महत्वपूर्ण लेख असम के दर्द को समझना जरुरी है — डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

असम के दर्द को समझना जरुरी है — डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

असम समस्या को लेकर चर्चा होती रहती है । उसके समाधान के तरीके भी अपने अपने नजरिये से बताये जाते हैं । लेकिन असम समस्या…

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महिला-जगत स्त्री और कृष्ण-चरित्र – सारदा बनर्जी

स्त्री और कृष्ण-चरित्र – सारदा बनर्जी

क्या कारण है कि स्त्रियों में मिथकीय नायकों में राम की अपेक्षा कृष्ण ज़्यादा पॉप्यूलर हैं ? कृष्ण को लेकर स्त्रियों में जितनी फैंटेसी, प्रेम…

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वर्त-त्यौहार मनोहारी लोक रस्मों से भरपूर है वागड़ की दीवाली

मनोहारी लोक रस्मों से भरपूर है वागड़ की दीवाली

 कल्पना डिण्डोर  जीवन के हर पहलू को वासंती उल्लास देने में पर्व-त्योहारों का ख़ास महत्व है। हर उत्सव के साथ जुड़ी हुई लोक रस्म जन…

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चिंतन अन्तर्मुखी भले रहें अन्तर्दुखी न रहें

अन्तर्मुखी भले रहें अन्तर्दुखी न रहें

डॉ. दीपक आचार्य लोग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। अन्तर्मुखी और बहिर्मुखी। बहिर्मुखी लोगों के दिल और दिमाग की खिड़कियाँ बाहर की…

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विविधा Default Post Thumbnail

लोक से दूर होती संस्कृति

प्रमोद भार्गव ृ एक नवंबर को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकारों ने अपना – अपना स्थापना दिवस सिनामार्इ सितारों के साथ वैभव का प्रदर्शन…

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राजनीति साख बचाने की छटपटाहट-अरविंद जयतिलक

साख बचाने की छटपटाहट-अरविंद जयतिलक

आरोपों के चक्रव्यूह से निकलने की कशमकश के बीच दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की महारैली उसकी भविश्य की चिंताओं और चुनौतियों का…

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खान-पान मिलावटखोरी खत्म करने के क्या हों उपाय

मिलावटखोरी खत्म करने के क्या हों उपाय

निर्मल रानी इन दिनों देश का आम आदमी लगातार बढ़ती जा रही महंगाई से जहां बदहाल है वहीं उस के द्वारा दुकानदार द्वारा मांगी गई…

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राजनीति सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मंत्रद्रष्टा

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मंत्रद्रष्टा

 भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष श्री लालकृष्ण आडवाणी के 85 वें जन्‍म दिवस पर विशेष ‘माई कंट्री माइ लाइफ’ बस नाम ही काफी है लेखक के…

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विविधा पाठ्य पुस्तकें- अनुवाद या मौलिक लेखन

पाठ्य पुस्तकें- अनुवाद या मौलिक लेखन

प्रो.बृजकिशोर कुठियाला जिस दिन भारत स्वतंत्र हुआ उसी दिन महात्मा गांधी ने बी.बी.सी. लंदन को दिये एक संदेश में कहा था ‘‘अंग्रेजी मुल्क से बड़ी…

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राजनीति व्यवस्था परिवर्तन अर्थात.. ?

व्यवस्था परिवर्तन अर्थात.. ?

विजय कुमार इन दिनों जिधर देखो व्यवस्था परिवर्तन का शोर है। हर कोई इसका झंडा लिये दूसरों को गरिया रहा है। राहुल बाबा इस मैदान…

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विविधा मिलावटखोरी खत्म करने के क्या हों उपाय

मिलावटखोरी खत्म करने के क्या हों उपाय

निर्मल रानी इन दिनों देश का आम आदमी लगातार बढ़ती जा रही महंगाई से जहां बदहाल है वहीं उस के द्वारा दुकानदार द्वारा मांगी गई…

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विविधा अनर्गल बयानबाजी का कड़वा सच?

अनर्गल बयानबाजी का कड़वा सच?

कोई पुरानी पत्नी को मजा रहित बतलाये या कोई किसी की पत्नी को पचास करोड़ गर्लफ्रेंड कहे| चाहे कोई किसी को बन्दर कहे! चाहे कोई राम…

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