प्रवक्ता न्यूज़ लोक कला महोत्सव

लोक कला महोत्सव

प्रमोद कुमार बर्णवाल लोक विधाओं के महत्व का अभिज्ञान इसलिए आवश्यक है क्योंकि लोक-साहित्य लोकजीवन का अभिलेखागार है। किन्तु यह विडम्बना ही कही जायगी कि…

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लेख सीबीआई की तरह ‘अच्छा बच्चा’ नहीं है कैग

सीबीआई की तरह ‘अच्छा बच्चा’ नहीं है कैग

संजय द्विवेदी राजसत्ता का एक खास चरित्र होता है कि वह असहमतियों को बर्दाश्त नहीं कर सकती। हमने इस पैंसठ सालों में जैसा लोकतंत्र विकसित…

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लेख आम आदमी की हड्डी पर कबड्डी क्यों ?

आम आदमी की हड्डी पर कबड्डी क्यों ?

राजीव गुप्ता दिल्ली की सडको पर भीख मांगने वाले सभी लोग उत्तर प्रदेश के है , यह कहना है कांग्रेस पार्टी के तथाकथित युवराज राहुल…

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लेख समृद्धि की चकाचौंध और अविकास का कोहरा

समृद्धि की चकाचौंध और अविकास का कोहरा

हिमकर श्याम समृद्धि की चकाचौंध और अविकास का कोहरा भारत की कड़वी सच्चाई है। किसी देश के आर्थिक विकास की गणना जीडीपी और प्रतिव्यक्ति आय…

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व्यंग्य अब शरद को चांटा

अब शरद को चांटा

एल.आर.गाँधी भ्रष्ट तंत्र से त्रस्त हरविंदर सिंह ने महंगाई के प्रतीक केंट्रीय खाद्य मंत्री के टेढ़े मुंह पर सपाट चांटा जड़ दिया. शनिवार को हरविंदर…

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लेख सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली हिमाचल में

सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली हिमाचल में

प्रो. धूमल ने ढाई वर्ष के अपने कार्यकाल में राज्य की उपलब्धियों में विभिन्न क्षेत्रों में मील के पत्थर स्थापित किए हैं। इस दौरान सभी…

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महत्वपूर्ण लेख बिरथ आडवाणी की बेबसी !

बिरथ आडवाणी की बेबसी !

यात्री के हौसलों को सलाम कीजिए  संजय द्विवेदी जिस आयु में लोग डाक्टरों की सलाहों और अस्पताल की निगरानी में ज्यादा वक्त काटना चाहते हैं,…

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व्यंग्य जानकारी की आशा और सरकारी भाषा

जानकारी की आशा और सरकारी भाषा

राम कुमार विद्यार्थी अजी सरकार तो सरकार ही है उसका जनता को जानकारी देना और लेना एक ही हाँथ से होता है ,अब देखो जरा…

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लेख काटजू को न कोसो, जांच बिठा लो!

काटजू को न कोसो, जांच बिठा लो!

जगमोहन फुटेला दुनिया को गलत, सही का फर्क समझाने वालो ज़रा खुद के भीतर झांको और देखो कि पत्रकारिता कितनी गंदली हुई पड़ी है. पत्रकारिता…

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लेख बच पायेगा हिमालय का ग्लेशियर ?

बच पायेगा हिमालय का ग्लेशियर ?

अशोक बजाज ग्लेशियर बचाने भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त मोर्चा वैज्ञानिक रूप से यह बात अब प्रमाणित हो चुकी है कि पर्वतीय क्षेत्रों…

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राजनीति भिखारी भी तुम, लुटेरे भी तुम – ज़रा नहीं किसी से कम

भिखारी भी तुम, लुटेरे भी तुम – ज़रा नहीं किसी से कम

 अविनाश वाचस्परति  वे अपने वोटरों को भिखारी कह रहे हैं। यह जानते हुए भी कि उनका गुजारा वोटरों के वोटों के बिना नहीं होने वाला…

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हिंद स्‍वराज आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता नक्सलवाद ……..

आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता नक्सलवाद ……..

 हर्षवर्धन पान्डे  “हमारे बाप दादा ने जिस समय हमारा घर बनाया था उस समय घर पर सब कुछ ठीक ठाक था … संयुक्त परिवार की…

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