राजनीति कोरोना में जीना और मरना, दोनों मुहाल

कोरोना में जीना और मरना, दोनों मुहाल

डॉ. वेदप्रताप वैदिककोरोना का संकट भी क्या गजब का संकट है। इसने लोगों का जीना और मरना, दोनों मुहाल कर दिए हैं। दुनिया के दूसरे…

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सिनेमा सुशांत सिंह राजपूतः मुस्कुराहट के पीछे का दर्द

सुशांत सिंह राजपूतः मुस्कुराहट के पीछे का दर्द

सुशांत सिंह राजपूत एक ऐसा कलाकार जिसकी मुस्कुराहट उसका परिधान थी। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर सुनकर यकीन नहीं हो रहा है कि…

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सिनेमा सुशान्त का जाना मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा है

सुशान्त का जाना मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा है

प्रियंका सौरभ    कोरोना वायरस के कारण मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी तेजी से देश में उभरकर आया है. लॉकडाउन ने लोगों की आदतें तो…

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मनोरंजन दूसरों को हत्या की गुत्थी सुलझानेवाले ‘व्योमकेश’ सुशांत सिंह राजपूत की विवादास्पद मौत !

दूसरों को हत्या की गुत्थी सुलझानेवाले ‘व्योमकेश’ सुशांत सिंह राजपूत की विवादास्पद मौत !

■ डॉ. सदानंद पॉल अपना ‘वॉलीवुड’ को क्या हो गया है ? इरफान, ऋषि कपूर से लेकर अब सुशांत सिंह राजपूत के निधन की खबर !…

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मनोरंजन “छिछोरे” सुशांत सिंह राजपूत का यूं  चले जाना

“छिछोरे” सुशांत सिंह राजपूत का यूं चले जाना

मशहूर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई में अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी है। उनके नौकर ने उनके शव को पंखे से…

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मनोरंजन सबकी जुबां पर बस एक ही बात ‘सु-शांत’ आखिर ऐसा क्यों किया ?

सबकी जुबां पर बस एक ही बात ‘सु-शांत’ आखिर ऐसा क्यों किया ?

                                                                                –मुरली मनोहर श्रीवास्तव सुशांत तुम्हारे चले जाने की जैसे मनहूस खबर आयी, मुझे गुजरे कल की बातें याद आने लगी। तुमसे हुई चंद मुलाकातों…

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हिंदी दिवस बकलोल उपासकों ने ‘हिंदी’ का कबाड़ा किया !

बकलोल उपासकों ने ‘हिंदी’ का कबाड़ा किया !

■ डॉ. सदानंद पॉल 1949 के 14 सितम्बर को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाया, इसलिए इस तिथि को ‘हिंदी दिवस’…

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गजल वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं!

वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं!

वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे? निर्गुण की पहेली, अहसास की अठखेली; गुणों का धीरे धीरे प्रविष्ट होना सुमिष्ट लगना, पल पल की चादर में निखर सज सँवर कर आना! महत- तत्व से जैसे प्रकट होता सगुण का आविर्भाव, हर सत्ता का रिश्ता रख आत्मीय अवलोकन; पूर्व जन्मों के भावों का प्रष्फुरीकरण, वाल हास में लसी मधुरिमा का आलिंगन! अब वह कहाँ गया, माँ को शिशु समझ निहारना, चाहना दुग्ध माँगना निकट रख नेह करना; हर किसी की गोद आ आनन्द लेना, नानी नाना को नयनों से आत्मीय दुलार देना! व्यस्त होगये हो अब अपने खेलों में, हाथी घोड़ों गाड़ियों के खिलौनों में; यू-ट्यूव पर चलचित्र देखने में, माँ को ‘ना’ करने औ दौड़ाने में! अहं का यह अवतरण, चित्त का विचरण, है तो आत्म विस्तार का व्याप्तिकरण; पर ‘मधु’ के प्रभु की उसमें छिपी चितवन, कहती है, वे वे ही हैं, जो अतीत से अपने थे! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’

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राजनीति दलित वोटरों की ‘पीठ’ पर चढ़़ मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करती माया और भीम आर्मी

दलित वोटरों की ‘पीठ’ पर चढ़़ मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करती माया और भीम आर्मी

संजय सक्सेना    उत्तर प्रदेश में दलित वोटर हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहे हैं। दलितों के सहारे कांगे्रस ने दशकों तक यूपी पर राज…

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लेख देवीभक्त लांगुरा का उपहास करते लांगुरिया गीत

देवीभक्त लांगुरा का उपहास करते लांगुरिया गीत

                 आत्माराम यादव पीव        जहां-जहां मानव का अस्तित्व है वहाँ-वहाँ उसके विकास ओर प्रस्फुटन से अनेक मार्ग बनते गए है जो अनादि भी है…

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राजनीति इमरान खान का बेतुका बयान

इमरान खान का बेतुका बयान

डॉ. वेदप्रताप वैदिक एक तरफ दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम ने कुछ दिनों के लिए मस्जिद बंद कर दी, इसके बावजूद कि सरकार ने…

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राजनीति हिंदुओं ! मेवात दिखा रहा है तुम्हें आईना

हिंदुओं ! मेवात दिखा रहा है तुम्हें आईना

इस देश के तथाकथित सनातनी हिंदू ने अभी अपनी परंपरागत नींद को त्यागा नहीं है । इसने सोते-सोते अफगानिस्तान , पाकिस्तान , बांग्लादेश , ईरान…

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