हिन्दी की दशा या दुर्दषा
Updated: September 13, 2012
बलबीर राणा “भैजी” राष्ट्रभाषा अपनी क्षीणतर हो चली हिन्दी का हिंग्लिस बन खिंचडी बन चली अपनो के ही ठोकर से अपने ही घर में पराई…
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कर्मधारा में स्पीड ब्रेकर न बनें
Updated: September 13, 2012
कर्मधारा में स्पीड ब्रेकर न बनें खुद करें या औरों को करने दें डॉ. दीपक आचार्य आजकल कर्मयोग की धाराएं प्रदूषित होती जा रही हैं।…
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राहुल गांधी डर रहे हैं बंद मुट्ठी खुलने से
Updated: September 13, 2012
तेजवानी गिरधर अब तक तो भारत के लोग और यहां का मीडिया ही समझ रहा था कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी असमंजस में हैं,…
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अपाहिज के पदक की उपेक्षा क्यों…
Updated: September 12, 2012
कुलदीप सिंह राघव बीते महीने लंदन ओलंपिक में भारत ने पहली बार छह पदक जीतकर इतिहास रच दिया। भारत के खाते में दो रजत और…
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भ्रष्टाचार,सांप्रदायिकता व धर्मनिरपेक्षता के मध्य होगा ‘घमासान 2014 ‘
Updated: September 12, 2012
तनवीर जाफ़री पूरी दुनिया में भारतवर्ष की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में बनी हुई है। भारतीय संविधान भी धर्मनिरपेक्षता का पूरी तरह पक्षधर…
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घटिया कार्टून बना कर भगत सिंह हो गया असीम त्रिवेदी?
Updated: September 12, 2012
तेजवानी गिरधर कैसी विडंबना है कि देशभक्ति की मौजूदा लहर में एक कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश के राष्ट्रीय प्रतीक…
Read moreघुसपैठिए और भारतीय सेकुलर
Updated: September 12, 2012
सारे सेकुलर चुप बैठे हैं, देश जल रहा जलने दो। बंग्लादेशी वोटर अपने, असम मे इनको रहने दो॥ अरबों की आबादी अपनी, उसपर भी …
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क्या ऐसे ही हैं राहुल..?
Updated: September 12, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम ऐसा प्रतीत होता है मानो विदेशी मीडिया ने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े कद्दावर नेताओं के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है| प्रधानमंत्री…
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कृष्णा भारत विभाजन की खुशी में बनें मीनारे पाकिस्तान पर क्यों गए?
Updated: September 21, 2012
प्रवीण गुगनानी विदेशमंत्री बताएं पाकिस्तान को लेकर देश की आशंकाओं का क्या जवाब मिला? आडवाणी,जसवंत को कोसने वालें अब क्यों चुप हैं? पाकिस्तानी विदेशमंत्री हिना…
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प्रजातंत्र की प्राणशक्ति के बचाव के लिए / मा. गो. वैद्य
Updated: September 12, 2012
राम बहादुर राय एक निर्भीक एवं निर्भय पत्रकार है. जयपुर से प्रकाशित होने वाले ‘पाथेय कण’ पाक्षिक के १ अगस्त के अंक में उनका एक…
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सामाजिक चिन्ताओं से बेखबर है एफएम रेडियो
Updated: September 12, 2012
आदित्य कुमार गिरि मीडिया के विकासमूलक चरित्र की सारी परिकल्पनाएं अब झूठी साबित हो रही हैं।जिन मूल्यों की स्थापना और जैसे मूल्यों के विरोध की…
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व्यंग्य बाण: हिन्दी ओढ़ें, देवनागरी बिछाएं
Updated: September 11, 2012
विजय कुमार पिछले दिनों किसी काम से शर्मा जी के घर गया, तो उनकी मेज पर चिट्ठियों और निमन्त्रण पत्रों का ढेर लगा था। उन्होंने…
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