आर्थिकी भारत में पूंजी की बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए करने होंगे नवोन्मेष उपाय

भारत में पूंजी की बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए करने होंगे नवोन्मेष उपाय

केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2024-25 तक 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के आकार का बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस…

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धर्म-अध्यात्म ईश्वर ने हम जीवात्माओं को मनुष्य क्यों बनाया?

ईश्वर ने हम जीवात्माओं को मनुष्य क्यों बनाया?

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।हम मनुष्य कहलाते हैं। वस्तुतः सदाचार को धारण कर ही हम मनुष्य बन सकते हैं परन्तु सदाचारी व धर्मात्मा मनुष्य बनने के…

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कविता आगम व निगम में त्याग ग्रहण का अंतर है

आगम व निगम में त्याग ग्रहण का अंतर है

—विनय कुमार विनायकहिन्दुओं के धर्मग्रंथआगम और निगमसनातन धर्म की दो धाराएंचल रही है आरंभ से! आगम परंपरागत ज्ञान है,निगम वेदों का विधान है,आगम मानव जातियों…

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कविता वक्त के खिलाफ मुहिम

वक्त के खिलाफ मुहिम

—विनय कुमार विनायकजबतक दिकभ्रमित होकर,हम काटते रहेंगे अपने हाथ-पांवतबतक कमजोर प्रतिद्वंदी भीबांटता रहेगा देश, नगर और गांव! आज हम फिर से पंगु हैंएक राजा भोज…

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राजनीति धर्मनिरपेक्षता के पाखंड का टूटता मिथक

धर्मनिरपेक्षता के पाखंड का टूटता मिथक

प्रमोद भार्गवजय श्रीराम के नारे पर आपत्ति जताने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धर्मनिरपेक्षता के पाखंड का मिथक इस चुनाव में टूटता…

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राजनीति भारत केन्द्रित है नई शिक्षा नीति

भारत केन्द्रित है नई शिक्षा नीति

डॉ. रामकिशोर उपाध्यायनई शिक्षा नीति को लेकर चारों ओर उत्साह का वातारण है। इन दिनों देशभर में नई शिक्षा नीति को लेकर संगोष्ठियाँ, परिचर्चाएँ, सेमिनार…

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राजनीति मंदिर-मस्जिद: विचार-मंथन जरूरी

मंदिर-मस्जिद: विचार-मंथन जरूरी

डॉ. वेदप्रताप वैदिकसर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐसे कानून पर पुनर्विचार की याचिका स्वीकार कर ली है, जिसका उद्देश्य था- भारत के मंदिर-मस्जिदों के विवादों पर…

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व्यंग्य “कबिरा खड़ा बाजार में “

“कबिरा खड़ा बाजार में “

इधर अकादमी पुरस्कारों की घोषणा हुई उधर सिद्धवाणी का उद्घघोष शुरू हो गया । वैसे सिद्धवाणी जो खुद को कबीरवाणी भी कहती रही है कि…

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विश्ववार्ता अपने नहीं दूसरे देश के अल्पसंख्यकों के ये कथित ‘हित चिंतक’ ?

अपने नहीं दूसरे देश के अल्पसंख्यकों के ये कथित ‘हित चिंतक’ ?

तनवीर जाफ़री

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कविता बीते हुए दिनो को भुला न देना

बीते हुए दिनो को भुला न देना

बीते हुए दिनो को भुला न देना,आज हसे है, कल रुला न देना।। मिला है मुश्किल से स्नेह तुम्हारा,इसको तुम मिट्टी में मिला न देना।…

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लेख जीवन को अपसेट नहीं, परफेट बनाये

जीवन को अपसेट नहीं, परफेट बनाये

ललित गर्ग आज सुविधाओं का बहुत विस्तार हुआ है, जो साधन किसी समय में विरले व्यक्तियों के लिए सुलभ थे, वे आज सर्वसाधारण के लिए…

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धर्म-अध्यात्म वेद अपौरुषेय ज्ञान एवं भाषा के ग्रन्थ हैं

वेद अपौरुषेय ज्ञान एवं भाषा के ग्रन्थ हैं

-मनमोहन कुमार आर्यवेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की संहिताओं में निहित मंत्रों व इनके सभी मन्त्रों में निहित ज्ञान को कहते हंै। वेदों का…

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