…एक थी कांग्रेस!
Updated: March 16, 2012
जगमोहन फुटेला बिहार और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के थे भी नही. मध्य प्रदेश हाथ से गए भी ज़माना हुआ. पंजाब का राज महाराजा साहब की…
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शब्द साहित्य एवं भावों का समागम है “कभी सोचा है” कविता संग्रह
Updated: March 15, 2012
शिवानन्द द्विवेदी “सहर” मन बड़ा प्रफुल्लित होता है जब किसी नए साहित्य को पढ़ने का अवसर प्राप्त होता है ! ६ मार्च की शाम जैसे…
Read moreहार का सटीक विश्लेषण करे कांग्रेस
Updated: March 15, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस की संगठनात्मक क्षमताओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पंजाब तथा गोवा में जहां कांग्रेस…
Read moreसरकारी बैंकों के बढ़ते एनपीए की जमीनी हकीकत
Updated: March 15, 2012
सतीश सिंह वार्षिक लेखाबंदी के निकट आते ही खासकर के मार्च के महीने में सरकारी बैंकों में गैर निष्पादित परिसंपतित (एनपीए) के स्तर को कम…
Read moreनिजी क्षेत्र बनाम सूचना का अधिकार
Updated: March 15, 2012
सतीश सिंह बिहार की राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में हाल ही में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का…
Read moreतीसरे मोर्चे का राष्ट्रीय विकल्प
Updated: March 15, 2012
प्रमोद भार्गव पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की पृष्ठभूमि में तीसरे मोर्चे की आहट सुनार्इ देने लगी है। अखिलेश यादव के उत्तर-प्रदेश के…
Read moreपांच राज्यों के चुनाव परिणामों के निहितार्थ
Updated: March 14, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम आमचुनाव २०१४ की प्रयोगशाला माने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने कहीं न कहीं क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय राजनीति…
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मायावती को मीडिया व मुस्लिम नहीं बल्कि भ्रष्टाचार व अहंकार ले डूबा
Updated: March 14, 2012
निर्मल रानी देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आ जाने के पश्चात इन परिणामों का विश्लेषण व समीक्षा जारी है। एक…
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न राष्ट्रवाद, न ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ यूपी ने चुना समाजवाद
Updated: March 14, 2012
तनवीर जाफरी उत्तरप्रदेश के मतदाताओं ने चुनावी पंडितों के सभी पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए प्रदेश में पूर्ण बहुमत से समाजवादी पार्टी की सरकार को चुन…
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इस चुनाव से टूटे कई मिथक
Updated: March 14, 2012
– सुनील अमर – देश की लोकतांत्रिक राजनीति में व्यक्ति से लेकर जाति और धर्म तक के कई मिथक पहले चुनाव से ही गढ़ लिये…
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कांग्रेस को नेता नहीं नीति बदलने की ज़रूरत है!
Updated: March 13, 2012
-इक़बाल हिंदुस्तानी भाजपा एजेंडा बदले बिना एनडीए को फिर नहीं जोड़ पायेगी? प्रवक्ता डॉटकाम पर चुनाव के दौरान हमने जब यह लिखा था कि भाजपा…
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जो जीत को हार में बदल दे उसे कांग्रेस कहते हैं!
Updated: March 13, 2012
जगमोहन फुटेला. चुनाव और उस में हार जीत हो जाने के बाद समीक्षक हो जाना बहुत आसान होता है. जो जीते उसके लिए डींगें हांकना…
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