कैसे कहूँ
Updated: June 27, 2013
बड़ी मुश्किल से मौका मिला दिल को सुकून मिला बरसों की एक आज मुलाक़ात हुई दूर बैठे देखता रहा .. करीब इतना बैठा की मन…
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एक अनाम के नाम
Updated: June 27, 2013
रससिक्त छंद कुछ कविता के, कर रहा समर्पण प्रिय तुमको | चाहो, उर मे रख, दुलरा कर, संरक्षित कर लेना इनको | यूं तो…
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संप्रदाय धर्म के विकास का चरण नही होता
Updated: June 27, 2013
डार्विन के विकासवाद के सिद्धान्त ने कुछ लोगों को बहुत अधिक भ्रमित कर दिया ऐसे भ्रमित लोगों का तर्क होता है कि धर्म का विकास…
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राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट – भुखमरी की रेखा
Updated: June 27, 2013
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की गरीबों की आमदानी से जुड़े जो आकंड़े आए हैं,उनसे गरीबी रेखा तो नहीं,लेकिन भुखमरी की रेखा जरूर तय की जा सकती…
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धूमिल की कविताओं में व्यक्त स्त्री-विरोधी दृष्टिकोण — सारदा बनर्जी
Updated: June 27, 2013
धूमिल की कविताएं जनतंत्र को संबोधित करने वाली कविताएं हैं। ये कविताएं सीधे-सीधे देश के लोकतंत्र, संविधान, संसद और नेता की तीखी आलोचना में लिखी…
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केदारनाथ हादसाः इंसान की हरकतों का दोष भगवान को मत दो!
Updated: June 26, 2013
सरकार के अनुसार गायब लोग लाश मिलने तक मरे नहीं माने जायेंगे। केदारनाथ हादसे में जो हज़ारों लोग अलकनंदा, भागीरथी और गौरी में समा गये…
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आपदा पर सियासत एक निंदनीय कृत्य
Updated: June 26, 2013
उत्तराखंड में आये भीषण सैलाब में अब तक ५००० से अधिक लोगों के मरने की आशंका व्यक्त की जा रही है । हांलाकि जहां तक…
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वे देख रहे हैं
Updated: June 26, 2013
कल शर्मा जी के घर गया, तो वहां असम के वन विभाग में कार्यरत उनके एक पुराने मित्र वर्मा जी भी मिले, जो अपने 12…
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हरिद्वार डूब जाएगा
Updated: June 26, 2013
मैंने वर्ष 1998 में अपने मासिक समाचार पत्र (मीडिया शक्ति) में फस्ट पेज पर एक खबर छापी थी ” हरिद्वार डूब जायेगा”. जिसमें मैंने आशंका…
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सत्याग्रह का अस्त्र
Updated: June 26, 2013
मौसम प्रतिकूल टूट गयी सड़कें बह गया पुल आम जनता है पस्त अधिकांश नेता – अधिकारी अपने में मस्त दिखने में सब भद्र पर सवाल…
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प्राकृतिक आपदा ऐसे ही नहीं आती
Updated: June 26, 2013
विपिन जोशी, उत्तराखंड उत्तराखंड में बीते सप्ताह कुदरत का जो क़हर टूटा उसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। तबाही का ऐसा खौ़फनाक मंजर…
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माँ सरस्वती
Updated: June 25, 2013
कण-कण तन का उज्ज्वल करदे | एक नवल तेज, अविकल करदे | माँ सरस्वती आ, कंठ समा, मन-मस्तक को अविरल करदे | वाणी में…
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