कविता हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है

हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है

—विनय कुमार विनायकहे पार्थ! जीव आत्मा है परमात्मा है,पर शरीर से जाना पहचाना जाता है! शरीर की गतिविधि से ही ज्ञात होती,आत्मा की स्थिति, मानसिक…

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राजनीति राष्ट्र ध्वज की निर्माण कथा – भाग-1

राष्ट्र ध्वज की निर्माण कथा – भाग-1

ध्वज समिति के अनुशंसा, भगवा रंग का हो राष्ट्र ध्वज – लोकेन्द्र सिंह ध्वज किसी भी राष्ट्र के चिंतन और ध्येय का प्रतीक तथा स्फूर्ति…

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राजनीति अखंड भारत – जो सपना ज़िंदा रहता है वही पूरा होता है 

अखंड भारत – जो सपना ज़िंदा रहता है वही पूरा होता है 

– डॉ. पवन सिंह  अखंड भारत हमारे लिए केवल शब्द नहीं है ।  यह हमारी श्रद्धा, भाव, देशभक्ति व संकल्पों का अनवरत प्रयास है जिसे प्रत्येक देशभक्त जीवंत महसूस करता है ।…

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राजनीति विश्व गुरू का मार्ग प्रशस्त करेगा अखंड भारत का विचार

विश्व गुरू का मार्ग प्रशस्त करेगा अखंड भारत का विचार

अखंड भारत स्मृति दिवस पर विशेष… सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में जब कहीं से भी देश को तोडऩे की बात आती है तो स्वाभाविक रूप से…

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राजनीति  जरा याद करो कुर्बानी……!

 जरा याद करो कुर्बानी……!

आज़ादी की अमृत महोत्सव बेला में -प्रो.रसाल सिंह                         जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान हैI                               वह नर नहीं, नर-पशु निरा…

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कविता उड़े तिरंगा बीच नभ

उड़े तिरंगा बीच नभ

आज तिरंगा शान है, आन, बान, सम्मान।रखने ऊँचा यूँ इसे, हुए बहुत बलिदान।।नहीं तिरंगा झुक सके, नित करना संधान।इसकी रक्षा के लिए, करना है बलिदान।।देश…

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कविता मेरा भारत मेरा तिरंगा

मेरा भारत मेरा तिरंगा

सूरज बन कर जग में चमके,भारत देश हमारा।हर घर में तिरंगा फहराए ये मिशन अब हमारा।। विश्व गुरु हों जाए भारत,यही कामना करते है।सुख शांति…

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कविता आज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?

आज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?

—विनय कुमार विनायकआज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?क्यों ईश्वर अल्लाह रब हो गया अलग अलग? आज का आदमी आदमी से करने लगा नफरत,आदमी…

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राजनीति श्रीकांत त्यागी प्रकरण – ओछी राजनीति व क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ

श्रीकांत त्यागी प्रकरण – ओछी राजनीति व क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ

दीपक कुमार त्यागी जिस तरह से श्रीकांत त्यागी को गिरफ्तार करने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम की पीठ शासन-प्रशासन में दिग्गज पदों को सुशोभित…

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कविता अब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते

अब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते

—विनय कुमार विनायकअब राजनीति में नेताचोला नहीं अंतरात्मा बदल लेतेकल तक जो भ्रष्टाचारी थेउन्हें महात्मा कहने पर बल देतेस्वार्थ सिद्धि हेतु जनता से छल करते!…

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लेख हम मनुष्यों की आत्मा व शरीर की आयु कितनी है?

हम मनुष्यों की आत्मा व शरीर की आयु कितनी है?

–मनमोहन कुमार आर्य                 हम विगत अनेक वर्षों से इस संसार में रह रहे हैं। सभी मनुष्यों की अपनी–अपनी जन्म तिथी है। यह जन्म तिथि…

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लेख बीसवीं सदी के चालीस के दशक के दिन

बीसवीं सदी के चालीस के दशक के दिन

बीसवीं सदी के चालीस के दशक के दिन काफी दिलचस्प थे।   यह काल-खण्ड अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय विश्व-युद्ध का था, राष्ट्रीय स्तर पर स्वतन्त्रता…

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