स्वामी विवेकानंद का मानवतावाद
Updated: December 16, 2011
डॉ. मनोज चतुर्वेदी स्वामी विवेकानंद भारतीय चेतना एवं चिंतन के आधार स्तंभ थे। उनका संपूर्ण जीवन मानव जाति के सेवार्थ में व्यतीत हुआ। लेकिन उन्होंने…
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‘यमला पगला दीवाना’ मे हंसी का फव्वारा
Updated: December 16, 2011
डॉ. मनोज चतुर्वेदी एन. आर. आई. सम्मेलन में भारत सरकार ने प्रवासी भारतियों लिए विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया है। अपना देश अपनी माटी तथा अपनी…
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‘नो वन किल्ड जेसिका’ में न्यायिक सड़ांध
Updated: December 16, 2011
डॉ. मनोज चतुर्वेदी यह भारत का दुर्भाग्य हैं कि जिस भारत की दुहायी वेदों, उपनिषदों तथा अन्य भारतीय ग्रंथों में जोश-खरोश के साथ गाया गया…
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नर्मदा कुंभ से समग्र हिंदू समाज शक्तिशाली होगा: सिंघल
Updated: December 16, 2011
जबलपुर, दिनांक 18 जनवरी 2011. अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए हिंदू समाज को विभिन्न जाति, पंथ, भाषा, बिरादरी के नाम पर बांटने वाले राजनैतिक नेता…
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मां नर्मदा सामाजिक कुंभ की तैयारियां जोरों पर
Updated: December 16, 2011
मंडला, 17 जनवरी 2011. आगामी 10,11 व 12 फरवरी 2011 को संपन्न होने जा रहे मा नर्मदा सामाजिक कुंभ की तैयारियां रानी दुर्गावती परिसर में…
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कविता/की जब मैंने दुख से प्रीत
Updated: December 16, 2011
कल क्या होगा, इस चिंता में रात गई आँखों में बीत। होठों पर आने से पहले, सुख का प्याला गया रीत। आशाओं का दीप जला…
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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में उर्दू पत्रकारिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 22 को
Updated: December 16, 2011
भोपाल, 21 जनवरी, 2011. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविधालय, भोपाल में 22 जनवरी को उर्दू पत्रकारिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा…
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उधर लाशें उठाई जा रही थीं, इधर “भावी प्रधानमंत्री” पार्टी मना रहे थे… …
Updated: December 16, 2011
सुरेश चिपलूनकर जैसा कि सभी को ज्ञात हो चुका है कि केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी मन्दिर की पहाड़ियों में भगदड़ से 100 से अधिक…
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कचरे का डिब्बा घर है अब, चूहे की सेज बिस्तर मेरा
Updated: December 16, 2011
शिखा वार्ष्णेय ये किसी कविता की पंक्तियाँ नहीं जीवन का यथार्थ है कुछ लोगों का। लन्दन का मिनी इंडिया कहा जाने वाला इलाका साउथ हॉल,…
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“गण”से दूर होता “तंत्र”
Updated: December 16, 2011
अंकुर विजयवर्गीय “26 जनवरी को मैंने सोचा है कि आराम से सुबह उठूंगा, फिर दिन में दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाना है, इसके बाद…
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टेलीविजन संस्थाएं समाज का बेड़ा गर्क कर रही हैं
Updated: December 16, 2011
अनिकेत प्रियदर्शी पहले बुद्धू बक्से के नाम से सुशोभित और आज लफड़ा बक्सा का पर्याय बन चुका हमारा टेलीविजन इस कदर पगला गया है कि…
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ममता बनर्जी खबर नहीं प्रौपेगैण्डा है
Updated: December 16, 2011
जगदीश्वर चतुर्वेदी बांग्ला चैनलों में इन दिनों माओवादियों के नृशंस कर्मों का प्रतिदिन महिमामंडन चल रहा है। बांग्ला चैनलों में ममता बनर्जी और राजनीतिक हिंसा…
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