राजनीति किसान आन्दोलन का हिंसक एवं अराजक हश्र

किसान आन्दोलन का हिंसक एवं अराजक हश्र

ललित गर्ग- किसान आन्दोलन तथा विभिन्न विचारों, मान्यताओं के विघटनकारी दलों के घालमेल की राजनीति ने भारत के गणतंत्र को शर्मसार किया। भीड़ वाले आंदोलनों…

Read more
पर्यावरण जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों का विस्तार ज़रूरी

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों का विस्तार ज़रूरी

पैरिस समझौते के क्रम में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए आवश्यक है कि वैश्विक वार्षिक ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन में 2030 तक वर्तमान स्तर के 50 प्रतिशत…

Read more
राजनीति देश का मेहनतकश, सच्चा किसान कभी जयचंद नहीं हो सकता.

देश का मेहनतकश, सच्चा किसान कभी जयचंद नहीं हो सकता.

किसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जो कुछ भी हुआ है उसे जायज नहीं करार दिया जा सकता है.…

Read more
लेख मजबूत हौसले ने दी उड़ान

मजबूत हौसले ने दी उड़ान

रमा शर्मा टोंक, राजस्थान पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले कुछ…

Read more
महिला-जगत यौन शोषण के नित्य नए तर्क व परिभाषायें

यौन शोषण के नित्य नए तर्क व परिभाषायें

Read more
लेख बड़ा सवाल ; दिल्ली में हुई घटना का जिम्मेदार कौन, जवाब ; हम सब..

बड़ा सवाल ; दिल्ली में हुई घटना का जिम्मेदार कौन, जवाब ; हम सब..

सुशील कुमार ‘नवीन’ 26 जनवरी को दिल्ली में जो हुआ। गलत हुआ। ऐसा नहीं होना चाहिए था। किसानों का यह तरीका न्यायसंगत नहीं है। किसान…

Read more
राजनीति जन-मन के बिना ‘गण’तंत्र एक त्रासद विडम्बना

जन-मन के बिना ‘गण’तंत्र एक त्रासद विडम्बना

मनोज ज्वालाहमारे राष्ट्र-गान में ‘जन-मन’ के बीच में है ‘गण’ । शब्दों के इसक्रम के अपने विशेष निहितार्थ हैं । जन अर्थात जनता को अभिव्यक्त…

Read more
राजनीति दिल्ली में किसानों का दंगल, शर्मसार लोकतंत्र?

दिल्ली में किसानों का दंगल, शर्मसार लोकतंत्र?

                      प्रभुनाथ शुक्ला  आपसब को बेहतर तरीके से याद होगा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल…

Read more
कविता तुम बेटा नहीं, बेटी ही हो

तुम बेटा नहीं, बेटी ही हो

—–विनय कुमार विनायकबड़ा कठिन है एक पिता के लिएपुत्र और कन्या में अंतर जान पानाएक किसान की तरह पिता भीनिष्काम भाव से विसर्जित करता है…

Read more
कविता निर्धन

निर्धन

पसंद नहीं वर्षा के दिननहीं भाती पूस की रातमिट्टी का घर है उसकानिर्धनता है उसकी ज़ात श्रम की अग्नि में जब वहपिघलाता है कृशकाय तनतब…

Read more
राजनीति गणतंत्र के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम

गणतंत्र के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम

अरविंद जयतिलक 26 जनवरी 1950 को भारत ने संसार को एक नए गणराज्य के गठन की सूचना दी। संविधान की भावना के अनुरुप ही भारत…

Read more
कविता गणतंत्र

गणतंत्र

दुनिया करती हैउस राष्ट्र का सम्मानजिसके पास होता हैअपना संविधान जनता में समाहितहोती है जब सत्तातब किसी देश कागणतंत्र है बनता भारत भी हुआ थातब…

Read more