

डिफाल्टर कारपोरेटस ने किया बैंकों का बेड़ागड़क

नफा और नुकसान को किसी भी बिजनेस का अहम हिस्सा माना गया है।  बैंकिंग बिजनेस को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है। इस…

Read more
जन-जागरण पाकिस्तानी हिन्दुओ पर मानवाधिकार मौन

पाकिस्तानी हिन्दुओ पर मानवाधिकार मौन

मात्र तीन दिन के अपने बेटे को उसके दादा-दादी के पास छोड्कर पाकिस्तान से तीर्थयात्रा वीजा पर भारत आने वाली 30 वर्षीय भारती रोती हुई अपनी…

Read more
विविधा भारतीय लोकतन्त्र में जातीवाद  का घुन

भारतीय लोकतन्त्र में जातीवाद का घुन

दुनिया के समाज शाश्त्रियों के लिए मध्ययुगीन -गैर इस्लामिक , गैर ईसाइयत और तथाकथित विशुद्ध भारतीय उत्तर वैदिक कालीन पृष्ठभूमि वाले भारत के सामाजिक -ताने-बाने…

Read more
कविता पवन पाण्डेय की कविता

पवन पाण्डेय की कविता

अमूर्त और निःशब्द परम शांति तुम्हारे प्रेरक हैं प्रियवर   समय के मूढ़ कोलाहल का हैं यह शमन? क्या एक त्वरित उपाय? या छद्म अहम्…

Read more
महिला-जगत स्त्री चेतन मन में होनी चाहिए, अवचेतन में नहीं – सारदा बनर्जी

स्त्री चेतन मन में होनी चाहिए, अवचेतन में नहीं – सारदा बनर्जी

आम तौर पर देखा गया है कि हिन्दी साहित्य में पुरुष कवियों के हमेशा अवचेतन में स्त्री आई है। स्त्री को लेकर कुंठित भाव व्यक्त…

Read more
महिला-जगत आख़िर ये स्त्री-उत्पीड़न कब बंद होगा ? – सारदा बनर्जी

आख़िर ये स्त्री-उत्पीड़न कब बंद होगा ? – सारदा बनर्जी

क्या महज महिला दिवस को सेलिब्रेट करके, सलामी ठोककर या नमन करके या उस दिन स्त्री-सम्मान और स्त्री-महिमा की असंख्य बातें करके स्त्रियों का कोई…

Read more
विविधा अब ऐसे परिवर्तन का हो शंखनाद / नरेश भारतीय

अब ऐसे परिवर्तन का हो शंखनाद / नरेश भारतीय

राजनीति को विष बताने के बावजूद राहुल गांधी ने देश के पूंजीपति और उद्योगपति समुदाय के समक्ष बोलते हुए आगामी लोकसभा चुनाव दंगल में अपने…

Read more