विविधा संघ दर्शन की तरह है सुदर्शन जी का व्यक्तित्व

संघ दर्शन की तरह है सुदर्शन जी का व्यक्तित्व

प्रवीण दुबे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अगर समझना है तो पूर्व सरसंघचालक श्री कुप्प. सी. सुदर्शन के व्यक्तित्व और कृतित्व का अध्ययन कीजिए, उनके जीवन…

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विविधा कुप्प्. सी. सुदर्शन : एक सच्चे राष्ट्रिय नेता

कुप्प्. सी. सुदर्शन : एक सच्चे राष्ट्रिय नेता

नेपाल से एक मैथिली भक्त प्रवीण कुमार चौधरी के फेसबुक पर दी गयी श्रद्धांजलि “Deep Condolance! “मैथिलिके अष्टम अनुसूचीमे नाम दियौनिहार के सी सुदर्शन अमर छथि.…

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विविधा नवीन सोच के धनी : श्री कुप्.सी. सुदर्शन

नवीन सोच के धनी : श्री कुप्.सी. सुदर्शन

विजय कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवें सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन मूलतः तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर बसे कुप्पहल्ली (मैसूर) ग्राम के निवासी थे।…

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विविधा सुदर्शन जी का होना, जाना और बार-बार आना

सुदर्शन जी का होना, जाना और बार-बार आना

अनिल सौमित्र 81 वर्ष की उम्र में भी बच्चों के बीच बाल-सुलभ व्यवहार। सुबह और सायं काल दोनों वक्त शाखा जाने का स्वयं का आग्रह।…

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व्यंग्य हिंदी बनाम अंग्रेज़ी…..

हिंदी बनाम अंग्रेज़ी…..

इक़बाल हिंदुस्तानी हिंदीवाले सीधेसादे भोलेभाले, अंग्रेज़ीवाले रौब मारते बैठेठाले।   राष्ट्रभाषा की करते हैं उपेक्षा, विदेशीभाषा से रखते हैं अपेक्षा।   साल में एक दिन…

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चिंतन हम धार्मिक हैं कहां, धर्म का केवल ढोंग ही तो करते हैं!

हम धार्मिक हैं कहां, धर्म का केवल ढोंग ही तो करते हैं!

इक़बाल हिंदुस्तानी भगवान का डर होता तो क्या उसके बताये रास्ते पर नहीं चलते? तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने हम भारतीयों पर बड़ा सामयिक सवाल…

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विविधा कमज़ोर नहीं है हिन्दी

कमज़ोर नहीं है हिन्दी

राघवेन्द्र कुमार ”राघव” हर बार की तरह इस बार भी १४ सितम्बर हिन्दी की याद दिला गया | हिन्दी का विकास हो रहा है ,…

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समाज क्या युवा-प्रेम, सच में प्रेम है?

क्या युवा-प्रेम, सच में प्रेम है?

 पियुष द्विवेदी ‘भारत’ मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि वो एक लड़की से बहुत प्यार करता है! उसके बिना नही रह सकता! तब मैंने…

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राजनीति अनूप की वापसी और उससे जुड़े गुणा-लाभ

अनूप की वापसी और उससे जुड़े गुणा-लाभ

सिद्धार्थ शंकर गौतम वरिष्ठ भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा की शिवराज मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित वापसी आखिरकार हो ही गई| शुक्रवार को राजभवन में…

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राजनीति चाबुक पर चाबुक…

चाबुक पर चाबुक…

कुलदीप सिंह राघव केंद्र सरकार जनता पर अपना खूब चाबुक चला रही है। बेचारी जनता जब तक पहले चाबुक के जख्म को भर पाती है…

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राजनीति वर्तमान राजनीतिक तंत्र आपातकाल से भी ज्यादा खौफनाक है

वर्तमान राजनीतिक तंत्र आपातकाल से भी ज्यादा खौफनाक है

लालकृष्ण आडवाणी पिछले साठ वर्षों से भारत स्वतंत्र है। नागरिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के संदर्भ में, मैं आपातकाल की अवधि 1975-77…

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विविधा हिंदी का सफ़र: अर्श से फर्श तक ….

हिंदी का सफ़र: अर्श से फर्श तक ….

प्रशांत राय हिंदी हमारी राज भाषा होने के साथ साथ विश्व की चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है | यह विश्व के लगभग ३०…

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