विकासशील देश और सांस्कृतिक साम्राज्यवाद
Updated: December 10, 2012
राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’ साम्राज्यवाद (Imperialism) वह दृष्टिकोण है जिसके अनुसार कोई महत्त्वाकांक्षी राष्ट्र अपनी शक्ति और गौरव को बढ़ाने के लिए अन्य देशों के प्राकृतिक…
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बिहार की विकास गाथा का एक पहलू यह भी…..
Updated: December 10, 2012
तनवीर जाफ़री पूरे देश में इस समय धूम मची हुई है कि देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार प्रगति के पथ पर तेज़ी से…
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सन्देह के घेरे में अरविन्द केजरीवाल
Updated: December 10, 2012
विपिन किशोर सिन्हा दिनांक ६ दिसंबर को अन्ना हजारे जी ने अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध जो वक्तव्य दिया उससे अरविन्द केजरीवाल की निष्ठा सन्दिग्ध हुई…
Read moreमैं … शीर्षकहीन !
Updated: December 10, 2012
विजय निकोर तुम ! तुम्हारा आना था मेरे लिए जीवनदायी सूर्य का उदित होना, और तुम्हारा चले जाना था मेरे यौवन के वसंतोत्सव में एक…
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प्यार है लाज़िमी ज़िंदगी के लिये…..
Updated: December 10, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी तुमने उनको चुना रहबरी के लिये, वो जो मशहूर हैं रहज़नी के लिये। सिर्फ जज़्बातो ताक़त ही काफी नहीं, हौंसला चाहिये दुश्मनी…
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सम्प्रेषण और भंगिमाएं
Updated: December 10, 2012
सम्प्रेषण और भंगिमाएं दोनों की सीमाओं पर सतत निरंतर आँखों का सदा ही बना रहना और पता चल जानें से लेकर प्रकट हो जानें तक…
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येदि के बिना भी भाजपा लगाएगी सीटो की शतक
Updated: December 10, 2012
संजय swadesh राजनीति के समझदार कह रहे हैं कि येदियुरप्पा के भाजपा से जाने के बाद पार्टी को करारा झटका मिलेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ…
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मॅक्स मूलर का पत्र और संस्कृत की प्रेरणा -डॉ. मधुसूदन
Updated: December 11, 2012
मॅक्स मूलर ने, I C S ( Indian Civil Service) की परीक्षा के हेतु तैय्यार होने वाले युवाओं के सामने १८८० के आस पास, केम्ब्रिज…
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एफडीआई के दूरगामी परिणाम बेहद घातक
Updated: December 8, 2012
बीपी गौतम विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफडीआई) देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन आम आदमी एफडीआई के बारे में इतना सब…
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कविता – उम्र का हिसाब
Updated: December 8, 2012
कितने बदल चुके हैं सिकुड़े हुए अंतरिक्ष में मौन तिलक लगाकर मेहराब से टूटता कोई पत्थर कि युगों पुराना अदृश्य हाथ पसीने से सरोबार होकर…
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जो कह चूका गीत उसे भी न भूल जाओ
Updated: December 8, 2012
तुम्हे मेरे सपनो में अब भी देखा करता हूँ कभी भी यहाँ वहाँ पहले की ही तरह अब भी भटका करता हूँ .. नहीं होते…
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लाखो घर बर्बाद हो गये इस दहेज़ की बोली में ,
Updated: December 8, 2012
लाखो घर बर्बाद हो गये इस दहेज़ की बोली में , अर्थी चड़ी बहुत कन्याये बैठ न पाई डोली में , कितनो ने अपनी कन्यायो…
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