विविधा बर्बरता की पराकाष्‍ठा

बर्बरता की पराकाष्‍ठा

मृत्‍युंजय दीक्षित योगगुरू बाबा रामदेव के साथ रामलीला मैदान में अनशन और अनशन के समर्थन में बैठे भारत के एक लाख नागरिकों को वहां से…

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विश्ववार्ता क्या भारत सबक लेगा अमेरिका से?

क्या भारत सबक लेगा अमेरिका से?

कुंवर वीरेन्द्र सिंह ”विद्रोही” दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन ‘अलकायदा’ का मुखिया अमेरिका में 9/11 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के मास्टर माइंड…

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राजनीति नए खतरों के संकेत

नए खतरों के संकेत

हरिकृष्ण निगम हाल के कुछ राज्यों की विधानसभा के चुनावों में एक नया, गंभीर और चिंता जनक संकेत केरल और असम में मुस्लिम दलों का…

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राजनीति अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और सरकार

अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और सरकार

आर. सिंह सच पूछिए तो बहुत से तथ्य अब एक साथ उभड कर सामने आ रहे हैं . अन्ना हजारे ने चार अप्रैल को जन्तर मन्तर…

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विविधा व्यंग्य/हो कर मजबूर कदम उसने उठाया होगा

व्यंग्य/हो कर मजबूर कदम उसने उठाया होगा

मनोहर पुरी हमारे पास वास्तव में कोई विकल्प नहीं था? यह वास्तविकता ही थी कोई गल्प नहीं था। जब किसी देश का प्रधान मंत्री यह…

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राजनीति नक्सली हिंसा, उभरते प्रश्न ?

नक्सली हिंसा, उभरते प्रश्न ?

डॉ. मयंक चतुर्वेदी आंध्र, छत्तीसगढ, झारखण्ड, बिहार, पश्चिमबंगाल, महाराष्टन् आदि राज्यों में माओवादी नक्सलियों का हिंसात्मक ताण्डव रूक-रूककर जिस तरह चल रहा है, उसने हमारे…

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कविता गीत/ विजयी निश्‍चय बन जाओगे

गीत/ विजयी निश्‍चय बन जाओगे

कुछ आगजनी, कुछ राहजनी अब दिन में ये होते आएं यदि चमन बचाना है भाई, उल्‍लू न बसेरा कर पाएं कुछ शाखों की कच्‍ची कलियां-…

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पुस्तक समीक्षा समकालीनता की दास्तान ‘मुक्त होती औरत’

समकालीनता की दास्तान ‘मुक्त होती औरत’

समीक्षा-कथा संग्रह-मुक्त होती औरत शीना एन. बी. स्वस्थ सामाजिक जीवन के निर्माण के लिए सुदृढ़ राष्ट्रीय एवं आर्थिक परिस्थितियों की तरह स्वस्थ भावनात्मक तत्वों की…

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कविता कविता/जनता सब जानती है

कविता/जनता सब जानती है

जिसको पुलिस नहीं पहिचाने जिसको न्यायाधीश न जानें चोर लुटेरे भ्रष्टाचारी घूम रहे हैं सीना ताने गफलत में मत रहना ये सबकी रग रग पहिचानती…

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कहानी कहानी/ एक बार फिर

कहानी/ एक बार फिर

राजनारायण बोहरे वे फिर आ गये हैं। आज हर जगह यही सुनने को मिल रहा है। चारों घरों में यही चर्चा हैं। भीतर पहुंचते ही…

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व्यंग्य व्यंग्य/मुश्क़िल

व्यंग्य/मुश्क़िल

संजय ग्रोवर वह एक-एकसे पूछ रहा था। जनता से क्या पूछना था, वह हमेशा से भ्रष्टाचार के खि़लाफ़ थी। विपक्षी दल से पूछा, ‘‘मैंने ही…

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कविता कविता/ पुष्प और इंसान

कविता/ पुष्प और इंसान

पुष्प शोभा है उपवन का. कली का जीवन है प्रस्फुटित होकर, पुष्प बनने में. खिल कर अपनी बहार लुटाने में. तुम बनने कहाँ देते हो…

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