विविधा सिकुड़ती धरती, पसरता शहर

सिकुड़ती धरती, पसरता शहर

-सतीश सिंह तेज शहरीकरण की आपाधापी में इंसान उन बुनियादी तथ्यों को भूल चुका है जो प्रकृति द्वारा प्रदत्ता संसाधनों की हदों से वास्ता रखते…

Read more
विविधा मिड डे मील : पौष्टिक बनाम दूषित भोजन खाने को मजबूर बच्चे

मिड डे मील : पौष्टिक बनाम दूषित भोजन खाने को मजबूर बच्चे

-फ़िरदौस ख़ान स्कूलों में मिलने वाला दोपहर का भोजन ‘मिड डे मील’ भी बच्चों को कुपोषण से बचाने में सहायक साबित नहीं हो पा रहा…

Read more
विश्ववार्ता नेपाल के लिए घातक हैं माओवादी

नेपाल के लिए घातक हैं माओवादी

– पवन कुमार अरविंद नेपाल में माओवादियों की धैर्यहीन सत्ताभिमुखी राजनीति देश को बर्बाद करके रख देगी। राजतंत्र के दौर में माओवादी नेता पुष्प कमल…

Read more
पर्यावरण संकटग्रस्त सुन्दरवन और न्यू मूर द्वीप अब सागर के आगोश की ओर

संकटग्रस्त सुन्दरवन और न्यू मूर द्वीप अब सागर के आगोश की ओर

-मनोज श्रीवास्तव ”मौन’‘ दुनिया में अपने सदाबहार वनों के कारण 3500 किमी. के क्षेत्रफल में फैले और तटबन्ध से सुरक्षित वन्यक्षेत्र सुन्दरवन के रूप में…

Read more
धर्म-अध्यात्म त्याग, करूणा व ज्ञान के भण्डार – महात्मा बुद्ध

त्याग, करूणा व ज्ञान के भण्डार – महात्मा बुद्ध

– विनोद बंसल बालक सिद्धार्थ अपने चचेरे भाई के साथ जंगल की ओर निकले। भाई देवदत्त के हाथ में धनुष बाण था। ऊपर उडते एक…

Read more
समाज मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बदज़ात मिले

मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बदज़ात मिले

– पंकज झा महिलाओं-बच्चियों के साथ किये जा रहे उत्पीड़न की शृंखला में टेनिस खिलाड़ी रही रुचिका गहरोत्रा का मामला एक बार और चर्चा में…

Read more
विविधा अंडमान : बदलाव की बयार के तीस साल

अंडमान : बदलाव की बयार के तीस साल

-एस. बालाकृष्णन बंगाल की खाड़ी के पूर्व में स्थित भारत के पन्ना द्वीपों की यह दूसरी यात्रा थी। जब इंडियन एयरलाइन्स का जहाज वीर सावरकर…

Read more
टेक्नोलॉजी कम्प्यूटर और स्वावलंबन

कम्प्यूटर और स्वावलंबन

-तिलक कम्प्यूटर आज के समय का सर्वाधिक विश्वसनीय व महत्वपूर्ण उपकरण है जिस पर हम पूर्णतया निर्भर करते हैं! सर्च इंजन से कुछ भी खोज…

Read more
विविधा हमारे देश की सारी समस्या का हल – हिन्दी है

हमारे देश की सारी समस्या का हल – हिन्दी है

-सतीश कुमार आर. रावत “हमारा देश सन 1947 में आजाद हुआ” यह शब्द हमें हर जगह और हर दिन सुनने को मिलता है पर यह…

Read more
राजनीति यूं ही गुजरा साल

यूं ही गुजरा साल

-संजय द्विवेदी डा. मनमोहन सिंह की सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा करने जा रही है किंतु बताने के लिए उसके पास क्या…

Read more
विविधा नंदीग्राम से वेदांत विश्वविद्यालय तक- सरकारी दमन की एक ही गाथा

नंदीग्राम से वेदांत विश्वविद्यालय तक- सरकारी दमन की एक ही गाथा

-डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री 12 मई 2004 को मुम्बई में वर्ली में रहने वाले चार लोगों ने मिलकर भारतीय कम्पनी अधिनियम की धारा 25 के…

Read more
समाज ज़िन्दगी से भागते लोग

ज़िन्दगी से भागते लोग

-फ़िरदौस ख़ान यह एक विडंबना ही है कि ‘जीवेम शरद् शतम्’ यानी हम सौ साल जिएं, इसकी कामना करने वाले समाज में मृत्यु को अंगीकार…

Read more