राजनीति विकास बिहार का : कितनी हक़ीक़त कितना फ़साना

विकास बिहार का : कितनी हक़ीक़त कितना फ़साना

निर्मल रानी कल तक देश का सबसे $गरीब व पिछड़ा राज्य कहा जाने वाला बिहार इन दिनों अपने विकास व प्रगति के लिए चर्चा में…

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आलोचना जनसत्ता का प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम और के. विक्रम राव का सफेद झूठ / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जनसत्ता का प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम और के. विक्रम राव का सफेद झूठ / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जनसत्ता अपनी प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम में एक कदम आगे बढ़ गया है. उसने के.विक्रम राव का जनसत्ता के 13मई 2012 के अंक में…

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आर्थिकी तीन साल के जश्न का यह सिला दिया सरकार ने जनता को

तीन साल के जश्न का यह सिला दिया सरकार ने जनता को

सिद्धार्थ शंकर गौतम जैसा अंदेशा था आखिरकार वही हुआ| डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये की वजह से पेट्रोलियम कंपनियों ने आम आदमी की जेब को…

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कविता कविता:अन्यथा शब्दोँ के लिए चिँता-मोतीलाल

कविता:अन्यथा शब्दोँ के लिए चिँता-मोतीलाल

जहाँ कहीँ भी होगा उठती अंतस से हूक अवसाद के चक्रवात मेँ रेखांकित नहीँ उसका वजूद   गौर से यदि देखेँ मुखर होने की उनकी…

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चिंतन धार्मिकता का ढोंग है सबसे बड़ा अधर्म

धार्मिकता का ढोंग है सबसे बड़ा अधर्म

 डॉ. दीपक आचार्य धार्मिक होना अच्छी बात है लेकिन धार्मिकता का ढोंग पाल कर जमाने को भ्रमित करते रहना अपने आप में सबसे बड़ा अधर्म…

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आर्थिकी जनता पर तेल की मार

जनता पर तेल की मार

राजीव गुप्ता महंगाई की मार से जूझ रही जनता पर इस बार यूं.पी.ए. – 2 की अब तक की सबसे बड़ी मार पड़ी है !…

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राजनीति मनमोहन प्रेम का अंत

मनमोहन प्रेम का अंत

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी मनमोहन सरकार का आम जनता के साथ अन्तर्विरोध प्रखर हो गया है। जिन लोगों ने यह सपना देखा था कि नव्य आर्थिक नीतियां…

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सिनेमा रेशमी ख़्वाबों के ख़ूबसूरत लम्हे…

रेशमी ख़्वाबों के ख़ूबसूरत लम्हे…

फ़िरदौस ख़ान हम हफ़्ते में एक दिन अपनी पसंद की फ़िल्म ज़रूर देखते हैं…पिछले हफ़्ते फ़िल्म ‘कभी-कभी’ देखी. 27 फ़रवरी, 1976 को प्रदर्शित इस फ़िल्म…

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कविता रघुनाथ सिंह की कविता / कैसा है यह राष्ट्र हमारा

रघुनाथ सिंह की कविता / कैसा है यह राष्ट्र हमारा

कैसा है यह राष्ट्र हमारा हो रही हैं भ्रूण हत्याएं आई है जब से मशीन जो बता देती है निस्सहाय भ्रूण का लिंग और फिर…

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कविता कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल

कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल

मोतीलाल जहाँ कहीँ भी होगा उठती अंतस से हूक अवसाद के चक्रवात मेँ रेखांकित नहीँ उसका वजूद   गौर से यदि देखेँ मुखर होने की…

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चिंतन बेवजह शत्रुता का मतलब है पूर्वजन्म का प्रतिशोध

बेवजह शत्रुता का मतलब है पूर्वजन्म का प्रतिशोध

 डॉ. दीपक आचार्य दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसके कोई मित्र या शत्रु न हों। व्यक्ति के जन्म के साथ ही राग-द्वेष के…

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समाज कार्टून विवादः बुध्दिजीवियों को ही समाज की सोच बदलनी होगी !

कार्टून विवादः बुध्दिजीवियों को ही समाज की सोच बदलनी होगी !

इक़बाल हिंदुस्तानी वोटबैंक की राजनीति का शिकार राजनेताओं से उम्मीद बेकार! एनसीईआरटी की किताबों मे बाबासाहब अंबेडकर के कार्टून को लेकर शुरू हुआ विवाद अब…

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