राजनीति आजादी के नये जन्म का सुखद संकेत

आजादी के नये जन्म का सुखद संकेत

-ललित गर्ग- भारतीय स्वतंत्रता का एक नया दौर प्रारंभ हो रहा है या यूं कहूं कि हमारी आजादी अब अमृत महोत्सव मनाने के बाद शताब्दी…

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लेख अखंड भारत की राह में, सिंध के बिना हिंद अधूरा

अखंड भारत की राह में, सिंध के बिना हिंद अधूरा

जैसा कि सर्वविदित है कि प्राचीन भारत का इतिहास बहुत वैभवशाली रहा है। भारत माता को सही मायने में “सोने की चिड़िया” कहा जाता था…

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लेख “हर घर तिरंगा – हर घर शास्त्र – हर घर शस्त्र”

“हर घर तिरंगा – हर घर शास्त्र – हर घर शस्त्र”

यह अत्यंत सुखद है कि स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ पर “अमृत महोत्सव” के नाम पर अनेक स्थानों पर भव्य समारोह एवं सम्मेलन आदि आयोजित…

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राजनीति आत्ममंथन का अवसर है स्वतंत्रता दिवस

आत्ममंथन का अवसर है स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्र शब्द का सीधा अर्थ है ‘अपना तंत्र ‘। राजनीतिक संदर्भ में स्वतंत्रता समाज के अपने बनाए हुए तंत्र का अर्थ व्यक्त करती है। तंत्र…

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कविता हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है

हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है

—विनय कुमार विनायकहे पार्थ! जीव आत्मा है परमात्मा है,पर शरीर से जाना पहचाना जाता है! शरीर की गतिविधि से ही ज्ञात होती,आत्मा की स्थिति, मानसिक…

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राजनीति राष्ट्र ध्वज की निर्माण कथा – भाग-1

राष्ट्र ध्वज की निर्माण कथा – भाग-1

ध्वज समिति के अनुशंसा, भगवा रंग का हो राष्ट्र ध्वज – लोकेन्द्र सिंह ध्वज किसी भी राष्ट्र के चिंतन और ध्येय का प्रतीक तथा स्फूर्ति…

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राजनीति अखंड भारत – जो सपना ज़िंदा रहता है वही पूरा होता है 

अखंड भारत – जो सपना ज़िंदा रहता है वही पूरा होता है 

– डॉ. पवन सिंह  अखंड भारत हमारे लिए केवल शब्द नहीं है ।  यह हमारी श्रद्धा, भाव, देशभक्ति व संकल्पों का अनवरत प्रयास है जिसे प्रत्येक देशभक्त जीवंत महसूस करता है ।…

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राजनीति विश्व गुरू का मार्ग प्रशस्त करेगा अखंड भारत का विचार

विश्व गुरू का मार्ग प्रशस्त करेगा अखंड भारत का विचार

अखंड भारत स्मृति दिवस पर विशेष… सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में जब कहीं से भी देश को तोडऩे की बात आती है तो स्वाभाविक रूप से…

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राजनीति  जरा याद करो कुर्बानी……!

 जरा याद करो कुर्बानी……!

आज़ादी की अमृत महोत्सव बेला में -प्रो.रसाल सिंह                         जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान हैI                               वह नर नहीं, नर-पशु निरा…

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कविता उड़े तिरंगा बीच नभ

उड़े तिरंगा बीच नभ

आज तिरंगा शान है, आन, बान, सम्मान।रखने ऊँचा यूँ इसे, हुए बहुत बलिदान।।नहीं तिरंगा झुक सके, नित करना संधान।इसकी रक्षा के लिए, करना है बलिदान।।देश…

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कविता मेरा भारत मेरा तिरंगा

मेरा भारत मेरा तिरंगा

सूरज बन कर जग में चमके,भारत देश हमारा।हर घर में तिरंगा फहराए ये मिशन अब हमारा।। विश्व गुरु हों जाए भारत,यही कामना करते है।सुख शांति…

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कविता आज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?

आज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?

—विनय कुमार विनायकआज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?क्यों ईश्वर अल्लाह रब हो गया अलग अलग? आज का आदमी आदमी से करने लगा नफरत,आदमी…

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