राजनीति क्यो मुँह छुपा रही सपा, बसपा निकाय चुनाव से

क्यो मुँह छुपा रही सपा, बसपा निकाय चुनाव से

शादाब जफर‘‘शादाब’’ करीब छः माह से राजनीतिक दावपेंच और कानूनी लडाई के शिकार उत्तर प्रदेश निकाय चुनावो की घोषणा अतंतः 25 मई को हो ही…

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कार्टून कार्टून: मनमोहन सिंह– गोपाल गोयल

कार्टून: मनमोहन सिंह– गोपाल गोयल

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चिंतन जहाँ काँटे वहाँ कलह-कुटिलता जहाँ हरियाली वहाँ प्रेम-सुगंध

जहाँ काँटे वहाँ कलह-कुटिलता जहाँ हरियाली वहाँ प्रेम-सुगंध

डॉ. दीपक आचार्य परिवेश का व्यक्ति और समुदाय पर खूब फर्क पड़ता है। परिवेश की हवाएँ और स्थितियाँ हर किसी को प्रभावित करती रहती हैं।…

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राजनीति नपुंसक विरोध

नपुंसक विरोध

श्यामल सुमन केन्द्र सरकार का तुगलकी – फरमान एकाएक २३-०५-२०१२ को पेट्रोल की कीमत ७-५४ रुपये पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गयी। देश के हर…

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आर्थिकी भारतीय चिकित्सा क्षेत्र को कलंकित करते यह ‘धन लोभी’

भारतीय चिकित्सा क्षेत्र को कलंकित करते यह ‘धन लोभी’

निर्मल रानी टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाले तमाम टीवी सीरियल व रियलिटी शो किसी न किसी कारणवश लोकप्रियता की अपनी तमाम हदों को पार कर…

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राजनीति ओम थानवी और माध्यम निरक्षरता

ओम थानवी और माध्यम निरक्षरता

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी ओम थानवी साहब बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। मैं कभी उनसे नहीं मिला हूँ। लेकिन उनके लिखे को इज्जत के साथ पढ़ता रहा हूँ।…

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परिचर्चा परिचर्चा : ‘वैचारिक छुआछूत’

परिचर्चा : ‘वैचारिक छुआछूत’

भारत नीति प्रतिष्ठान एक शोध संस्‍थान है। इसके मानद निदेशक हैं दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में प्राध्‍यापक श्री राकेश सिन्‍हा। श्री सिन्‍हा राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े…

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महत्वपूर्ण लेख कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-३

कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-३

विपिन किशोर सिन्हा कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और विफलता-१ कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२ परिवार के संबंध में भी कम्यून्स का प्रयोग प्रत्येक कम्युनिस्ट…

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चिंतन कर्त्तव्य कर्म हो सर्वोपरि यही सँवारता है व्यक्तित्व

कर्त्तव्य कर्म हो सर्वोपरि यही सँवारता है व्यक्तित्व

डॉ. दीपक आचार्य हर आदमी के लिए विधाता ने मनुष्यता का आवरण देकर अपने कर्त्तव्य कर्म को पूर्ण करने के लिए धरा पर भेजा हुआ…

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गजल गजल:आप हम से मिले जिंदगी की तरह-इक़बाल हिंदुस्तानी

गजल:आप हम से मिले जिंदगी की तरह-इक़बाल हिंदुस्तानी

खिल उठी जिंदगी फिर कली की तरह, आप हम से मिले जिंदगी की तरह।   जब उसे पा लिया हम ने चाहा जिसे, ग़म भी…

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व्यंग्य मजे मूर्ख बने रहने के

मजे मूर्ख बने रहने के

मूर्ख होना हमारा ज्न्म सिद्ध अधिकार है और जो लोग इस अधिकार से वाकिफ हैं वे जन्म से ही मूर्ख होते हैं|खुदा की मार से…

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कार्टून कार्टून: राजनीति– गोपाल गोयल

कार्टून: राजनीति– गोपाल गोयल

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