कविता मन के पार उतर कर आत्मचेतना परम तत्व को पाना

मन के पार उतर कर आत्मचेतना परम तत्व को पाना

—विनय कुमार विनायकमनुष्य की उत्पत्ति मन से होतीमनुष्य मन की गति से विचरण करतामनुष्य मन ही मन मनन करतामनुष्य जहां ध्यान धरता वहां पहुंच जाता!…

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कविता नींबू के मन के वेदना

नींबू के मन के वेदना

कब तक तुम मुझको दरवाज़े पर लटकाओगे।मेरे भी कुछ अरमान है,कब तक मुझे सताओगे।। मैने किए बहुत उपकार बुरी नजरों से बचाया है।खुद लटक कर…

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कविता हनुमान जयंती

हनुमान जयंती

हाथ में गदा रखते है हनुमान,लाल लंगोट पहनते है हनुमान।जो उनकी पूजा सदैव है करता,उनका कल्याण करते है हनुमान। अष्ट सिद्धि के दाता है हनुमाननौ…

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राजनीति नेपाल पुनः एक हिंदू राष्ट्र बने, यह भारत के हित में होगा

नेपाल पुनः एक हिंदू राष्ट्र बने, यह भारत के हित में होगा

नेपाल एक बहुत खूबसूरत दक्षिण एशियाई राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे तिब्बत है तो इसके दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत की सीमाएं लगती…

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लेख हिन्दी को कब बनाया जाएगा भाषाओं के माथे की बिंदी!

हिन्दी को कब बनाया जाएगा भाषाओं के माथे की बिंदी!

लिमटी खरे देश में हिन्दी के कब दिन बहुरेंगे! कब हिन्दी को राष्ट्रभाषा का आधिकारिक दर्जा मिल पाएगा! यह बात सभी के जेहन में घुमड़ना…

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कविता मै हूं एक मिट्टी का घड़ा

मै हूं एक मिट्टी का घड़ा

मै हूं एक मिट्टी का घड़ा,सड़क किनारे मै हूं पड़ा।बुझाता हूं मै सबकी प्यास,कुम्हार मुझे लिए है खड़ा।। खुदाने से खोदकर मिट्टी लाता है,तब कहीं…

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राजनीति खरगौन हिंसा, गरीबों के जले घर और शिवराज सरकार

खरगौन हिंसा, गरीबों के जले घर और शिवराज सरकार

डॉ. मयंक चतुर्वेदी‘मेरी उम्र भर की कमाई ले भागे, क्या करूंगी अब जी के, मुझे पुलिस के हाथ गोली मरवा दो, आराम से सो जाऊंगी’…

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राजनीति हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाएं और देवनागरी लिपि

हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाएं और देवनागरी लिपि

प्रो. रसाल सिंह संसदीय राजभाषा समिति की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी को अपनाने…

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राजनीति भारतीय संविधान के महान शिल्पकार बाबा साहेब

भारतीय संविधान के महान शिल्पकार बाबा साहेब

अम्बेडकर जन्म दिवस पर विशेष लेखक : डॉ कमल गुप्ता भारतीय संविधान के महान शिल्पकार समाज के दलित शोषित वर्ग के मसीहा,  महान लेखक, ओजस्वी वक्ता,…

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कला-संस्कृति गाय सर्वोत्तम उपकारी पशु होने सहित हमारी पूजनीय देवता भी है

गाय सर्वोत्तम उपकारी पशु होने सहित हमारी पूजनीय देवता भी है

–मनमोहन कुमार आर्य   परमात्मा ने इस सृष्टि को जीवात्माओं को कर्म करने व सुखों के भोग के लिए बनाया है। जीवात्मा का लक्ष्य अपवर्ग होता है। अपवर्ग मोक्ष वा मुक्ति को कहते हैं। दुःखों की पूर्ण निवृत्ति ही मोक्ष कहलाती है। यह मोक्ष मनुष्य योनि में जीवात्मा द्वारा वेदाध्ययन द्वारा ज्ञान प्राप्त कर एवं उसके अनुरूप आचरण करने से प्राप्त होता है। सांख्य दर्शन में महर्षि कपिल ने मोक्ष का सूक्ष्मता से विवेचन किया है जिससे यह ज्ञात होता है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य वेद विहित सद्कर्मों अर्थात् ईश्वरोपासना, अग्निहोत्र यज्ञ एवं परोपकार आदि को करके जन्म व मरण के बन्धन वा दुःखों से छूटना छूटना है। जन्म व मरण रूपी आवागमन से अवकाश ही मोक्ष प्राप्ति है। मनुष्य को जीवित रहने के लिए भूमि, अन्न व जल सहित गोदुग्ध व फलों आदि मुख्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। गोदुग्ध हमें गाय से मिलता है। दूध व घृत आदि वैसे तो अनेक पशुओं से प्राप्त होते हैं परन्तु गाय के दूध के गुणों की तुलना अन्य किसी भी पशु से नहीं की जा सकती। गाय का दुग्ध मनुष्य के स्वास्थ्य, बल, बुद्धि, दीर्घायु आदि के लिए सर्वोत्तम साधन व आहार है। मनुष्य का शिशु अपने जीवन के आरम्भ में अपनी माता के दुग्ध पर निर्भर रहता है। माता के बाद उसका आहार यदि अन्य कहीं से मिलता है तो वह गाय का दुग्ध ही होता है। गाय का दूध भी लगभग मां के दूध के समान गुणकारी व हितकर होता है। भारत के सभी ऋषि, मुनि, योगी तथा विद्वान गोपालन किया करते थे और गाय का दूध, दधि, छाछ व घृत आदि का सेवन करते थे। गोदुग्ध से घृत भी बनाते थे और उससे अग्निहोत्र यज्ञ कर वायु व जल आदि की शुद्धि करते थे। इन सब कार्यों से वह स्वस्थ, सुखी व दीर्घायु होते थे। ईश्वर प्रदत्त वेद के सूक्ष्म व सर्वोपयोगी ज्ञान को प्राप्त होकर सृष्टि के सभी रहस्यों यहां तक की ईश्वर का साक्षात्कार करने में भी सफल होते थे और मृत्यु होने पर मोक्ष या श्रेष्ठ योनि में जन्म लेकर सुख व आनन्दयुक्त जीवन प्राप्त करते थे।  गाय से हमें केवल दूध ही नहीं मिलता अपितु गाय नामी पशु हमारी अपनी माता के समान नाना प्रकार से हमारी सेवा करती है और साथ ही कुछ महीनों व वर्षों के अन्तराल पर हमें पुनः बछड़ी व बछड़े देकर प्रसन्न व सन्तुष्ट करती है। बछड़ी कुछ वर्ष में ही गाय बन जाती है और हम उसके भी दुग्ध, गोबर, गोमूत्र, गोचर्म (मरने के बाद) को प्राप्त कर अपने जीवन मे सुख प्राप्त करते हैं। गोबर न केवल ईधन है जिससे विद्युत उत्पादन, गुणकारी खाद, घर की लिपाई आदि में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी प्रकार से गोमूत्र भी एक महौषधि है। इससे कैंसर जैसे रोगों का सफल उपचार होता है। नेत्र ज्योति को बनाये रखने तथा नेत्र रोगों को दूर करने में भी यह रामबाण औषध के समान एक रसायन है। त्वचा के रोगों में भी गोमूत्र से लाभ होता है। आजकल पंतजलि आयुर्वेद द्वारा गोमूत्र को सस्ते मूल्य तथा आकर्षक पैकिंग में उपलब्ध कराया जा रहा है जिसका लाखों लोग अमृत के समान प्रतिदिन सेवन करते हैं। गोमूत्र किटाणु  नाशक होता है। इससे उदरस्थ कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं। ऐसे और भी अनेक लाभ गोमूत्र से होते हैं। गाय के मर जाने पर उसका चर्म भी हमारे पैरों आदि की रक्षा करता है। गोचर्म के भी अनेक उपयोग हैं अतः हम जो जो लाभ गो माता से लेते जाते हैं उस-उस से हम गोमाता के ऋणी होते जाते हैं। हमारा भी कर्तव्य होता है कि हम भी गोमाता का, उससे हमें मिलने वाले लाभों के प्रति, प्रत्युपकार करें, उसका ऋण उतारें, उसको अच्छा चारा दें, उसकी खूब सेवा करें और उसके दुग्ध व गोमूत्र का पान करें जिससे हम स्वस्थ व दीर्घायु होकर धर्म,…

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विश्ववार्ता अमेरिका को झुकाया भारत ने

अमेरिका को झुकाया भारत ने

यूक्रेन के बारे में भारत पर अमेरिका का दबाव बढ़ता ही चला जा रहा था और ऐसा लग रहा था कि हमारे रक्षा और विदेश…

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कविता नींबू की चाह

नींबू की चाह

चाह नहीं मेरी,मिर्ची की साथ मै गूंथा जाऊं।चाह नहीं मेरी,दरवाजे पर लटकाया जाऊं।। चाह नहीं मेरी,नमक चीनी के साथ में घुल जाऊं।चाह नहीं मेरी,मटर की…

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