समुद्री जहाजों से उठते सवाल ?
Updated: December 7, 2011
प्रमोद भार्गव देश के पश्चिमी समुद्री तटीय क्षेत्र में समुद्री जहाज संकट के सबब बन रहें हैं। बिना किसी सूचना के भारतीय समुद्री सीमा में…
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कार्यपालिका की निष्क्रियता बनाम न्यायपालिका की सक्रियता
Updated: December 7, 2011
इक़बाल हिंदुस्तानी यह बहस आजकल काफी तेज़ होती जा रही है कि क्या न्यायपालिका जानबूझकर सरकार के नीतिगत मामलों में अवांछित दख़ल दे रही है…
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पंचायती राज प्रशासन में प्रशिक्षण व्यवस्था
Updated: December 7, 2011
डाँ. रमेश प्रसाद द्विवेदी भारत सरकार हो या राज्य सरकार या अन्य कोई भी संगठन हो, आज जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप खरा उतरने की…
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श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-७
Updated: December 7, 2011
विपिन किशोर सिन्हा प्रत्येक मनुष्य, मनुष्य ही नहीं प्रत्येक जीवात्मा में ईश्वर का अंश है। प्रकृति की प्रत्येक कृति ईश्वर की उपस्थिति की अनुभूति कराती…
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आरक्षण की स्थिति और सामाजिक समीक्षा
Updated: December 7, 2011
क्षेत्रपाल शर्मा आज समाज का हर वर्ग नौकरियों में आरक्षण की मांग करता है.इसे एक आसान रास्ते के रूप में वे चाहते हैं. आज आज़ादी मिले…
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सबसे बड़े जातिवादी हैं दिलीप मंडल
Updated: December 7, 2011
शिवा नन्द द्विवेदी “सहर” “ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद (दिलीप मंडल परिभाषित) ही समाज का सबसे बड़ा शत्रु है ” ये मानना है मेरे फेसबुकिया मित्र दिलीप…
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आह आरक्षण! वाह मेरिट!
Updated: December 7, 2011
संजय ग्रोवर क्या हम 20-30 मिनट के लिए उनका गला छोड़ सकते हैं जिन्हें नौकरियों और कुछ दूसरी जगहों पर आरक्षण मिलता है ? मेरा…
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मैं संघ में जा चुका हूँ और सचाई जानता हूँ : डॉ. मीणा
Updated: December 7, 2011
लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ श्री संजीव सिन्हा जी, सम्पादक जी-प्रवक्ता आज 10.08.2011 को एक सज्जन ने प्रवक्ता पर मेरे किसी आलेख/आलेखों को पढकर…
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माओवाद-ममता-महाश्वेता की दोगली राजनीति
Updated: December 7, 2011
जगदीश्वर चतुर्वेदी माओवाद और कारपोरेट मीडिया का रोमैंटिक संबंध है। भारतीय बुर्जुआजी और माओवाद में सतह पर वर्गयुद्ध दिखाई देता है लेकिन व्यवहार में माओवादी…
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कहानी/ चकाचौंध से परे
Updated: December 7, 2011
आर. सिंह “चा ऽ चा ऽ”.यह आवाज कानों में पडते हीं मैं थोडा ठीठका.फिर सोचा यह आवाज यहाँ कहाँ से आ सकती है?यह तो मेरे…
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कविता/ हर कोई अन्ना बने तो भ्रष्ट हर चेहरा मिटेगा..
Updated: December 7, 2011
गिरीश पंकज चल पडी है एक आंधी, अब नया भारत उठेगा सुप्त-सा यह मुल्क सारा, चेतना ले कर बढ़ेगा.. — हमने जो सपने संजोये,…
Read moreदेशवासियों के नाम पैगाम!
Updated: December 7, 2011
हे मेरे देश के बेगाने देशवासियो! लो आज फिर कम्बख्त स्वतंत्रता दिवस आ गया। सभी किसी न किसी ऐब के गुलाम और वाह रे स्वतंत्रता…
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