परंपराओं के अजीबोगरीब घालमेल
Updated: November 21, 2012
अनिल अनुप नसीब खान ने हाल ही में अपने बेटे प्रकाश सिंह की शादी राम सिंह की बेटी गीता से की. तीन महीने पहले हेमंत…
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धनकुबेरों का कालाधन
Updated: November 21, 2012
प्रमोद भार्गव अभी तक विदेशो में नेताओं और अधिकारियों का ही कालाधन जमा होने की जानकारियां जनचर्चा में थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नए खुलासे…
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रोशनी में कपड़े बदलती कांग्रेस
Updated: November 21, 2012
अरविंद जयतिलक अनुकूल परिस्थितियां तभी निर्मित होती है जब लक्ष्य का पता हो। लक्ष्य के विपरित दौड़ने वाला चूक जाता है। कांग्रेस लक्ष्य के विपरित…
Read moreस्वच्छंदजी बोले
Updated: November 21, 2012
अशोक गौतम हम जैसों को तो नरक की न जिंदे जी चिंता होती है न मरने के बाद, क्योंकि हमें पता होता है कि हमें…
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नये बैंकों से किसकी भरेगी झोली
Updated: November 21, 2012
बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पीछे सरकार की मंशा थी, आम आदमी को बैंकों से जोड़ना। उसके स्वरुप को कल्याणकारी बनाना। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता…
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दास्ताँ-ए-कसाब का हुआ अंत
Updated: November 21, 2012
बुधवार की सुबह १६६ परिवारों सहित देश की जनता के लिए सुखद अहसास लेकर आई। भारत की धर्मनिरपेक्ष अस्मिता व मुंबई में २६/११ हमले के…
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भाजपा को भीतर की बारुदी सुरंगें पहले साफ़ करनी होंगी
Updated: November 21, 2012
डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री गडकरी के बहाने भाजपा को घेरने की कांग्रेस की रणनीति बहुत साफ़ और स्पष्ट है । कांग्रेस को अपने भ्रष्टाचार से…
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सॉफ्ट स्टेट ने दिया हार्ड मैसेज
Updated: November 21, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ 26/11 हमले के गुनहगार आमिर अजमल कसाब को आखिरकर फांसी देकर भारत ने पूरी दुनिया को हार्ड मैसेज भेजा है कि उसे…
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रेत की धार में बहती आवाज
Updated: November 21, 2012
अनिल अनूप आवाजों को सरहदों के पार जाने से रोका नहीं जा सकता। शायद इसीलिए राजस्थान के लूणा गांव की आवाज रेत के धोरों में…
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स्ंतों की घटती स्वीकार्यता एक विवेचना: सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’
Updated: November 21, 2012
धर्म का मुख्य उद्देश्य है लोगों को सदाचारी एवं सद्गुण संपन्न बनाना । वस्तुतः अपनी इन्ही आंतरिक विशेषताओं के कारण धर्म की प्रासंगिकता प्रायः हर…
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राजनीति अब करिश्मे की उम्मीद किससे करेगी साहेब !
Updated: November 21, 2012
निरंजन परिहार बाला साहेब ठाकरे। हिंदू हृदय सम्राट। हमेशा अगल अंदाज। बिल्कुल अलग बयान। जो जी में आया, वह बोल दिया। हर बयान पर बवाल…
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दुर्भाग्य के दावानल में भी दर्द को दरकिनार करता मीडिया
Updated: November 21, 2012
निरंजन परिहार ‘मातोश्री’ से इससे पहले ट्रक पर सवार होकर बाला साहेब कभी नहीं निकले। पर 18 नवंबर को रविवार की सुबह जब निकले तो…
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