मीडिया वाद-विवाद-संवाद और मामा माणिकचंद्र वाजपेयी

वाद-विवाद-संवाद और मामा माणिकचंद्र वाजपेयी

डॉ. मयंक चतुर्वेदी वाद का अपना एक विवाद हो सकता है। कई बार वाद को लेकर छिड़ी बहसों ने संसद और विधानसभाओं में विवाद को…

Read more
राजनीति फतवा बनाम फसाद,वैक्सीन पर विवाद!

फतवा बनाम फसाद,वैक्सीन पर विवाद!

पूरे विश्व में एक भारी संकट है जिसे कोरोना अथवा कोविड 19 के नाम से जाना जाता है। जिससे पूरा विश्व त्रस्त है। दुनिया के…

Read more
राजनीति नीतीश का अहम फैसला, आरसीपी को जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष की सर्वसम्मती से कमान

नीतीश का अहम फैसला, आरसीपी को जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष की सर्वसम्मती से कमान

– मुरली मनोहर श्रीवास्तवजदयू की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि एक साथ दो…

Read more
राजनीति सरकार बनाम किसान

सरकार बनाम किसान

भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है|इस व्यवस्था में सरकारी और निजी क्षेत्र की सहभागिता होती है|मिश्रित अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान होता है|किसान भारत…

Read more
दोहे आए कहाँ हैं आफ़ताब !

आए कहाँ हैं आफ़ताब !

आए कहाँ हैं आफ़ताब, रोशनी लिए;रूहों की कोशिका के दिये, झिलमिले किए! मेघों की मंजु माला, अभी गगन है गुथी;दायरे दौर कितने अभी, आँधियाँ मखी!मन…

Read more
दोहे विश्वास में बसा है यहाँ!

विश्वास में बसा है यहाँ!

विश्वास में बसा है यहाँ,  सारा सिलसिला; मिट जाता जो भी आता,  जगती जड़ का ज़लज़ला!  चैतन्य सत्ता सतत रहती, शून्य समाई; अवलोके लोक लुप्त भाव, ललित लुभाई!  लावण्य हरेक गति में रहा, हर लय छाई; लोरी लिए ही लखते रहो, उनकी खुदाई!  खेलो खिलाओ वाल सरिस,  बुधि न लगाओ; कान्हा की श्यामा श्याम रंग, घुल मिल जाओ!  वसुधा हुई है ध्यान मग्न,  काल भुलाईं; ‘मधु’ कोंपलों में परागों का, प्राण है ढला!  ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ 

Read more
धर्म-अध्यात्म जिस प्रयोजन के लिये परमात्मा ने जीवन दिया है उसे करना ही धर्म एवं कर्तव्य है

जिस प्रयोजन के लिये परमात्मा ने जीवन दिया है उसे करना ही धर्म एवं कर्तव्य है

-मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य जन्म लेता है परन्तु उसे यह पता नहीं होता कि उसके जन्म लेने व परमात्मा के जन्म देने का प्रयोजन किया है?…

Read more
विश्ववार्ता क्या ट्रंप की हार ने लिखी नेतन्याहू की विदाई…?

क्या ट्रंप की हार ने लिखी नेतन्याहू की विदाई…?

सियासत एक ऐसा खेल है जिसकी रूप रेखा सदैव ही पर्दे के पीछे से तय की जाती है। पर्दे के बाहर खुले आसमान के नीचे…

Read more
कविता बन सौरभ तू बुद्ध !!

बन सौरभ तू बुद्ध !!

मतलबी संसार का, कैसा मुख विकराल !अपने पाँवों मारते, सौरभ आज कुदाल !! सिमटा धागा हो सही, अच्छे है कम बोल !सौरभ दोनों उलझते, अगर…

Read more
कविता इन दिनों।।

इन दिनों।।

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनोंकुछ की बदल गयी है देखो चाल इन दिनोंजो हाथ मिलाते थे अदब से करें आदाबअब पूछते…

Read more
कविता नारी तुम नारायणी हो नर का सृजनहार

नारी तुम नारायणी हो नर का सृजनहार

—–विनय कुमार विनायकनारी के ह्रदय में अमृत, मन में प्यार,नारी तुम्हारे सामने,बौना है ये संसार! तुम असीम,अतुलनीय ईश्वरीय शक्ति,तुलना तुम्हारी नर से करना है बेकार!…

Read more
धर्म-अध्यात्म सत्यार्थप्रकाश ग्रंथ अविद्या दूर करने के लिये लिखा गया ग्रंथ है

सत्यार्थप्रकाश ग्रंथ अविद्या दूर करने के लिये लिखा गया ग्रंथ है

–मनमोहन कुमार आर्य                 ऋषि दयानन्द सरस्वती जी का सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ देश देशान्तर में प्रसिद्ध ग्रन्थ है। ऋषि दयानन्द ने इस ग्रन्थ को क्यों लिखा?…

Read more