समाज परंपराओं के अजीबोगरीब घालमेल

परंपराओं के अजीबोगरीब घालमेल

अनिल अनुप नसीब खान ने हाल ही में अपने बेटे प्रकाश सिंह की शादी राम सिंह की बेटी गीता से की. तीन महीने पहले हेमंत…

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आर्थिकी धनकुबेरों का कालाधन

धनकुबेरों का कालाधन

प्रमोद भार्गव अभी तक विदेशो में नेताओं और अधिकारियों का ही कालाधन जमा होने की जानकारियां जनचर्चा में थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नए खुलासे…

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राजनीति रोशनी में कपड़े बदलती कांग्रेस

रोशनी में कपड़े बदलती कांग्रेस

अरविंद जयतिलक अनुकूल परिस्थितियां तभी निर्मित होती है जब लक्ष्य का पता हो। लक्ष्य के विपरित दौड़ने वाला चूक जाता है। कांग्रेस लक्ष्य के विपरित…

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स्वच्छंदजी बोले

अशोक गौतम हम जैसों को तो नरक की न जिंदे जी चिंता होती है न मरने के बाद, क्योंकि हमें पता होता है कि हमें…

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आर्थिकी नये बैंकों से किसकी भरेगी झोली

नये बैंकों से किसकी भरेगी झोली

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पीछे सरकार की मंशा थी, आम आदमी को बैंकों से जोड़ना। उसके स्वरुप को कल्याणकारी बनाना। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता…

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टॉप स्टोरी दास्ताँ-ए-कसाब का हुआ अंत

दास्ताँ-ए-कसाब का हुआ अंत

बुधवार की सुबह १६६ परिवारों सहित देश की जनता के लिए सुखद अहसास लेकर आई। भारत की धर्मनिरपेक्ष अस्मिता व मुंबई में २६/११ हमले के…

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राजनीति भाजपा को भीतर की बारुदी सुरंगें पहले साफ़ करनी होंगी

भाजपा को भीतर की बारुदी सुरंगें पहले साफ़ करनी होंगी

डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री गडकरी के बहाने भाजपा को घेरने की कांग्रेस की रणनीति बहुत साफ़ और स्पष्ट है । कांग्रेस को अपने भ्रष्टाचार से…

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टॉप स्टोरी सॉफ्ट स्टेट ने दिया हार्ड मैसेज

सॉफ्ट स्टेट ने दिया हार्ड मैसेज

डॉ. आशीष वशिष्ठ 26/11 हमले के गुनहगार आमिर अजमल कसाब को आखिरकर फांसी देकर भारत ने पूरी दुनिया को हार्ड मैसेज भेजा है कि उसे…

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शख्सियत रेत की धार में बहती आवाज

रेत की धार में बहती आवाज

अनिल अनूप आवाजों को सरहदों के पार जाने से रोका नहीं जा सकता। शायद इसीलिए राजस्थान के लूणा गांव की आवाज रेत के धोरों में…

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समाज स्ंतों की घटती स्वीकार्यता एक विवेचना: सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’

स्ंतों की घटती स्वीकार्यता एक विवेचना: सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’

धर्म का मुख्य उद्देश्य है लोगों को सदाचारी एवं सद्गुण संपन्न बनाना । वस्तुतः अपनी इन्ही आंतरिक विशेषताओं के कारण धर्म की प्रासंगिकता प्रायः हर…

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टॉप स्टोरी राजनीति अब करिश्मे की उम्मीद किससे करेगी साहेब !

राजनीति अब करिश्मे की उम्मीद किससे करेगी साहेब !

निरंजन परिहार बाला साहेब ठाकरे। हिंदू हृदय सम्राट। हमेशा अगल अंदाज। बिल्कुल अलग बयान। जो जी में आया, वह बोल दिया। हर बयान पर बवाल…

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टॉप स्टोरी दुर्भाग्य के दावानल में भी दर्द को दरकिनार करता मीडिया

दुर्भाग्य के दावानल में भी दर्द को दरकिनार करता मीडिया

निरंजन परिहार ‘मातोश्री’ से इससे पहले ट्रक पर सवार होकर बाला साहेब कभी नहीं निकले। पर 18 नवंबर को रविवार की सुबह जब निकले तो…

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