कविता अन्ना हजारे पर डॉ. ए.डी.खत्री की ५ कुण्डलियाँ

अन्ना हजारे पर डॉ. ए.डी.खत्री की ५ कुण्डलियाँ

गृहमंत्री चिदंबरम नहीं जानते अन्ना का स्थान , ऐसे गृहमंत्री मिले , भारत देश महान . भारत देश महान ,निकम्मे नेता पाए, शांति का सच्चा…

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राजनीति हजारे के साथ कुछ गलत नहीं हुआ !

हजारे के साथ कुछ गलत नहीं हुआ !

असहमति को स्वीकारने का साहस हमारे सत्ताधारियों में कहां है संजय द्विवेदी असहमति को स्वीकारने की विधि हमारे सत्ताधारियों को छः दशकों के हमारे लोकतंत्र…

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विधि-कानून अंगों के व्यापार पर अंकुश का कानून

अंगों के व्यापार पर अंकुश का कानून

प्रमोद भार्गव मानव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त और इसके लिए गरीबों के अमानवीय दोहन के मामलों में भारी जुर्माने तथा कड़ी सजा देने के प्रावधान…

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धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१२

कहो कौन्तेय-१२

विपिन किशोर सिन्हा महाराज धृतराष्ट्र राजकीय कार्यों में सार्वजनिक रूप से महात्मा विदुर की सलाह लेते थे लेकिन अपने व्यक्तिगत कार्यों में कूटनीतिज्ञ कणिक का…

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मीडिया लोकतांत्रिक चेतना का देश है भारतः विजयबहादुर सिंह

लोकतांत्रिक चेतना का देश है भारतः विजयबहादुर सिंह

स्थानीय विविधताएं ही करेंगी पश्चिमी संस्कृति के हमलों का मुकाबला हिंदी साहित्य के प्रख्यात आलोचक एवं विचारक डा.विजयबहादुर सिंह का कहना है कि भारत एक…

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टेक्नोलॉजी भारत में इंटरनेट मौलिक अधिकार बने

भारत में इंटरनेट मौलिक अधिकार बने

भारत में इंटरनेट की शुरूआत 15 अगस्त पर विशेष सरमन नगेले 15 अगस्त को हिन्दुस्तान को आजाद हुये 64 साल होने जा रहे हैं। दिलचस्प…

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विविधा लोकतंत्र का सबसे भयावह और शर्मनाक दौर है यह

लोकतंत्र का सबसे भयावह और शर्मनाक दौर है यह

गिरीश पंकज अपने देश का लोकतंत्र अब धीरे-धीरे छाया-लोकतंत्र में तब्दील होता जा रहा है. मतलब यह कि लोकतंत्र-सा दिख तो रहा है, मगर छाया होने…

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विविधा स्वतंत्रता का अभिप्राय क्या?

स्वतंत्रता का अभिप्राय क्या?

अवधेश पाण्डेय आज एक और स्वतन्त्रता दिवस आ गया है. एक जागरूक इंसान की विभिन्न कार्यक्रमों में उपस्थिति रही होगी. बिना स्वतंत्रता का मतलब समझे…

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विविधा आज़ादी रे आज़ादी तेरा रूप कैसा ?

आज़ादी रे आज़ादी तेरा रूप कैसा ?

राजीव गुप्ता 15 अगस्त 1945 को जापान के आत्मसमर्पण के साथ द्वितीय विश्व युद्ध हिरोशिमा और नागासाकी के त्रासदी के रूप में कलंक लेकर समाप्त…

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विविधा नैतिकता बची नहीं, भलमनसाहत जाती रही

नैतिकता बची नहीं, भलमनसाहत जाती रही

 डॉ. शशि तिवारी कहने को तो स्वतंत्र हुए हम 64 बसंत देख चुके हैं लेकिन जब भी जालिम अंग्रेजों का ख्याल आता है तब-तब अनायास…

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विविधा यह कैसी आजादी?

यह कैसी आजादी?

अरुण कुमार सिंह  भारत को आजाद हुए 64 वर्ष हो चुके हैं। हमें आजादी तो मिली पर एक बड़ा भू-भाग खोकर। पिफर भी भारतीयों ने सारे दुःख-दर्द…

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विविधा आजाद भारत

आजाद भारत

जगत मोहन 15 अगस्त 1947 भूले नहीं भूलता. दिल्ली आजाद होने की खुशियां मना रही थी. वहीं पूरा देश दंगों की आग में झुलस रहा…

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