राजनीति प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते कदम और देश की चुनौतियां

प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते कदम और देश की चुनौतियां

संसार को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने वाला भारत सबसे पहला और प्राचीन देश है । इसके उपरांत भी यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत की…

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महिला-जगत घरेलू हिंसा की गहरी होती जड़े

घरेलू हिंसा की गहरी होती जड़े

-ः ललित गर्ग :-कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने के लिए लगाई गई पूर्णबंदी के दौर में व्यापक पैमाने पर लोगों को रोजगार और रोजी-रोटी…

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कविता नया साल आया है, नया सवेरा लाया है

नया साल आया है, नया सवेरा लाया है

नया साल आया है, नया सवेरा लाया है, हर घर में खुशियों का मौसम छाया है। पड़ रही है कड़ाके की ठंड फिर भी जोश…

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कविता ये अपना नववर्ष नहीं है

ये अपना नववर्ष नहीं है

—विनय कुमार विनायक ये अपना नववर्ष नहीं है, अबतक कोई हर्ष नहीं है! कोविड19 से उबरे नहीं है, जीवन में उत्कर्ष नहीं है! सूर्य उत्तरायण…

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धर्म-अध्यात्म धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं

धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं

-मनमोहन कुमार आर्यधर्म के विषय में तरह तरह की बातें की जाती हैं परन्तु धर्म सत्याचरण वा सत्य कर्तव्यों के धारण व पालन का नाम…

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कविता नव उल्लास लिए नववर्ष के रंग..

नव उल्लास लिए नववर्ष के रंग..

भावनाओं का समुंद्र आकांक्षाओं की नाव, मस्ती के हिचकोले प्रेम की पाठशाला। उम्मीदों के लहराते पंख, बिजली की चमक, विश्वास का समर्पण, चाहत का उजियारा।…

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लेख नए वर्ष में हो नयी जीवनशैली का सार्थक संकल्प

नए वर्ष में हो नयी जीवनशैली का सार्थक संकल्प

ललित गर्ग – नए वर्ष का स्वागत हम इस सोच और संकल्प के साथ करें कि हमें कोरोना महामारी को अलविदा कहते हुए कुछ नया…

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ज्योतिष वर्ष 2022 का वार्षिक राशिफल

वर्ष 2022 का वार्षिक राशिफल

मेश रशि – वार्षिक राशिफल इस वर्ष 13 अप्रैल को गुरु मीन राशि में द्वदश  भाव में और 17 मार्च को राहु मेष राशि में प्रथम भाव…

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शख्सियत एक संत का अतुलनीय शिक्षा प्रेम

एक संत का अतुलनीय शिक्षा प्रेम

श्याम सुंदर भाटिया

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लेख वर्ष 2020′ का तनाव भूलकर ज़िंदादिली से करें अंग्रेजी नववर्ष ‘2021’ का स्वागत!

वर्ष 2020′ का तनाव भूलकर ज़िंदादिली से करें अंग्रेजी नववर्ष ‘2021’ का स्वागत!

दीपक कुमार त्यागी दुनिया में घातक महामारी कोराना का बेहद खतरनाक काल चल रहा है, खस्ताहाल काम धंधे, बेरोजगारी, बेहाल आर्थिक स्थिति व डर के…

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कविता मैं भगतसिंह बोल रहा हूं, मैं नास्तिक क्यों हूं?

मैं भगतसिंह बोल रहा हूं, मैं नास्तिक क्यों हूं?

—विनय कुमार विनायकमैं भगतसिंह बोल रहा हूंमैं नास्तिक क्यों हूं?मुझे नास्तिक कहनेवालेतुम आस्तिक कितने हो?किसी खास किस्म की लिबास पहने,किसी खास दिशा के ईश में…

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धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन व उसके लक्ष्य पर विचार

मनुष्य जीवन व उसके लक्ष्य पर विचार

हमारा यह जन्म मनुष्य योनि मे हुआ था और हम अपनी जीवन यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। हमें पता है कि कालान्तर में हमारी…

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