धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्मियों के लिये राष्ट्र वन्दनीय है तथा सत्यार्थप्रकाश इसका पोषक है

वैदिक धर्मियों के लिये राष्ट्र वन्दनीय है तथा सत्यार्थप्रकाश इसका पोषक है

-मनमोहन कुमार आर्यसंसार में मत-मतान्तर तो अनेक हैं परन्तु धर्म एक ही है। वेद ही एकमात्र सर्वाधिक व पूर्ण मानवतावादी धर्म है। वेद में निर्दोष…

Read more
पर्यावरण आपकी बिजली की ज़रूरत ले रही है शायद इनकी जान

आपकी बिजली की ज़रूरत ले रही है शायद इनकी जान

इस वक़्त अगर आप इस ख़बर को पढ़ रहे हैं तो मतलब आपके पास बिजली की सप्लाई है। और इस बात की भी पूरी उम्मीद…

Read more
राजनीति मुख्यमंत्री नहीं, अभिभावक की मुद्रा में शिवराजसिंह

मुख्यमंत्री नहीं, अभिभावक की मुद्रा में शिवराजसिंह

नए मध्यप्रदेश की स्थापना के लगभग 7 दशक होने को आ रहे हैं. इस सात दशकों में अलग अलग तेवर और तासीर के मुख्यमंत्रियों ने…

Read more
कविता कुछ अच्छा सा काम करो हे मन

कुछ अच्छा सा काम करो हे मन

—विनय कुमार विनायककुछ अच्छा सा काम करो हे मन!जाने क्यों असमय छूट जाता तन! हमारे नहीं, हमारे परिजन के प्राण,जिनके बिना दुखद होता ये जीवन!जिनके…

Read more
लेख मिलावट तो मौन-हत्या है

मिलावट तो मौन-हत्या है

डॉ. वेदप्रताप वैदिक खाद्य-पदार्थों और दवाइयों में मिलावट करनेवाले अब जरा डरेंगे, क्योंकि बंगाल, असम और उप्र की तरह अब मध्यप्रदेश भी उन्हें उम्र कैद…

Read more
लेख अणुव्रत सूर्योदय है नये भारत का

अणुव्रत सूर्योदय है नये भारत का

अणुव्रत आंदोलन स्थापना दिवस-1 मार्च, 2021 पर विशेष -ललित गर्ग – नये युग के निर्माण और जन चेतना में नैतिक क्रांति के अभिनव एवं अनूठे…

Read more
लेख संत श्री रविदास ने सामाजिक समरसता के लिए अपना जीवन अर्पित किया था

संत श्री रविदास ने सामाजिक समरसता के लिए अपना जीवन अर्पित किया था

“मन चंगा तो कठौती में गंगा”, ये कहावत आपने जरूर सुनी होगी। क्या आप जानते हैं ये कहां से आई, इसके पीछे एक दिलचस्प घटना…

Read more
विश्ववार्ता भारत-पाकः शुभ-संकेत

भारत-पाकः शुभ-संकेत

डॉ. वेदप्रताप वैदिक भारत और पाकिस्तान को लेकर इधर कुछ ऐसी खबरें आई हैं कि यदि उन पर काम हो गया तो दोनों देशों के…

Read more
कहानी कोख का कर्ज

कोख का कर्ज

जगेश बाबू का कभी अपना जलवा था। रौबिले और गठिले जिस्म पर सफेद कुर्ता-धोती मारवाड़ी पगड़ी खूब फबती। हाथ में छड़ी और मुंह में पान…

Read more
जन-जागरण शर्म नहीं, शक्ति का प्रतीक है माहवारी

शर्म नहीं, शक्ति का प्रतीक है माहवारी

सौम्या ज्योत्स्ना मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार देश में किशोरी एवं महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार आया है। केंद्र से लेकर राज्य…

Read more
कविता भारत की आंखें

भारत की आंखें

—विनय कुमार विनायकभारत की आंखेंबड़ी ही खूबसूरत होती हैभारत की आंखों मेंईश्वर की मोहिनी मूरत होती हैभारत की आंखों नेदेखी दिखाई दुनिया कोराम कृष्ण बुद्ध…

Read more
कविता मैं पागल हूं, रहने दो।।

मैं पागल हूं, रहने दो।।

कुछ कहता हूँ कहने दो , मैं पागल हूं, रहने दोआँसू देख तेरे आंखों में मेरे अश्क भी बहने दोवो कहती है मैं पागल ,…

Read more