पर्यावरण प्रशासन के समक्ष चुनौती बनती वर्षा ऋतु

प्रशासन के समक्ष चुनौती बनती वर्षा ऋतु

निर्मल रानी जब सूर्यदेवता ग्रीष्म ऋतु में अपने प्रचंड तेवर दिखाते हैं उस समय जनता उनके इस प्रकोप से त्राहि- त्राहि करने लग जाती है।…

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प्रवक्ता न्यूज़ नरेंद्र मोदी के समर्थन में संजय पासवान ने की ‘भाजपा मित्र मंडल’ का गठन

नरेंद्र मोदी के समर्थन में संजय पासवान ने की ‘भाजपा मित्र मंडल’ का गठन

नई दिल्ली, एनडीए सरकार में कभी केन्द्रीय मंत्री रहे संजय पासवान, आजकल नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाने के अभियान में लगे हैं।…

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विविधा भारत में विश्व जनसँख्या दिवस के मायने

भारत में विश्व जनसँख्या दिवस के मायने

  राजीव गुप्ता गत वर्ष 31 अक्टूबर 2011 को गैर सरकारी संस्थाओ के अनुसार भारत में 7 अरबवें बच्चे के जन्म के साथ विश्व की…

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गजल कुछ हादसों के बीच में पलता रहा हूं मैं…..

कुछ हादसों के बीच में पलता रहा हूं मैं…..

-इक़बाल हिंदुस्तानी बुज़दिल नहीं हूं मौत से लड़ता रहा हूं मैं, कुछ हादसों के बीच में पलता रहा हूं मैं।   उनका तो मक़बरा भी…

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आर्थिकी तिजोरियां बनीं कालाधन लुभाने की नर्इ तरकीब

तिजोरियां बनीं कालाधन लुभाने की नर्इ तरकीब

प्रमोद भार्गव चूंकि स्विट्ज़रलैंड की अर्थ व्यवस्था देश में जमा कालाधन से चलती है, इसलिए उसके लिए जरूरी है कि वह ऐसे नए कानूनी प्रावधान…

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कविता कविता:वर्षा रानी

कविता:वर्षा रानी

डा. ए. डी.खत्री वर्षा रानी काले काले बदल आये लगता हैं जल लेकर आये धरती प्यासी , लोग हैं प्यासे कब से बैठे आस लगाये…

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विविधा एनजीओ पर नकेल क्यों और कैसे? / -राजेश कश्यप

एनजीओ पर नकेल क्यों और कैसे? / -राजेश कश्यप

देश में एनजीओ (गैर सरकारी संगठन) का मकड़जाल चरम पर पहुंच चुका है। इन एनजीओ की प्रकृति परजीवी अमरबेल की तरह हो चुकी है, जो…

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कला-संस्कृति मगध के पुरावशेषों में बस्तर की तलाश!!

मगध के पुरावशेषों में बस्तर की तलाश!!

 राजीव रंजन प्रसाद राजीवजी कई गुणों के समुच्‍चय हैं। रंगकर्मी। नाटककार। कवि। उपन्‍यासकार। और सबसे बढ़कर एक जिंदादिल इंसान। पिछले दिनों उनका नाम चर्चा में…

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कहानी खतना

खतना

आर. सिंह  “अबे रूक. ” कर्कश आवाज इतनी जोर से आयी थी कि उसे रूकना पड़ा. ऐसे वह जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता था.…

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समाज दलित मुस्लिम-दलित ईसाई? – मा.गो. वैद्य

दलित मुस्लिम-दलित ईसाई? – मा.गो. वैद्य

गत सप्ताह, दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘ऑर्गनायजर’ इस अंग्रेजी साप्ताहिक में ‘Who is Secular? And what is Secular’ इस शीर्षक का मेरा लेख प्रकाशित…

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आर्थिकी आर्थिक तरक्‍की के लिए हिंदू अर्थशास्‍त्र अपनाना होगा

आर्थिक तरक्‍की के लिए हिंदू अर्थशास्‍त्र अपनाना होगा

वर्ल्ड हिन्दू इकानोमिक फ़ोरम में दोहनकारी वृति की बजाय आर्थिक शुचिता सम्पन्न नये विश्व व्यापी व्यापारिक ढांचा बनाए जाने पर बल विनोद बंसल  होंगकोंग जुलाई 1,…

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विविधा लेखन के बहुआयामी आयाम

लेखन के बहुआयामी आयाम

राखी रघुवंशी ” अब्बा थैंक्यू, आपने मुझे इस लेखन कार्यशाला में आने दिया। यह बात भोपाल की तंग गलियों में बने एक मदरसे में लेखन…

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