आदिवासी संस्कृति को संजोते 70 वर्षीय शिव सिंह आंचला
Updated: December 19, 2012
देवलाल नरेटी भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में एक है जहां आज भी आदिकाल की संस्कृति की झलक न सिर्फ जिंदा है बल्कि उसका…
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कब आएगी सुनहरी सुबह?
Updated: December 19, 2012
मृदु भाषनी हर सुबह के बाद एक रात आती है। और हर रात के बाद सुबह आती है। मगर कुछ बदकिस्मत ऐसे भी हैं, जिन्हें…
Read moreप्रादेशिक पार्टिंयों का सामर्थ्य और राष्ट्रीय एकात्मता
Updated: December 19, 2012
मा. गो. वैद्य ‘लोकमत’के संपादक, मेरे मित्र, श्री सुरेश द्वादशीवार ने ‘प्रादेशिक पार्टिंयों का सामर्थ्य राष्ट्रीय एकात्मता के लिए प्रश्नचिह्न साबित होगा?’ ऐसा प्रश्न चर्चा…
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बड़ा दिन यानी भीष्म पितामह का निर्वाण पर्व
Updated: December 19, 2012
महाभारत का युद्घ संसार का प्राचीन काल का विश्व युद्घ था। इस युद्घ को कुछ लोगों ने भारतीय इतिहास को अंधकारमयी सिद्घ करने के लिए…
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पदोन्नति में आरक्षण
Updated: December 19, 2012
विपिन किशोर सिन्हा कोई भी व्यक्ति या संस्था अगर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना करती है, तो पूरे देश में एकसाथ बवाल मच जाता है, लेकिन…
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मजबूत बैंकिंग व्यवस्था के बिना नकद सब्सिडी योजना संभव नहीं
Updated: December 18, 2012
सतीश सिंह सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को खत्म करके नकद सब्सिडी योजना को लागू करना चाहती है। इस योजना के तहत सरकार गरीबी रेखा…
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जापानी भाषा कैसे सक्षम बनी ?–डॉ. मधुसूदन
Updated: December 18, 2012
ॐ –जापानी भाषा कैसे विकसी ? ॐ –जापान को देवनागरी की सहायता. ॐ —जापानी, हमारी भाषा से कमज़ोर थी. ॐ —अनुवाद करो या बरखास्त हो…
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भ्रष्टाचारी पति की पत्नी को भी मिली सजा
Updated: December 18, 2012
सीबीआई विशेष न्यायालय का अनूठा फैसला प्रमोद भार्गव दिल्ली की सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में अनूठा फैसला सुनाकर दण्ड का भय कायम करने…
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कठघरे में सीबीआई की साख
Updated: December 18, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में शुमार सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन अर्थात सीबीआई का प्रयोग राजनीतिक हित साधने और विरोधियों को औकात…
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कहां जांयें हम
Updated: December 15, 2012
भालू चीता शेर सियार सब, रहने आये शहर में| बोले’अब तो सभी रहेंगे, यहीं आपके घर में|’ तरुवर सारे काट लिये हैं , नहीं…
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पुसंवाद को कितना डिस्टर्ब करता है स्त्रीवादी सोच – सारदा बनर्जी
Updated: December 17, 2012
क्या वजह है कि कोई स्त्री लेखिका जब पितृसत्ताक समाज के पुंसवादी रवैये की आलोचना करती हैं तो उन्हें पुरुषों की कटुक्ति का सामना करना…
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मेरी दृष्टि में ‘शांतिनिकेतन’ – सारदा बनर्जी
Updated: December 17, 2012
यदि रवीन्द्रनाथ को जानना, समझना और अनुभव करना हो तो ‘शांतिनिकेतन’ सबसे उत्तम स्थान है। रवीन्द्रनाथ जिस विश्व-शांति का उद्घोष शांतिनिकेतन की प्रतिष्ठा द्वारा करना…
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